MP News: ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला, नर्मदा नदी में फंसे तीन लोगों को सुरक्षित बचाया गया


तीर्थ
नगरी
ओंकारेश्वर
में
बुधवार
सुबह
एक
बड़ा
हादसा
होते-होते
टल
गया।
नगरघाट
पर
नर्मदा
स्नान
के
दौरान
दो
युवक
और
एक
चार
वर्षीय
बालक
नदी
के
बीच
चट्टानों
पर
फंस
गए।
गनीमत
रही
कि
समय
रहते
नाविक
संघ,
होमगार्ड
और
एसडीआरएफ
की
तत्परता
से
तीनों
को
सुरक्षित
बाहर
निकाल
लिया
गया।


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चट्टानों
पर
फंस
गए
थे
तीनों
श्रद्धालु

प्राप्त
जानकारी
के
अनुसार,
विदिशा
निवासी
बंटी
(उम्र
29
वर्ष),
सुनील
और
चार
वर्षीय
अंश
नगरघाट
पर
स्नान
के
लिए
पहुंचे
थे।
सुबह
घाट
पर
जलस्तर
कम
होने
के
कारण
तीनों
नर्मदा
नदी
के
बीच
चट्टानों
पर
चले
गए।
इसी
दौरान
ओंकारेश्वर
डैम
से
बिजली
उत्पादन
के
लिए
टरबाइन
चालू
कर
पानी
छोड़ा
गया,
जिससे
नदी
का
बहाव
अचानक
तेज
हो
गया।
जब
तक
तीनों
कुछ
समझ
पाते,
वे
तेज
धाराओं
के
बीच
फंस
चुके
थे।


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नाविक
संघ
और
SDRF
का
रेस्क्यू
ऑपरेशन

तीर्थयात्रियों
की
जान
खतरे
में
देखकर
ओंकारेश्वर
नाविक
संघ
के
सदस्य
सेलू
पिता
मंगू
सबसे
पहले
बिना
इंजन
वाली
नाव
से
मदद
के
लिए
पहुंचे,
लेकिन
तेज
बहाव
और
बिना
इंजन
की
नाव
के
चलते
उनका
प्रयास
सफल
नहीं
हो
सका।
इसके
बाद
नाविक
संघ
के
ही
पिंटू
उर्फ
पंकज
केवट
(पिता
मंगू)
ने
डीजल
इंजन
वाली
नाव
से
घटनास्थल
पर
पहुंचकर
होमगार्ड
और
SDRF
जवानों
की
मदद
से
तीनों
को
सुरक्षित
नगरघाट
पर
वापस
लाया।


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रुपये
जुर्माना
भी


बचाव
कार्य
में
इनका
रहा
अहम
योगदान

रेस्क्यू
ऑपरेशन
में
नाविक
संघ
के
पिंटू
उर्फ
पंकज
केवट
और
सेलू
पिता
मंगू
के
साथ
सैनिक
नवल
सिंह
और
एचडीईआरएफ
(SDRF)
के
महेश
रावत
की
भी
सराहनीय
भूमिका
रही।
समय
रहते
की
गई
इस
कार्रवाई
से
एक
बड़ा
हादसा
टल
गया।


स्थानीयों
की
प्रशासन
से
मांग

घटना
के
बाद
स्थानीय
नागरिकों
और
नाविक
संघ
ने
प्रशासन
से
मांग
की
है
कि
जब
तक
सभी
इंजन
चालित
नावें
घाटों
पर
उपलब्ध
नहीं
हो
जातीं,
तब
तक
हर
घाट
पर
कम
से
कम
एक
इंजन
युक्त
नाव
की
अनिवार्य
तैनाती
सुनिश्चित
की
जाए।
लोगों
का
कहना
है
कि
इस
तरह
की
घटनाएं
बारिश
के
मौसम
में
और
अधिक
बढ़
सकती
हैं,
लिहाज़ा
एहतियातन
पुख्ता
इंतजाम
जरूरी
हैं।