MahaShivratri: शहडोल का विराट मंदिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर, महाभारत काल से है नाता

मध्य
प्रदेश
का
शहडोल
जिला
प्राकृतिक
सौंदर्य
और
सांस्कृतिक
धरोहरों
से
समृद्ध
है।
इस
जिले
में
स्थित
विराट
मंदिर
एक
ऐतिहासिक
और
धार्मिक
स्थल
है,
जो

केवल
अपनी
भव्यता
के
लिए
प्रसिद्ध
है
बल्कि
पौराणिक
महत्व
भी
रखता
है।
विराट
मंदिर
का
संबंध
महाभारत
काल
से
जोड़ा
जाता
है
और
इसे
धार्मिक
आस्था
के
केंद्र
के
रूप
में
देखा
जाता
है।
विराट
मंदिर
का
उल्लेख
महाभारत
की
कथाओं
से
जुड़ा
हुआ
है।
कहा
जाता
है
कि
जब
पांडव
अपने
अज्ञातवास
के
दौरान
विराट
नगर
में
निवास
कर
रहे
थे,
तब
यह
स्थान
उनकी
शरण
स्थली
बना
था।
यह
मंदिर
विराट
राजा
के
साम्राज्य
से
भी
जुड़ा
हुआ
माना
जाता
है,
जहां
पांडवों
ने
एक
वर्ष
तक
छुपकर
निवास
किया
था।
इसी
कारण
इस
मंदिर
का
नाम
‘विराट
मंदिर’
पड़ा।
राजा
युवराज
देव
प्रथम
ने
इसका
निर्माण
कर
वाया
था,
10
वीं
11वीं
शताब्दी
ईस्वी
में
इसका
निर्माण
हुआ
था।

मंदिर
की
स्थापत्य
कला
और
विशेषताएं

विराट
मंदिर
अपनी
अद्भुत
स्थापत्य
कला
के
लिए
प्रसिद्ध
है।
इस
मंदिर
की
संरचना
प्राचीन
भारतीय
मंदिर
वास्तुकला
के
आधार
पर
निर्मित
है।
मंदिर
में
प्रमुख
रूप
से
भगवान
विष्णु
और
शिव
की
भव्य
प्रतिमाएं
स्थापित
हैं।
मंदिर
की
दीवारों
और
स्तंभों
पर
सुंदर
नक्काशी
की
गई
है,
जिसमें
देवी-देवताओं,
ऋषियों,
और
महाभारत
की
घटनाओं
को
चित्रित
किया
गया
है।
मंदिर
के
परिक्रमा
भाग
में
शिव
के
विभिन्न
स्वरूपों
और
शिव
परिवार
की
प्रतिमा
उकेरी
गई
हैं।
मंदिर
के
बाहरी
भाग
में
कई
अप्सराओं
और
देवांगनाओं
की
प्रतिमाएं
भी
उकेरी
गई
हैं।
ब्रह्मा
विष्णु
महेश
के
स्वरूपों
की
प्रतिमाएं
भी
उकेरी
गई
हैं।
इसके
साथ
ही
खजुराहो
की
मंदिरों
की
तरह
यहां
भी
काम
कला
गृहस्थ
से
संबंधित
प्रतिमाओं
का
भी
शिल्पन
किया
गया
है।
गर्भगृह
में
शिवलिंग
जलहरी
के
साथ
प्रतिस्थापित
हैं।
मंदिर
की
ऊंचाई
72
फीट
है।

मंदिर
परिसर
में
कई
छोटे-छोटे
मंदिर
भी
स्थित
हैं,
जिनमें
भगवान
गणेश,
माता
दुर्गा,
हनुमान
और
अन्य
देवी-देवताओं
की
मूर्तियां
स्थापित
हैं।
यहां
हर
वर्ष
शिवरात्रि,
जन्माष्टमी
और
रामनवमी
जैसे
प्रमुख
हिंदू
त्योहार
धूमधाम
से
मनाए
जाते
हैं।


धार्मिक
और
पर्यटन
दृष्टि
से
महत्व

विराट
मंदिर
सिर्फ
धार्मिक
आस्था
का
केंद्र
ही
नहीं,
बल्कि
यह
एक
प्रमुख
पर्यटन
स्थल
भी
है।
यहां
देशभर
से
श्रद्धालु
और
पर्यटक
आते
हैं।
विशेष
रूप
से,
महाशिवरात्रि
और
अन्य
धार्मिक
अवसरों
पर
यहां
भक्तों
की
भारी
भीड़
देखी
जाती
है।
मंदिर
के
आसपास
हरियाली
और
शांत
वातावरण
इसे
ध्यान
और
साधना
के
लिए
एक
आदर्श
स्थान
बनाते
हैं।

यहां
आने
वाले
पर्यटक
शहडोल
जिले
के
अन्य
दर्शनीय
स्थलों,
जैसे
बनसुजारी
जलप्रपात,
सोहागपुर
किला
और
बकहो
जलप्रपात
का
भी
आनंद
ले
सकते
हैं।
विराट
मंदिर
का
ऐतिहासिक
और
आध्यात्मिक
महत्व
इसे
शहडोल
जिले
का
गौरव
बनाता
है।


मंदिर
तक
पहुंचने
का
मार्ग

विराट
मंदिर
शहडोल
जिले
में
स्थित
है,
जो
मध्य
प्रदेश
के
प्रमुख
शहरों
से
अच्छी
तरह
से
जुड़ा
हुआ
है।
रेल
मार्ग
में
शहडोल
रेलवे
स्टेशन,
जो
कि
जबलपुर,
भोपाल
और
कटनी
जैसे
शहरों
से
जुड़ा
हुआ
है।
इसी
तरह
सड़क
मार्ग
 में
यह
मंदिर
शहडोल
शहर
से
कुछ
किलोमीटर
की
दूरी
पर
स्थित
है,
जहां
बस
और
टैक्सी
की
सुविधा
उपलब्ध
है।
वहीं
हवाई
मार्ग
के
लिए
निकटतम
हवाई
अड्डा
जबलपुर
है,
जो
शहडोल
से
लगभग
200
किलोमीटर
की
दूरी
पर
स्थित
है।
विराट
मंदिर

केवल
मध्य
प्रदेश
बल्कि
पूरे
भारत
की
धार्मिक
और
सांस्कृतिक
धरोहरों
में
एक
महत्वपूर्ण
स्थान
रखता
है।
यह
मंदिर
इतिहास,
धर्म
और
कला
का
अनूठा
संगम
प्रस्तुत
करता
है।
जो
भी
श्रद्धालु
या
पर्यटक
यहां
आते
हैं,
वे
इसकी
भव्यता
और
आध्यात्मिक
ऊर्जा
से
अभिभूत
हुए
बिना
नहीं
रहते।