MP Lok Sabha Chunav: शहडोल सीट का सयासी गणित? भाजपा ने MP हिमाद्री तो कांग्रेस ने MLA मार्को पर लगाया दांव

MP Lok Sabha Chunav: शहडोल सीट का सयासी गणित? भाजपा ने MP हिमाद्री तो कांग्रेस ने MLA मार्को पर लगाया दांव
Lok Sabha Chunav 2024 Political Equation in Shahdol Constituency Himadri Vs MLA Marko Bjp Congress Candidate

शहडोल
लोकसभा
सीट
का
इतिहास।


फोटो
:
अमर
उजाला

विस्तार


Political
Equation
in
Shahdol
Constituency:

मध्य
प्रदेश
में
अनुसूचित
जनजाति
की
सीटें
मालवा
निमाड़
में
अधिक
हैं
तो
शहडोल
में
भी
जनजाति
बहुल
इलाका
है।
विंध्य
की
शहडोल
लोकसभा
सीट
आरंभ
से
ही
आरक्षित
रही
है।
2023
के
विधानसभा
चुनाव
में
शहडोल
लोकसभा
में
आठ
सीटें
थीं।
उसमें
से
सात
पर
भाजपा
और
एक
पर
कांग्रेस
की
जीत
हुई
थी। पुष्पराजगढ़
से
कांग्रेस
के
फुंदेलाल
सिंह
मार्को
को
विजय
मिली
थी।

लोकसभा
चुनाव
2024
में
शहडोल
से
कांग्रेस
ने
विधायक फुंदेलाल
सिंह
मार्को
को उम्मीदवार
बनाया
है,
जबकि
भाजपा
ने
मौजूदा
सांसद
हिमाद्री
सिंह
को
फिर
से
चुनावी
मैदान
में
उतारा
है।
इस
सीट
पर
भाजपा
और
कांग्रेस
में
ही
मुख्य
मुकाबला
है।
  


भाजपा
और
कांग्रेस
के
पास
समान
अवसर
 

शहडोल
लोकसभा
क्षेत्र
से
भाजपा
की
2
लाख
8
हजार
346
मतों
की
बढ़त
है।
इसे
कांग्रेस
को
पहले
पाटना
होगा
और
बाद
में
अपने
उम्मीदवार
की
जीत
के
लिए
विजयी
मत
के
लिए
प्रयास
करना
होगा।
पुष्पराजगढ़
से
फुंदेलाल
4
हजार
486
मतों
से
विजयी
रहे
हैं।
शहडोल
लोकसभा
क्षेत्र
में
विधानसभा
के
आठों
क्षेत्रों
में
यह
सबसे
छोटी
जीत
रही
है।
शहडोल
क्षेत्र
भाजपा
और
कांग्रेस
दोनों
दलों
के
लिए
समान
अवसर
वाला
क्षेत्र
रहा
है।
भाजपा
को
7,
कांग्रेस
को
6
और
निर्दलीय,
जनता
दल
और
सोशलिस्ट
पार्टी
को
एक-एक
बार
सफलता
मिली
है।
भाजपा
के
दलपत
सिंह
शहडोल
से
सबसे
ज्यादा
बार
सांसद
चुने
गए
हैं।
1967
से
1989
तक
क्षेत्र
से
विजयी
उम्मीदवारों
को
क्षेत्र
में
डाले
गए
वैध
मतों
के
50
प्रतिशत
से
अधिक
मत
प्राप्त
हुए
हैं।
 1991
से
यह
प्रतिशत
50
के
अंदर
रहने
लगा
था।
50
प्रतिशत
से
अधिक
मत
प्राप्त
करने
का
सिलसिला
2014
में
दलपतसिंह
परस्ते
से
2019
में
हिमाद्री
सिंह
तक
पचास
प्रतिशत
से
अधिक
रहा।
ये
दोनों
उम्मीदवार
भाजपा
के
थे।
 


निर्दलीय
खड़े
हुए
थे
मनमोहन
सिंह

1989
के
चुनाव
में
एक
निर्दलीय
उम्मीदवार
मैदान
में
खड़े
हुए
थे,
उनका
नाम
मनमोहन
सिंह
था।
उन्हें
12,101
मत
प्राप्त
हुए
थे।
कांग्रेस
के
नेता
और
पूर्व
प्रधानमंत्री
का
नाम
भी
मनमोहन
सिंह
था।
इसी
तरह
1998
में
अजेय
भारत
पार्टी
से
कल्याणसिंह
खड़े
हुए
थे
उन्हें
4480
मत
प्राप्त
हुए
थे।
भाजपा
के
वरिष्ठ
नेता
और
यूपी
के
पूर्व
मुख्यमंत्री
का
नाम
भी
कल्याण
सिंह
था।
यह
एक
विचित्र
संयोग
रहा
है।


अजित
जोगी
हार
गए
थे

1999
में
प्रशासनिक
सेवा
से
राजनीति
में
आए
अजित
जोगी
ने
कांग्रेस
से
चुनाव
लड़ा
था
पर
उन्हें
विजय
प्राप्त
नहीं
हुई।
सत्तर
के
दशक
में
अजित
जोगी
शहडोल
के
जिला
कलेक्टर
रहे
थे
और
उनकी
जनजातीय
समुदाय
में
काफी
प्रसिद्धि
थी।


नोटा
का
भरपूर
उपयोग

लोकसभा
चुनाव
में
ईवीएम
में
नोटा
का
विकल्प
होने
से
शहडोल
के
मतदाता
नोटा
का
भरपूर
उपयोग
करते
हैं।
वर्ष
2014
में
21
हजार
376
और
2019
के
चुनाव
में
20
हजार
39
मतदाताओं
ने
नोटा
का
उपयोग
किया
था
जो
प्रदेश
में
रिकॉर्ड
था।


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सांसद
और
विधायक
में
मुकाबला

शहडोल
में
इस
बार
मुकाबला
सांसद
और
विधायक
में
है।
देखना
है
कौन
विजय
हासिल
करता
है।
शहडोल
में
भाजपा
के
राष्ट्रीय
अध्यक्ष
जे
पी
नड्डा
सभा
ले
चुके
हैं
और
कांग्रेस
के
स्टार
प्रचारक
राहुल
गांधी
की
सभा
भी
हो
चुकी
है।
देखना
है
मतदाता
किसे
जिताता
है।