MGM
–
फोटो
:
अमर
उजाला,
इंदौर
विस्तार
इंदौर
में
एमबीबीएस
(सर्जरी)
फाइनल
ईयर
के
94
स्टूडेंट्स
को
फिर
से
प्रेक्टिकल
एक्जाम
देनी
होगी।
मामला
एमजीएम
मेडिकल
कॉलेज
का
है।
मप्र
मेडिकल
मेडिकल
साइंस
यूनिवर्सिटी
जबलपुर
(MPMSU)
ने
इस
मामले
में
निर्देश
दिए
हैं
और
कहा
है
कि
एमजीएम
मेडिकल
कॉलेज
को
यह
एक्जाम
एक
हफ्ते
में
करानी
होगी।
क्या
है
मामला
एमजीएम
के
फाइनल
ईयर
के
170
स्टूडेंट्स
में
से
41
स्टूडेंट्स
हाल
ही
में
हुए
एग्जाम
में
फेल
हो
गए।
इसमें
कई
तरह
की
लापरवाही
के
मामले
सामने
आए।
इसके
साथ
कॉलेज
के
सर्जरी
विभाग
के
एचओडी
डॉ.
मनीष
कौशल
का
एक
ऑडियो
भी
सोशल
मीडिया
पर
वायरल
हुआ।
जिसमें
रिजल्ट
में
नंबर
बढ़ाने,
कम
करने
को
लेकर
बात
की
जा
रही
थी।
इसके
बाद
यह
निर्णय
लिया
गया।
हालांकि
डॉ.
कौशल
ने
इस
आडियो
को
फर्जी
बताया
है।
साथ
ही
इसकी
जांच
को
लेकर
बुधवार
को
उन्होंने
पुलिस
को
एक
आवेदन
भी
दिया
है।
एबीवीपी
ने
किया
प्रदर्शन
इस
मामले
पर
एबीवीपी
ने
कॉलेज
में
प्रदर्शन
कर
जांच
की
मांग
की
थी।
इस
पर
कॉलेज
प्रबंधन
ने
एक
कमेटी
बनाकर
रिजल्ट
को
रिवाइस
किया
था।
इसमें
पता
चला
था
कि
कुल
टोटल
में
एक
सेक्शन
के
नंबर
गिने
ही
नहीं
गए
थे।
यह
सेक्शन
15
नंबरों
का
था।
इसकी
रिपोर्ट
जबलपुर
यूनिवर्सिटी
को
भेज
दी
गई
थी।
वहां
कमेटी
ने
इसका
अध्ययन
किया।
इसमें
पता
चला
कि
रिवाइस
प्रोसेस
में
41
फेल
स्टूडेंट्स
सहित
94
स्टूडेंट्स
के
नंबर
बढ़
गए
हैं।
इस
पर
जबलपुर
यूनिवर्सिटी
ने
दोबारा
प्रेक्टिकल
एक्जाम
कराने
के
निर्देश
दिए।
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विज्ञापन
जो
एग्जाम
नहीं
देंगे
उनके
पुराने
नंबर
ही
मान्य
होंगे
इस
मामले
में
खास
बात
यह
कि
जो
स्टूडेंट्स
एग्जाम
नहीं
देंगे
उनके
पुराने
रिजल्ट
के
नंबर
ही
मान्य
होंगे।
यानी
पुराने
एग्जाम
में
जो
फेल
था
वह
फेल
ही
रहेगा
और
पास
होने
में
जिस
स्टूडेंट्स
को
जितने
नंबर
मिले
थे,
उतने
ही
गिने
जाएंगे।
हालांकि
कालेज
प्रबंधन
ने
अभी
यह
नहीं
बताया
है
कि
एग्जाम
कब
ली
जाएगी।