Mahashivratri: अमरकांठेश्वर महादेव की आराधना के लिए 5 दिनों तक लगता है मेला, खास पेड़े का लगता है भोग; जानें

अनूपपुर
में
महाशिवरात्रि
के
अवसर
पर
अमरकंटक
में
पांच
दिवसीय
मेले
का
आयोजन
किया
जाता
है।
जहां
दूर-दूर
से
श्रद्धालु
महाशिवरात्रि
पर्व
मनाने
के
लिए
यहां
स्थित
अमरकांठेश्वर
महादेव
की
पूजा
अर्चना
करने
के
लिए
पहुंचते
हैं।
यहां
5
दिनों
तक
विशेष
पूजा
अर्चना
की
जाती
है,
जिसके
लिए
दूर-दूर
से
श्रद्धालु
यहां
पहुंचते
हैं।


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आदि
गुरु
शंकराचार्य
ने
यहां
स्थापित
की
थी
मां
पार्वती
की
प्रतिमा

अमरकंटक
नर्मदा
मंदिर
परिसर
में
अमरकांठेश्वर
महादेव
का
स्वयंभू
लिंग
स्थित
है।
जो
कि
यहां
के
लोगों
की
आस्था
का
प्रतीक
है।
इसके
साथ
ही
900
वर्ष
पूर्व
यहां
आदि
गुरु
शंकराचार्य
का
आगमन
हुआ
था।
जिन्होंने
अमरकांठेश्वर
महादेव
शिवलिंग
के
समीप
मां
पार्वती
की
प्रतिमा
की
स्थापना
की
थी।


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इस
बारे
में
मान्यता
है
कि
माता
पार्वती
ने
अपने
पिता
भगवान
भोलेनाथ
की
आराधना
करते
हुए
उनसे
वरदान
मांगा
था
कि
वह
अमरकंटक
में
ही
निवास
करें
जिस
पर
भोलेनाथ
ने
उन्हें
यह
आशीर्वाद
भी
प्रदान
किया
था।
इसके
बाद
अमरकंटक
को
प्रथम
कैलाश
भी
कहा
जाता
है।


महाशिवरात्रि
पर
होती
है
विशेष
पूजा
अर्चना

नर्मदा
मंदिर
के
पुजारी
पंडित
धनेश
द्विवेदी
ने
बताया
कि
महाशिवरात्रि
का
पर्व
बड़े
ही
उत्साह
के
साथ
मनाया
जाता
है।
शिवरात्रि
माता
गौरी
का
विवाह
उत्सव
भी
है,
इसके
कारण
यहां
नर्मदा
स्नान
का
विशेष
महत्व
है।
देवासुर
संग्राम
में
देवताओं
ने
राक्षसों
का
वध
किया
था
जिसके
बाद
पाप
से
मुक्ति
के
लिए
उन्होंने
यहां
नर्मदा
स्नान
करने
के
बाद
मुक्ति
पाई
थी।
इस
वजह
से
मां
नर्मदा
की
भूमि
में
महाशिवरात्रि
का
विशेष
महत्व
है।
5
दिनों
तक
यहां
महाशिवरात्रि
का
पर्व
मनाया
जाता
है,
जहां
महाभिषेक
के
साथ
ही
रात्रि
जागरण
कर
पूजा
अर्चना
की
जाती
है।


पेड़े
का
भोग 

महाशिवरात्रि
के
अवसर
पर
यहां
भगवान
भोलेनाथ
को
गाय
के
दूध
से
बने
पेड़े
का
भोग
लगाया
जाता
है।
इसके
साथ
ही
भांग,
धतूरा,
लौंग,
इलायची,
इत्र,
जायफल,
दाल
पुष्प
एवं
आम
का
पुष्प,
बेर,
नए
गेहूं
की
बाली,
अलसी
का
पुस्प
चढ़ाया
जाता
है।
इस
बारे
में
मंदिर
के
पुजारी
पंडित
धनेश
द्विवेदी
ने
बताया
कि
महाशिवरात्रि
के
अवसर
पर
मां
नर्मदा
में
स्नान
दान
पूजा
और
भेंट
का
विशेष
महत्व
है।
नर्मदा
स्नान
और
शिव
जी
के
पूजन
से
घोर
कलयुग
से
ईश्वर
प्राणियों
की
रक्षा
करते
हैं।


हजारों
वर्ष
पुराना
है
महाशिवरात्रि
का
मेला

महाशिवरात्रि
पर
पांच
दिवसीय
मेले
का
आयोजन
किया
जाता
है,
जिसके
बारे
में
मंदिर
के
पुजारी
पंडित
धनेश
द्विवेदी
ने
बताया
कि
यह
मेल
हजारों
वर्ष
पुराना
है
और
वर्ष
1772
में
इसे
राजकीय
संरक्षण
मिला
था।
जहां
मंडला
के
रामपुर
रियासत
के
राजा
हृदय
शाह
गौड़
ने
यहां
मेले
में
पहुंचने
वाले
श्रद्धालुओं
की
सुविधा
के
लिए
रहने
और
सुरक्षा
के
लिए
आज
से
सैनिकों
की
व्यवस्था
की
थी।