
नगर
निगम
ने
टैंकर
किराए
पर
लिए।
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
इंदौर
मेें
गर्मी
शुरू
होते
ही
जलसंकट
गहराने
लगा
है।
नगर
निगम
को
किराए
पर
टैंकर
लेने
की
नौबत
आ गई।
180
पानी
के
टैंकरों
पर
अब
तीन
माह
में
करोड़ों
रुपये
खर्च
होंगे,
जबकि
इंदौर
में
पानी
भरपूर
रहे,
इसके
लिए
800
करोड़
रुपये
नर्मदा
के
तीसरे
चरण
पर
खर्च
किए
जा
चुके
है,
लेकिन
शहर
में
तेजी
से
हो
रही
बसाहट
के
कारण
पेयजल
की
समस्या
कम
नहीं
हो
रही
है।
अभी
भी
शहर
के
कई
इलाकों
में
नर्मदा
लाइन
नहीं
है
और
वे
काॅलोनियों
बोरिंगों
पर
निर्भर
है।
इस
माह
जलूद
में
भी
पानी
लिफ्ट
करने
वाले
पंप
बार-बार
बंद
होने
के
कारण
लोगों
को
पानी
की
परेशानी
हो
रही
है।
शनिवार
को
भी
नर्मदा
नदी
के
पास
1400
एमएम
की
लाइन
फूटने
के
कारण
पहले
व
दूसरे
चरण
के
पंप
बंद
रहे
और शहर
के
बड़े
हिस्से
में
जलसंकट
रहा।
वार्डों
में
बढ़ी
पानी
के
टैंकरों
की
डिमांड
नर्मदा
के
तीनों
चरणों
से
500
एमएलडी
पानी
इंदौर
आता
है।
इसके
अलावा
30
एमएलडी
पानी
स्थानीय
तालाबों
से
शहर
को
मिलता
है।
शहर
में
दस
हजार
से
ज्यादा
सार्वजनिक
बोरिंग
है।
अफसरों
का
कहना
है
कि
गर्मी
में
पानी
की
डिमांड
बढ़
जाती
है
और
बोरिंगों
में
पानी
का
दबाव
कम
हो
जाता
है,
इसलिए
टैंकरों
से
जल
वितरण
की
मांग
बढ़
जाती
हैै।
अभी
नगर
निगम
के
100
टैंकर
चल
रहे
है
और 180
टैंकर
किराए
पर
अप्रैल
माह
से
लिए
गए
है।
यह
टैंकर
जून
माह
तक
इंदौर
में
चलेंगे।
हर
वार्ड
में
दो
से
तीन
टैंकर
दिए
गए
है।
25
प्रतिशत
क्षेत्रों
में
नर्मदा
लाइन
नहीं
नर्मदा
का
तीसरा
चरण
आने
के
बाद
शहर
में
30
से
ज्यादा
नई
टंकियां
बनाई
गई,
लेकिन
नगर
निगम
सीमा
बढ़ने
के
बाद
29
नए
गांव
शहर
मेें
जुड़
गए।
अभी
नगर
निगम
सीमा
के
25
प्रतिशत
हिस्से
में
नर्मदा
लाइन
नहीं
है।
इनमें
बायपास,
राऊ,
गांधी
नगर,
एरोड्रम
क्षेत्र
की
काॅलोनियां
है।अब
नगर
निगम
नर्मदा
के
चौथे
चरण
की
तैयारी
कर
रहा
है।
इस
प्रोजेक्ट
पर
ही
डेढ़
हजार
करोड़
रुपये
खर्च
होंगे।