
खरगोन
लोकसभा
उम्मीदवार
गजेंद्र
पटेल
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
खरगोन
लोकसभा
सीट
पर
भाजपा
ने
दोबारा
गजेंद्र
पटेल
को
टिकट
दिया
है।
उनके
सामने
कांग्रेस
ने
नए
चेहरे
के
रुप
में
पोरलाल
खरते
को
मैदान
में
उतारा
है।
गजेंद्र
का
कहना
है
कि
भले
ही
उन्हें
दूसरी
बार
टिकट
दिया
है,लेकिन
उनके
खिलाफ
एंटी
इकमबैंसी
फैक्टर
काम
नहीं
करेगा,
क्योकि
आदिवासी
समाज
उनके
साथ
है।
पटेल
ने
अमर
उजाला
से
चर्चा
के
दौरान
कई
अन्य
सवालों
के
जवाब
भी
दिए।
-आप
किन
मुद्दों
के
साथ
जनता
के
बीच
जा
रहे
है?
खरगोन
बड़वानी
सीट
से
मुझे
दोबारा
पार्टी
ने
उम्मीदवार
बनाया
है।
मेरी
लोकसभा
का
60
प्रतिशत
हिस्सा
आदिवासी
क्षेत्र
है।
बड़वानी
की
गिनती
भी
पिछड़े
जिलों
में
होती
है।
इस
क्षेत्र
का
विकास
हमारे
लिए
चुनौती
था,
लेकिन
दस
सालों
में
लोकसभा
क्षेत्र
में
काफी
विकास
हुआ है।
चाहे
प्रधानमंत्री
सड़क
योजना
हो
या
उज्जवला
योजना।
इसका
लाभ
लोगों
को
मिला
और विकास
के
कारण
सरकार
के
प्रति
लोगों
में
विश्वास
बढ़ा
है।
-आपको
पार्टी
ने
दोबारा
टिकट
दिया
है,
क्या
एंटी
एकम्बैंसी
फैक्टर
भी
चुनाव
में
रहेगा
?
–
भाजपा
की
केंद्र
और
राज्य
की
सरकार
के
कारण
क्षेत्र
में
दस
सालों
में
काफी
विकास
हुआ
है।
लाड़ली
बहनें
योजना
से
क्षेत्र
की
हजारों
महिलाएं
जुटी
है।
मुझे
नहीं
लगता
कि
मेरे
खिलाफ
एंटी
इकम्बैंसी
फैक्टर
होगा।
नर्मदा
जल
सिंचाई
योजना
के
कारण
खरगोन
जिले
के
किसान
ज्यादा
फसलें
लेने
लगे
है।
इससे
उनकी आर्थिक
स्थिति
सुधरी
है।
गांवों
का
अधोसरंचना
विकास
भी
तेजी
से
हो
रहा
है।
-विधानसभा
चुनाव
में
मालवा
निमाड़
में
भाजपा
को
आदिवासी
सीटें
कम
मिली,
क्या
आदिवासी
वोटर भाजपा
का
साथ
नहीं
देता
है?
-आदिवासी
समाज
भाजपा
के
साथ
खड़ा
रहता
है।
विधानसभा
चुनाव
में
जो
सीटें
हम
हारे
है,
वे
भी
अल्प
मतों
से
हारे
है।
भीकनगांव
की
सीट
में
भाजपा
की
हार
का
अंतर
400
था,
तो
राजपुर
सीट
हम
900
वोटों
से
हारे
है।
पंचायत,
जिला
पंचायत
स्तर
पर
भाजपा
का
वोटबैंक
तगड़ा
है।
कुछ
सीटों
पर
जरुर
कांग्रेस
ने
भ्रम
फैलाया,
लेकिन
देशभर
में
आदिवासी
समाज
भाजपा
के
साथ
है
और
इसका
सकारात्मक
प्रभाव
लोकसभा
चुनाव
में
देखने
को
मिलेगा।