
झाबुआ
में
एक
साधारण
दर्द
की
दवा
लेने
गई
महिला
की
दवा
खाने
के
बाद
मौत
हो
गई।
दरअसल
महिला
मेडिकल
स्टोर
पर
दांत
दर्द
की
दवा
लेने
गई
थी।
इस
दौरान
मेडिकल
स्टोर
की
घातक
लापरवाही
सामने
आई।
उसने
महिला
को
दांत
दर्द
की
जगह
सल्फास
की
गोली
दे
दी।
गोली
खाने
से
महिला
की
मौत
हो
गई।
ये
घटना
चिकित्सा
व्यवस्था
और
निगरानी
तंत्र
पर
बड़ा
सवाल
खड़ा
करती
है।
जानकारी
के
अनुसार
झाबुआ
की
आदिवासी
महिला
रेखा
को
दांत
दर्द
की
शिकायत
थी।
वह
अपने
पति
के
साथ
मेडिकल
स्टोर
से
दवा
लेने
गई,
जहां
गलती
से
उसे
दर्द
निवारक
दवा
की
जगह
सल्फास
की
गोली
दे
दी।
सल्फास
खाने
के
बाद
उसकी
हालत
बिगड़
गई
और
उसकी
मौत
हो
गई।
सल्फास
एक
कीटनाशक
है
न
कि
कोई
औषधि,
यह
मेडिकल
स्टोर
में
बेचना
भी
प्रतिबंधित
है,
सवाल
यह
उठता
है
कि
यह
ज़हर
मेडिकल
स्टोर
में
कैसे
मौजूद
था।
हालांकि
घटना
के
बाद
पुलिस
ने
मेडिकल
संचालक
को
हिरासत
में
लिया
है।
साथ
ही
मेडिकल
स्टोर
को
सील
कर
दिया
गया
है,
इसके
अलावा
भी
लाइसेंस
जप्त
कर
लिया
गया
है।
फिलहाल
अभी
भी
आदिवासी
क्षेत्र
में
हुई
इस
बड़ी
घटना
के
बाद
ड्रग
इंस्पेक्टर
और
पुलिस
मामले
की
जांच
की
बात
कर
रहे
हैं।
घटना
के
बाद
मृतक
महिला
के
परिजनों
और
सामाजिक
संगठनों
ने
इसे
गंभीर
लापरवाही
बताते
हुए
दोषियों
पर
सख्त
कार्रवाई
की
मांग
की
है।
लोगों
को
आशंका
है
कि
मेडिकल
स्टोर
किसी
रसूखदार
व्यक्ति
से
जुड़ा
है।
इसलिए
निष्पक्ष
जांच
पर
सभी
की
नजरें
टिकी
हैं।
ये
भी
पढ़ें
– पत्नी
की
फेक
ID
में
फंस
गया
पति,
बोली- जिससे
तुम
मिलने
आए
हो
वो
तो
मैं
ही
हूं; उड़
गए
होश
पूरे
मामले
को
लेकर
झाबुआ
पुलिस
अधीक्षक
पदम
विलोचन
शुक्ला
ने
बताया
कि
मामला
दर्ज
कर
लिया
गया
है
और
पूरी
जांच
की
जा
रही
है।
घटना
में
किसी
को
बख्शा
नहीं
जाएगा।
यह
घटना
सिर्फ
एक
महिला
की
मौत
नहीं,
बल्कि
मेडिकल
सिस्टम
की
एक
बड़ी
विफलता
है।
प्रशासन
को
इस
मामले
में
पारदर्शी
और
कठोर
कार्रवाई
करनी
चाहिए,
ताकि
भविष्य
में
ऐसी
लापरवाहियां
दोहराई
न
जा
सकें।
गौरतलब
है
कि
आदिवासी
बहुल
क्षेत्र
जिला
झाबुआ,
अलीराजपुर,
बड़वानी
ओर
धार
के
शहरी
क्षेत्रों
में
आए
दिन
झोलाछाप
डॉक्टरों
की
गलती
से
मरीजों
की
मौत
सहित
तमाम
शिकायतें
सामने
आती
है
बावजूद
इसके
बड़ी
संख्या
में
अवैध
रूप
से
क्लिनिक
ओर
मेडिकल
स्टोर
संचालित
किए
जा
रहे
है,
इतना
ही
नहीं
दवाइयों
के
मामले
में
जानकारी
नहीं
होने
के
बावजूद
भी
किराए
का
लायसेंस
लेकर
दवाई
की
दुकानों
का
संचालन
हो
रहा
है
लेकिन
जानकारी
होने
के
बाद
भी
प्रशासनिक
ओर
स्वास्थ्य
चिकित्सा
विभाग
के
अधिकारी
क्यों
चुप्पी
साधे
रहते
है
यह
विचार
करने
वाली
बात
है।