
पाकिस्तान
का
साथ
देने
के
बाद
भारतीय
तुर्की
का
बहिष्कार
कर
रहे
है।
व्यापारिक
संबंध
व्यापारियों
ने
खत्म
कर
लिए
है,
लेकिन
इंदौर
मेट्रो
के
आटोमेटिक
टिकट
फेयर
कलेक्शन
का
ठेका
तुर्की
की
कंपनी
एसिक्स
इलेक्ट्राॅनिक
के
पास
है।
यह
ठेका
कंपनी
के
186
करोड़
रुपये
में
पाया
है
है।
सालभर
पहले
टेंडर
के
समय
कुछ
स्वदेशी
कंपनियों
ने
भी
टेंडर
भरे
थे,
लेकिन
वे
नामजूर
हो
गए
है।
मेट्रो
कार्पोरेशन
ने
न्यूनतम
दर
230
करोड़
रुपये
तय
की
थी,
लेकिन
तुर्की
की
कंपनी
ने
50
करोड़
रुपये
कम
का
आफर
देकर यह
ठेका
186
करोड़
में
हासिल
किया
है।
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अब
इस
ठेके
पर
सवाल
उठ
रहे
है,
क्योकि
जिस
कंपनी
के
पास
ठेका
है
वह
दुश्मन
देश
का
साथ
देने
वाले
देश
तुर्की
की
है।
पाकिस्तान
की
तरफ
से
जब
हमले
हुए
थे
तो
उसमें
चीन
के
अलावा
तुर्की
के
ड्रोन
भी
इस्तेमाल
हुए
है।
जिस
कंपनी
के
पास
इंदौर
के
मेट्रो
टिकट
फेयर
कलेक्शन
का
ठेका
है।
वह
किराया
लेने
की
पूरी
प्रणाली
तय
कर
रही
है
और
उसे
मेट्रो
कार्पोरेशन
अमल
में
ला
रहा
है।
मेट्रो
जैसे
महत्वपूर्ण
प्रोजेक्ट
के
टिकट
सिस्टम
का
ठेका
तुर्की
की
कंपनी
के
पास
होना
मेट्रो
की
सुरक्षा
पर
भी
सवाल
खड़े
कर
रहा
है,क्योकि
टिकट
कलेक्शन
की
तैयारियों
को
लेकर
तुर्की
की
कंपनी
के
अफसर
इंदौर
भी
आ चुके
है।
इंदौर
के
चार
स्टेशनों
पर
कंपनी
सिस्टम
भी
लगा
चुकी
है।
विज्ञापन
इसकी
शिकायत
नगरीय
प्रशासन
मंत्री
कैलाश
विजयवर्गीय
के
पास
भी
पहुंच
चुकी
है।
वे
इस
मामले
पर
नजर
रखे
हुए
है।
मेट्रो
कंपनी
के
अफसरों
को
भी
मामला
संज्ञान
में
है
और
उन्होंने
उच्च
अधिकारियों
तक
बात
पहुंचा
दी
है। आपको
बता
दे
कि
इंदौर
में
इस
माह
मेट्रो
ट्रेन
का
संचालन
सात
किलोमीटर
हिस्से
में
होगा।
उसका
किराया
भी
तय
हो
चुका
है।
तुर्की
की
कंपनी
ने
ही
टिकट
फेयर
सिस्टम
तय
किया
है।
विमानतल
का
ठेका
हो
चुका
है
निरस्त
तुर्की
की
कंपनी
सेलबी
एयरपोर्ट
सर्विससे
इंडिया
प्रालि
की
मंजूरी
भी
हाल
ही
मेें
सरकार
ने
निलंबित
कर
दी
है।
तुर्की
देश
से
जुड़ी
कंपनी
दिल्ली,
बेंगलुरु
सहित
पांच
स्टेशनों
पर
यात्री
और
कार्गो
टर्मिनल
सर्विसेस
व
टर्न
अराउंड
का
काम
देखती
है।
इंदौर
के
ठेके
पर
भी
फैसला
लिया
जा
सकता
है।