
इंदौर
नगर
का
नाम
किस
स्थान
पर
हुआ
यह
चर्चा
का
केंद्र
बना
रहता
है।
नगर
की
प्राचीन
बस्ती
खान
(कान्ह)
और
सरस्वती
के
किनारे
पर
बसी
जूनी
से
इंदौर
की
कहानी
आरंभ
होती
है।
1972
में
मध्यप्रदेश
पुरातत्व
विभाग
और
विक्रम
विश्वविद्यालय
उज्जैन
के
प्राचीन
भारतीय
इतिहास
एवं
पुरातत्व
विभाग
द्वारा
प्रसिद्ध
पुरात्तत्व
वेत्ता
डॉक्टर
विष्णु
श्रीधर
वाकणकर
के
नेतृत्व
में
आजाद
नगर
उत्खनन
में
प्राप्त
अवशेषों
से
यह
सिद्ध
होता
है
कि
इंदौर
में
हड़प्पा
के
समकालीन
सभ्यता
कायम
रही
है।
नगर
का
नाम
किस
स्थान
पर
हुआ
यह
चर्चा
का
केंद्र
बना
रहता
है।
नगर
की
प्राचीन
बस्ती
खान
(कान्ह)
और
सरस्वती
के
किनारे
पर
बसी
जूनी
से
इंदौर
की
कहानी
आरंभ
होती
है।
1972
में
मध्यप्रदेश
पुरातत्व
विभाग
और
विक्रम
विश्वविद्यालय
उज्जैन
के
प्राचीन
भारतीय
इतिहास
एवं
पुरातत्व
विभाग
द्वारा
प्रसिद्ध
पुरात्तत्व
वेत्ता
डॉक्टर
विष्णु
श्रीधर
वाकणकर
के
नेतृत्व
में
आजाद
नगर
उत्खनन
में
प्राप्त
अवशेषों
से
यह
सिद्ध
होता
है
कि
इंदौर
में
हड़प्पा
के
समकालीन
सभ्यता
कायम
रही
है।
इंदौर
के
इतिहास
के
कुछ
ग्रंथों
में
इस
नगर
को
1715
में
कुछ
जमींदारों
ने
बसाया,
जो
मराठों
से
व्यापार
करने
में
रुचि
रखते
थे।
मान्यता
है
कि
इन्हीं
जमींदारों
ने
जूनी
में
खान
(कान्ह)
सरस्वती
नदी
के
किनारे
एक
ऊंचे
टीले
पर
1741
में
इन्द्रेश्वर
मंदिर
की
स्थापना
की
होगी।
क्या
है
मंदिर
की
प्राचीन
इतिहास?
प्रसिद्ध
इतिहासकार
स्व.
वाकणकर
के
अनुसार
राष्ट्रकूट
राजा
इंद्र
का
मालवा
पर
अधिपत्य
रहा।
राष्ट्रकूट
नरेश
इंद्र
उज्जैन
विजय
के
लिए
आए
थे।
इन्हीं
राष्ट्रकूट
नरेश
इंद्र
(कार्यकाल-
916
-922
ई.
सन)
ने
इंदौर
में
महादेव
की
मंदिर
की
स्थापना
की,
जिसे
इन्द्रेश्वर
महादेव
का
मंदिर
कहा
जाता
है।
राष्ट्रकूट
राजाओं
का
साम्राज्य
छठी
से
तेरहवीं
शताब्दी
के
मध्य
रहा
है।
इस
बारे
में
कोई
अभिलिखित
दस्तावेज
उपलब्ध
नहीं
है।
मंदिर
निर्माण
की
संरचना
जिसमें
शिवलिंग
गर्भगृह
में
है
उस
स्थान
की
निर्मित
शैली
राष्ट्रकूट
प्रतीत
होती
है।
इन्द्रेश्वर
महादेव
मंदिर
का
सन
1741
में
मल्हारराव
होल्कर
ने
जीर्णोद्धार
करवाया
था।
मंदिर
के
कुछ
अभिलेखों
में
सन
1854
और
1912
में
मंदिर
के
शिखर
के
जीर्णोद्धार
का
उल्लेख
है।
इन्द्रेश्वर
महादेव
मंदिर
के
बारे
में
प्रसिद्ध
इतिहासकार
डॉक्टर
शिवनारायण
यादव
के
अनुसार
इंदौर
में
अल्प
या
वर्षा
अभाव
के
वक्त
भक्तगण
इन्द्रेश्वर
महादेव
का
जलाभिषेक
किया
करते
थे।
किस
शैली
में
हुआ
है मंदिर
निर्माण
?
मंदिर
के
निर्माण
की
भूमिगत
गर्भगृह
शैली
राष्ट्रकूट
शैली
का
लगता
है।
मंदिर
का
शिखर
भाग
नागर
शैली
का
है।
मंदिर
में
शिवलिंग
तक
पहुंचने
के
लिए
सीढ़ियां
निर्मित
हैं।
मंदिर
का
गर्भगृह
चौकोर
भूतलीय
है।
मंदिर
में
गौरी
और
गणेश
की
प्रतिमा
है।
वर्तमान
में
मंदिर
में
नियमित
पूजन
होता
है
और
भक्तगण
का
आगमन
लगा
रहता
है।
कहां
है
यह
मंदिर?
इन्द्रेश्वर
महादेव
का
मंदिर
जूनी
इंदौर
पंढरीनाथ
पुलिस
थाने
के
समीप
गली
में
थोड़ी
ऊंचाई
पर
है।
संभवतः
यह
इंदौर
का
सबसे
प्राचीन
शिव
मंदिर
है,
जिसका
उल्लेख
इंदौर
स्टेट
का
प्रथम
जिला
गजेटियर,
जिसे
कैप्टेन
सी
इ
लुआर्ड
ने
1908
में
तैयार
किया
और
कलकत्ता
से
प्रकशित
हुआ
था.
में
उल्लेख
है।
अब
होगा
जीर्णोद्धार
नगर
के
प्रसिद्ध
मंदिरों
के
जीर्णोद्धार
के
बाद
इन्द्रेश्वर
महादेव
मंदिर
का
भी
कार्य
आरंभ
होगा।
शीघ्र
ही
डीपीआर
तैयार
कर
प्रोजेक्ट
का
कार्य
आरंभ
होगा।
करीब
तीन
करोड़
रुपए
की
लागत
से
एक
वर्ष
की
तय
समय
सीमा
में
मंदिर
का
भव्य
और
ऐतिहासिक
स्वरूप
प्रदान
किया
जाएगा।
मंदिर
कडप्पा
स्टोन
और
मार्बल
और
ग्रेनाइट
का
प्रयोग
होगा
और
मंदिर
का
द्वार
होल्कर
(मराठा)
शैली
में
निर्मित
किया
जाएगा।