
छिंदवाड़ा
जिले
के
चौरई
के
ग्राम
थांवरीटेका
निवासी
जितेंद्र
ढाकरिया
ने
पुलिस
पर
गंभीर
आरोप
लगाते
हुए
न्यायालय
की
शरण
ली
है।
उनका
कहना
है
कि
उनकी
पत्नी
और
पत्नी
की
बड़ी
बहन
द्वारा
वर्ष
2023
में
दर्ज
कराई
गई
प्रताड़ना
और
छेड़छाड़
की
एफआईआर
बिना
किसी
जांच
और
सत्यापन
के
दर्ज
की
गई
थी।
इस
संबंध
में
न्यायालय
ने
मानव
अधिकार
संरक्षण
अधिनियम
1993
की
धारा
30
के
तहत
दाखिल
याचिका
पर
सुनवाई
करते
हुए
10
पुलिस
अधिकारियों
को
नोटिस
जारी
कर
18
जून
को
व्यक्तिगत
रूप
से
उपस्थित
होकर
पक्ष
रखने
के
निर्देश
दिए
हैं।
पत्नी
और
साली
ने
दर्ज
कराई
थीं
FIR
जितेंद्र
ने
बताया
कि
2
जनवरी
2023
को
उनकी
पत्नी
की
बड़ी
बहन
ने
थाना
डूंडासिवनी,
सिवनी
में
छेड़छाड़
का
मामला
दर्ज
कराया
था।
इसके
बाद
14
मई
2023
को
उनकी
पत्नी
ने
चौरई
थाने
में
प्रताड़ना
की
शिकायत
दर्ज
कराई।
जितेंद्र
का
आरोप
है
कि
पुलिस
ने
दोनों
ही
मामलों
में
बिना
किसी
प्राथमिक
जांच
और
साक्ष्य
के
सीधे
एफआईआर
दर्ज
कर
ली,
जिससे
उनके
मौलिक
अधिकारों
का
हनन
हुआ। आवेदक
ने
सिवनी
एसपी,
महिला
परामर्श
केंद्र,
छिंदवाड़ा
एसपी,
डीआईजी
और
पुलिस
महानिदेशक
भोपाल
को
भी
पत्र
लिखकर
न्याय
की
गुहार
लगाई,
लेकिन
कहीं
से
कोई
सहायता
नहीं
मिली।
जिससे
परेशान
होकर
उन्होंने
कोर्ट
का
दरवाजा
खटखटाया।
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कोर्ट
की
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तक;
क्या-क्या
हुआ
10
अफसरों
को
भेजा
नोटिस
जितेंद्र
की
याचिका
पर
सुनवाई
करते
हुए
कोर्ट
ने
6
मई
2025
को
मामला
पंजीबद्ध
किया
और
सभी
अनावेदकों
को
नोटिस
जारी
किए।
इन्हें
18
जून
2025
को
अदालत
में
पेश
होकर
अपना
पक्ष
रखने
के
निर्देश
दिए
गए
हैं।
इन्हें
दिया
गया
नोटिस
देवकरण
डेहरिया
–
तत्कालीन
थाना
प्रभारी,
डूंडासिवनी,
सिवनी
अर्पित
भैरव
–
सब-इंस्पेक्टर,
लखनवाड़ा,
सिवनी
दामिनी
हेडाऊ
–
उपनिरीक्षक,
कुरई,
सिवनी
आशीष
भराड़े
–
एसडीओपी,
केवलारी,
सिवनी
शशि
विश्वकर्मा
–
थाना
प्रभारी,
चौरई
सुभाष
तिवारी
–
चौकी
प्रभारी,
हिवरखेड़ी,
चौरई
गोपाल
साहू
–
विवेचना
अधिकारी,
थाना
चौरई
अमन
मिश्रा
–
सीएसपी
प्रीतम
सिंह
बालरे
–
एसडीओपी,
चौरई
नारायण
सिंह
बघेल
–
थाना
प्रभारी,
कुंडीपुरा
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मानव
अधिकार
उल्लंघन
का
मामला
जितेंद्र
ने
अपनी
याचिका
में
कहा
है
कि
बिना
जांच
एफआईआर
दर्ज
कर
पुलिस
ने
उनके
मौलिक
अधिकारों
का
उल्लंघन
किया
है।
इसी
आधार
पर
उन्होंने
मानव
अधिकार
संरक्षण
अधिनियम
की
धारा
30
के
तहत
कोर्ट
में
याचिका
दाखिल
की
थी,
जिसे
न्यायालय
ने
संज्ञान
में
लिया
है।