
मध्य
प्रदेश
की
जननी
एक्सप्रेस
योजना
गर्भवती
महिलाओं
को
अस्पताल
तक
पहुंचाने
में
मददगार
मानी
जाती
है।
लेकिन,
कई
बार
जमीनी
हकीकत
इस
योजना
की
खामियों
को
उजागर
कर
देती
है।
सोमवार
को
छिंदवाड़ा
जिले
के
परासिया
ब्लॉक
की
लोनापठार
पंचायत
के
ग्राम
पाठाखुरी
में
एक
गर्भवती
महिला
को
बैलगाड़ी
से
3.5
किमी
का
सफर
तय
कर
मुख्य
सड़क
तक
पहुंचाया
गया,
क्योंकि
खराब
सड़क
की
वजह
से
एंबुलेंस
गांव
तक
नहीं
आ
सकी।
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हालत
गंभीर
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दरअसल,
पाठाखुरी
गांव
में
छिंदा
देवरी
की
निवासी
फूलकुमारी
अपने
मायके
आई
थीं।
सोमवार
दोपहर
एक
बजे
उन्हें
प्रसव
पीड़ा
शुरू
हुई।
परिजनों
ने
गांव
की
आशा
कार्यकर्ता
अनिल
कुमारी
विश्वकर्मा
को
सूचित
किया
गया।
उन्होंने
108
एंबुलेंस
को
कॉल
किया,
लेकिन
खराब
रास्ते
के
कारण
एंबुलेंस
गांव
में
नहीं
पहुंच
सकी।
ऐसे
में
महिला
को
बैलगाड़ी
में
बैठाकर
करीब
3.5
किमी
लंबे
कीचड़
और
ऊबड़-खाबड़
रास्ते
से
होते
हुए
मुख्य
सड़क
तक
लाया
गया,
जहां
से
उसे
एंबुलेंस
अस्पताल
लेकर
गई।
लेकिन,
रास्ते
में
ही
महिला
ने
बच्चे
को
जन्म
दिया।
बता
दें
कि
पर्वतीय
सौंदर्य
से
घिरे
इस
गांव
में
बारिश
के
मौसम
में
हालात
बदतर
हो
जाते
हैं।
आशा
कार्यकर्ता
के
अनुसार,
बरसात
में
बीमार
लोगों
या
गर्भवती
महिलाओं
को
अस्पताल
पहुंचाना
चुनौतीपूर्ण
कार्य
बन
जाता
है।
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अभी
कम
वर्षा
प्रयास
के
बाद
भी
नहीं
बन
सही
सड़क
जनपद
सदस्य
एवं
पूर्व
जनपद
अध्यक्ष
राजकुमारी
इवनाती
ने
बताया
कि
गांव
को
प्रधानमंत्री
सड़क
योजना
से
जोड़ने
के
लिए
कई
बार
प्रस्ताव
पारित
किए
जा
चुके
हैं।
उन्होंने
स्वयं
छिंदवाड़ा
में
संबंधित
कार्यालय
में
आवेदन
भी
दिया
है।
विधायक
सोहन
बाल्मिक
भी
क्षेत्र
में
सड़क
सर्वे
करवा
चुके
हैं।
लेकिन,
अब
तक
गांव
को
मुख्य
सड़क
से
जोड़ने
का
काम
पूरा
नहीं
हो
पाया।