
NEET
UG
रिजल्ट
विवाद
में
हाईकोर्ट
में
सुनवाई
के
दौरान
NTA
की
ओर
से
सॉलिसिटर
जनरल
तुषार
मेहता
वर्चुअली
उपस्थित
हुए।
उन्होंने
सुझाव
दिया
कि
इंदौर
से
जुड़े
24
परीक्षा
केंद्रों
के
प्रभावित
छात्रों
के
लिए
एक
कमेटी
बनाई
जाए
जो
उनकी
समस्याएं
सुने
और
परीक्षा
दोबारा
कराने
या
अन्य
समाधान
पर
निर्णय
ले।
हाईकोर्ट
ने
इस
मामले
में
अगली
सुनवाई
की
तारीख
26
मई
तय
की
है।
गौरतलब
है
कि
इंदौर
के
25
परीक्षा
केंद्रों
पर
बिजली
गुल
होने
के
कारण
छात्र
ठीक
से
परीक्षा
नहीं
दे
सके
थे,
जिससे
परीक्षा
प्रक्रिया
पर
सवाल
उठे
हैं।
विज्ञापन
Trending
Videos
पिछली
सुनवाई
में
NTA
ने
दी
थी
सफाई,
कोर्ट
ने
रोका
रिजल्ट
इससे
पहले
की
सुनवाई
में
NTA
ने
कोर्ट
में
जवाब
प्रस्तुत
करते
हुए
कहा
था
कि
परीक्षा
शांतिपूर्ण
माहौल
में
कराई
गई
थी,
हालांकि
उन्होंने
यह
स्वीकारा
कि
कई
केंद्रों
पर
10
मिनट
से
लेकर
एक
घंटे
तक
बिजली
नहीं
थी।
NTA
ने
दावा
किया
कि
वहां
कैंडल
और
जनरेटर
से
रोशनी
की
व्यवस्था
की
गई
थी।
वहीं
याचिकाकर्ता
के
वकील
मृदुल
भटनागर
ने
कहा
कि
लगभग
25
से
अधिक
परीक्षा
केंद्रों
पर
छात्रों
की
परीक्षा
गंभीर
रूप
से
प्रभावित
हुई
है
और
छात्रों
ने
अपनी
परेशानियों
को
खुलकर
बताया।
भटनागर
ने
यह
भी
कहा
कि
उज्जैन
के
छात्रों
ने
भी
ऐसे
ही
हालात
का
सामना
किया,
जिनकी
संख्या
पांच
से
अधिक
है।
विज्ञापन
16
मई
की
सुनवाई
में
NTA
ने
दी
थी
रिजल्ट
रोकने
पर
आपत्ति
16
मई
को
हुई
सुनवाई
में
सॉलिसिटर
जनरल
तुषार
मेहता
ने
वीडियो
कॉन्फ्रेंसिंग
के
जरिए
कोर्ट
में
पक्ष
रखा
था।
उन्होंने
कहा
था
कि
यदि
पूरा
रिजल्ट
रोका
गया
तो
सैकड़ों
छात्रों
का
भविष्य
खतरे
में
पड़
जाएगा।
उन्होंने
बताया
कि
बिजली
संकट
से
प्रभावित
11
परीक्षा
केंद्रों
की
रिपोर्ट
पर
दो
दिन
में
जवाब
प्रस्तुत
किया
जाएगा।
तब
कोर्ट
ने
NTA,
बिजली
कंपनी
और
परीक्षा
केंद्रों
को
नोटिस
जारी
करते
हुए
30
जून
तक
जवाब
मांगा
था।
यह
परीक्षा
4
मई
को
मध्यप्रदेश
के
30
शहरों
में
आयोजित
हुई
थी,
जिसमें
करीब
ढाई
लाख
छात्रों
ने
हिस्सा
लिया
था।
बिजली
गुल,
अंधेरा
और
मोमबत्ती
की
रोशनी
में
परीक्षा
इंदौर
के
49
परीक्षा
केंद्रों
में
करीब
27
हजार
छात्रों
ने
परीक्षा
दी
थी।
लेकिन
अचानक
मौसम
खराब
हो
गया,
तेज
आंधी
और
बारिश
के
चलते
करीब
120
किमी/घंटा
की
रफ्तार
से
चली
हवाओं
ने
बिजली
व्यवस्था
ठप
कर
दी।
इससे
इंदौर
और
उज्जैन
के
लगभग
25
केंद्र
अंधेरे
में
डूब
गए।
कई
छात्रों
को
मोमबत्ती
और
मोबाइल
टॉर्च
की
रोशनी
में
परीक्षा
देनी
पड़ी।
कई
छात्र
तो
प्रश्नपत्र
ठीक
से
पढ़
भी
नहीं
पाए।
परीक्षा
के
बाद
कई
छात्र
रोते
हुए
केंद्र
से
बाहर
निकले।
छात्रों
ने
कहा
कि
उन्होंने
सालभर
मेहनत
की
थी,
लेकिन
अव्यवस्था
ने
उनका
भविष्य
संकट
में
डाल
दिया।
NTA
द्वारा
पहली
बार
शहर
के
सरकारी
स्कूलों
को
केंद्र
बनाया
गया
था,
जहां
पावर
बैकअप
की
कोई
व्यवस्था
नहीं
थी।
इसके
अलावा
मेडिकल,
नर्सिंग,
आयुर्वेदिक,
होम्योपैथिक
कॉलेजों
में
एडमिशन
के
लिए
NEET
ही
एकमात्र
जरिया
है,
ऐसे
में
छात्रों
का
पूरा
साल
दांव
पर
लग
गया
है।