
स्मार्ट
सिटी
योजना
के
तहत
इंदौर
के
नेहरू
पार्क
में
कराए
गए
कार्यों
पर
गंभीर
आरोप
लगे
हैं।
नगर
निगम
के
उद्यान
विभाग
प्रभारी
राजेंद्र
राठौर
ने
खुलासा
किया
है
कि
पार्क
की
हरियाली
को
उजाड़कर
घटिया
निर्माण
किया
गया
है,
जिससे
करोड़ों
रुपये
का
नुकसान
हुआ
है।
राठौर
ने
बताया
कि
इस
मामले
की
शिकायत
प्रधानमंत्री
कार्यालय
(PMO),
लोकायुक्त
और
आर्थिक
अपराध
अन्वेषण
शाखा
(EOW)
में
की
जा
चुकी
है।
पार्क
में
आठ
करोड़
रुपये
से
अधिक
की
लागत
से
कार्य
किया
गया,
लेकिन
फव्वारे
चालू
होने
से
पहले
ही
खराब
हो
गए,
पाइपलाइन
जंग
खा
चुकी
है
और
मूर्तियां
टूट
गई
हैं।
विज्ञापन
Trending
Videos
यह
भी
पढ़ें…
Indore
News:
एक
ही
रात
में
दो
मौतें,
टेक्नीशियन
ट्रेन
से
कटा,
छात्रा
ने
लगाई
फांसी
विज्ञापन
फव्वारे,
टाइल्स
और
दुकानों
की
बदहाली
राठौर
का
आरोप
है
कि
ठेकेदार
की
गारंटी
अवधि
डेढ़
साल
अभी
शेष
है,
इसके
बावजूद
वह
मरम्मत
करने
के
बजाय
और
पैसा
मांग
रहा
है।
पार्क
में
बनी
दस
दुकानों
को
आज
तक
शुरू
नहीं
किया
गया
और
वे
जर्जर
हो
चुकी
हैं।
ओपन
थियेटर
की
टाइल्स
भी
गिरने
लगी
हैं
और
बच्चों
की
ट्रेन
के
रास्ते
में
लगे
बैरिकेट्स
टूट
चुके
हैं,
जिससे
कभी
भी
हादसा
हो
सकता
है।
पार्क
में
एक
करोड़
रुपये
खर्च
कर
बिजली
व्यवस्था
करवाई
गई
थी,
लेकिन
वह
भी
पूरी
तरह
ध्वस्त
हो
चुकी
है।
जगह-जगह
मलबा
फैला
हुआ
है
और
अफसर
कामों
की
जानकारी
देने
से
बच
रहे
हैं।
सिर्फ
नेहरू
पार्क
ही
नहीं,
शहरभर
में
गड़बड़ियां
राजेंद्र
राठौर
का
कहना
है
कि
सिर्फ
नेहरू
पार्क
ही
नहीं,
बल्कि
शहर
में
स्मार्ट
सिटी
योजना
के
तहत
जहां
भी
काम
हुए
हैं,
वहां
गड़बड़ियां
देखने
को
मिली
हैं।
क्लॉथ
मार्केट
से
लेकर
राजवाड़ा
तक
बनी
सड़कें
भी
टूट
रही
हैं
और
नगर
निगम
को
डामर
चढ़ाना
पड़
रहा
है।
न
तो
रखरखाव
का
ध्यान
रखा
गया,
न
ही
ठेकेदार
या
कंसल्टेंट
पर
कोई
कार्रवाई
हुई।
राठौर
ने
यह
भी
चेतावनी
दी
है
कि
जब
तक
दोषियों
पर
सख्त
कार्रवाई
नहीं
होती,
वे
इस
मुद्दे
को
उठाते
रहेंगे।
सूचना
छुपा
रहे
अधिकारी,
आरटीआई
में
भी
नहीं
दे
रहे
जवाब
राठौर
ने
यह
भी
आरोप
लगाया
कि
नेहरू
पार्क
का
निर्माण
किस
अधिकारी
ने
कराया,
ठेकेदार
और
कंसल्टेंट
कौन
थे—इसकी
जानकारी
तीन
बार
पत्र
लिखकर
मांगी
गई,
लेकिन
अब
तक
कोई
उत्तर
नहीं
मिला।
यहां
तक
कि
सूचना
के
अधिकार
(RTI)
में
भी
जानकारी
देने
से
इनकार
किया
जा
रहा
है।
बगीचे
में
लगाई
गई
लाइटें
बंद
हो
चुकी
हैं,
शिकायत
पर
कुछ
चालू
हुईं,
जो
अगले
ही
दिन
फिर
बंद
हो
गईं।
राठौर
ने
अफसरों
की
कार्यशैली
पर
सवाल
उठाते
हुए
कहा
कि
निगम
कार्यालय
में
अफसर
सामने
ही
बैठते
हैं,
लेकिन
किसी
को
चिंता
नहीं
है
कि
जनता
का
पैसा
बर्बाद
हो
रहा
है।