
स्वच्छता
और
स्वाद
के
लिए
देशभर
में
इंदौर
ने
नाम
कमाया,
लेकिन
एक
के
बाद
एक
हो
रही
घटनाएं
अलग
अर्थों
में
अब
इंदौर
की
छवि
बना
रही
है।
कुछ
लोगों
ने
इंदौर
की
बदमानी
के
टेंडर
खोल
दिए।
कौन
कितना
शहर
का
नाम
डूबो
सकता
है।
इसके
लिए
होड़
मची
है।
उनके
कर्मों
पर
शहरवासी
बार-बार
शर्मिंदा
हो
रहे
है।
देश
के
सामने
इंदौर
की
आंखे
नीची
हो
रही
है।
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देशवासियों
की
उगंलिया
आजकल
इंदौर
को
गूगल
पर
‘सराफा-
सफाई’
के
लिए
नहीं
बल्कि
सोनम,
जानलेवा
जाम,
घर
में
सोना
जड़वाने
वाले
निगम
के
ठेेकदार
और गड्ढे
के
कारण
सर्च
कर
रही
है।
बदमानी
का
ठीकरा
पूरे
शहर
पर
फोड़ा
जा
रहा
है। इंदौर
की
चेहरे
पर
बदमानी
की खरोंचे
देने
वालों
का इलाज
अब
जरुरी
है।
हाल
के
दिनों
में
हुई
घटनाएं
सिर्फ
अपवाद
बन
कर
रहे।
यही
शहर
के
लिए
बेहतर
है।
यह
इंदौर
की
पहचान
न
बन
पाए,
इसका
ध्यान
इंदौर
से
प्यार
करने
वालों
को
रखना
होगा।
इंदौर
उत्सवधर्मिता,
अपनेपन,
जनभागीदारी
के
रंग
में
ढला
है।
शहर
को
बदनाम
करने
वाली
मानसिकता
शहर
की
पहचान
कभी
नहीं
बन
पाएगी।
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शिलांग
में
पति
की
हत्या
के
बाद
सोनम
रघुवंशी
जब
लापता
थी
तो
प्रदेश
के
मुखिया
से
लेकर
मंत्री
तक
‘प्रदेश
की
बेटी’
की
चिंता
कर
देश
के
गृहमंत्री
से
सीबीआई
की
जांच
की
मांग
करते
थक
नही
रखे
थे,
तब
मध्य
प्रदेश
पुलिस
की
आंख
में
धूल
झोंककर
सोनम
बड़े
आराम
से
इंदौर
में
फरारी
काट
रही
थी।
जब
हत्याकांड
का
शिलांग
पुलिस
ने
खुलासा
किया
तो
सोनम
के
कारण देशभर
में
इंदौर
की
बदमानी
हुई।
बदनामी
की
दौड़
में
इंदौर-देवास
के
जामलेवा
जाम
ने
भी
कोई
कसर
बाकी
नहीं
रखी।
जाम
में
हुई
मौतों
के
बावजूद
कोर्ट
रुम
में
एनएचएआई
की
वकील
दांत
निपोरते
हुए
यह
कहती
नजर
आई
कि
इतनी
सुबह
लोग
हाईवे
पर
निकलते
क्यों
है
बिना
काम
से…।
इस
मामले
में
जब
देशभर
में
एनएचएआई
की
बदनामी
हुई
तो
एनएचएआई
ने
वकील
के
जवाब
से
पल्ला
झाड़
लिया।
जब
लोग
जाम
में
जानें
गंवा
रहे
थे,
तब
इंदौर
में
सड़कों
को
बनाने
वाले
काॅलोनियां
काटने
वाले
नगर
निगम
के
एक
ठेकेदार
को
अपने
घर
के
दिखावे
की
सवारी
आई।
खुद
रील
में
बड़े
चाव
से
बोलते
नजर
आए
कि
बिजली
के
बटन,
शो
पीस
24
कैरेट
गोल्ड
के
है,
लेकिन
जब
इनकम
टैक्स
विभाग
का
डर
सताया
तो
रील
बनाने
वाले
को
कानूनी
नोटिस
थमा
दिया।
अब
सोशल
मीडिया
पर
गोल्डन
होम
का
मजाक
बन
रहा
है।
देश
में
हुए
मेडिकल
काॅलेज
की
फर्जी
मान्यता
घोटाले
के
तार
इंदौर
से
जुड़े
है।
यहां
के
बड़े
मेडिकल
काॅलेज
के
संचालक
सीबीआई
छापे
के
बाद
फरार
है।
यह
खबरें
शहर
को
बदनाम
करने
के
लिए
काफी
थी,
लेकिन
उसके
बाद
इंदौर
के
पाॅश
इलाके
विजय
नगर
में
सड़क
पर
अचानक
हुए
गहरे
गड्ढे
ने
भी
साबित
कर
दिया
कि
इंदौर
नगर
निगम
में
100
करोड़
के
घोटाले
क्यों
हो
रहे
है।
ये
घटनाएं
इस
शहर
की
पहचान
हो
भी
नहीं
सकती
है। साफ
छवि
के
बलबूते
पर
इंदौर
को
बीते
वर्षों
में
प्रवासी
सम्मेलन,
जी-20
समिट,
खेलो
इंडिया
खेलो
जैसे
बड़े
आयोजन
मिले।
इंदौर
परायों
को
अपना
बना
लेता
है।
यह
इस
शहर
की
खासियत
है,
लेकिन
बदनाम
करने
वाली
घटनाएं
इंदौर
से
जल्दी
विदा
ले
और
फिर
लौटकर
न
आए।
यही
इस
शहर
की
सेहत
के
लिए
बेहतर
है।