Jabalpur News: 87 हजार से अधिक प्रकरणों का आपसी सामंजस से निराकरण, 413 करोड़ से ज्यादा की अवार्ड राशि पारित

मप्र
जबलपुर
हाईकोर्ट
के
मुख्य
न्यायाधीश
सुरेश
कुमार
कैत
ने
कहा
कि
राष्ट्रीय
लोक
अदालतें
न्याय
तक
सुलभ,
समयबद्ध

सार्थक
पहुंच
की
प्रतिबद्धता
का
परिचायक
हैं।
ये

केवल
लंबित
मामलों
की
संख्या
को
घटाती
हैं,
बल्कि
शांति

संतोष
की
भावना
भी
लौटाती
हैं।
वे
शनिवार
को
वर्चुअल
माध्यम
से
राष्ट्रीय
लोक
अदालत
का
शुभारंभ
कर
रहे
थे।
नेशनल
लोक
अदालत
में
87
हजार
से
अधिक
प्रकरणों
का
आपसी
सामंजस्य
के
साथ
निराकरण
किया
गया।
इसके
साथ
ही
413
करोड़
रुपये
से
अधिक
की
अवार्ड
राशि
पारित
की
गई।

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राष्ट्रीय
लोक
अदालत
के
शुभारंभ
अवसर
पर
मध्यप्रदेश
राज्य
विधिक
सेवा
प्राधिकरण
के
कार्यपालक
अध्यक्ष,
हाईकोर्ट
के
प्रशासनिक
न्यायाधीश
संजीव
सचदेवा,
सदस्य
सचिव
प्रदीप
मित्तल,
हाईकोर्ट
विधिक
सेवा
समिति
इंदौर
के
अध्यक्ष
जस्टिस
विवेक
रूसिया,
ग्वालियर
के
अध्यक्ष
जस्टिस
आनंद
पाठक,
जस्टिस
विजय
कुमार
शुक्ला,
हाईकोर्ट
के
रजिस्ट्रार
जनरल
धरमिंदर
सिंह
सहित
अन्य
उपस्थित
थे।
मप्र
राज्य
विधिक
सेवा
प्राधिकरण
के
सदस्य
सचिव
प्रदीप
मित्तल
ने
अवगत
कराया
कि
राष्ट्रीय
लोक
अदालत
के
जरिए
सुबह
से
शाम
तक
कुल
3
लाख
35
हजार
204
सूचीबद्ध
प्रकरणों
में
से
87
हजार
579
मामलों
का
सफलतापूर्वक
निराकरण
किया
गया।
इनमें
58
हजार
576
प्री-लिटिगेशन

29
हजार
003
लंबित
मामले
शामिल
थे।
इस
प्रक्रिया
में
कुल
41.299
करोड़
रुपये
का
मुआवजा
वितरित
किया
गया।


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राष्ट्रीय
लोक
अदालत
के
लिए
राज्य
भर
में
कुल
1453
पीठों
का
गठन
किया
गया
था।
जबलपुर
मुख्य
पीठ

इंदौर-ग्वालियर
खंडपीठ
में
छह-छह
खंडपीठें
और
जिला
न्यायालयों
में
1447
पीठों
ने
परस्पर
सहमति
से
विवादों
का
समाधान
सुनिश्चित
कराया।
हाईकोर्ट,
जिला

तहसील
विधिक
सेवा
समितियों
के
पदाधिकारी,
अधिवक्ता,
नगरीय
निकाय,
विद्युत
कंपनियों,
बैंक

पैरा
लीगल
वालंटियर्स
की
महत्वपूर्ण
भूमिका
रही।

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पर
वैष्णव
तिलक
लगाया,
गले
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फिर
की
गई
भस्म
आरती


वर्षों
पुराने
विवाद
हुए
हल,
खिले
चेहरे

राष्ट्रीय
लोक
अदालत
में
भावनात्मक
दृश्य
भी
सामने
आए।
किसी
का
वैवाहिक
विवाद
था,
लेकिन
समझाइश
से
पति-पत्नी
दांपत्य
जीवन
में
राजी-खुशी
रहने
को
तैयार
हो
गए।
किसी
चेक
बाउंस
का
विवाद
दोनों
पक्षों
की
समझदारी
से
खत्म
हो
गया।
पड़ोसियों
के
बीच
लंबे
समय
से
चला

रहा
मनमुटाव
दूर
हुआ।
समाधान
के
बाद
गले
मिलकर
अदालत
कक्ष
से
बाहर
निकले।
सड़क
दुर्घटना
के
मामलों
में
बीमा
कंपनियों
से
समझौता
होने
पर
इलाज
के
लिए
समुचित
राशि
का
लाभ
मिल
गया।
इस
तरह
स्वजनों
के
चेहरे
खिल
उठे।


जिले
और
तहसीलों
में
2578
प्रकरण
हुए
निराकृत

जिला
अदालत
जबलपुर

तहसील
न्यायालय
सिहोरा

पाटन
में
शनिवार
को
राष्ट्रीय
लोक
अदालत
का
आयोजन
हुआ।
जिला
विधिक
सेवा
प्राधिकरण
जबलपुर
के
अध्यक्ष,
प्रधान
जिला
एवं
सत्र
न्यायाधीश
आलोक
अवस्थी
ने
दिशा-निर्देश
दिए।
सुबह
से
शाम
तक
आपसी
सहमति
से
कुल
2578
प्रकरण
निराकृत
हुए।
इस
प्रक्रिया
में
नौ
करोड़
रुपये
से
अधिक
का
मुआवजा
वितरित
हुआ।

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में
आज
आंधी,
बारिश
और
गरज-चमक
का
अलर्ट,
14
मई
से
कमजोर
होगा
सिस्टम

डालसा
की
सचिव
शक्ति
वर्मा
ने
बताया
कि
प्रकरणों
के
निराकरण
के
लिए
कुल
73
खंडपीठों
का
गठन
किया
गया
था।
न्यायालयों
में
लंबित
926
और
प्री-लिटिगेशन
के
1652
प्रकरणों
का
निराकरण
किया
गया।
आपराधिक
शमनीय
प्रकृति
के
413
प्रकरण,
धारा
138
एनआई
एक्ट
के
180
प्रकरण,
मोटर
दुर्घटना
क्षतिपूर्ति
दावा
के
56
प्रकरण,
सिविल
मामलों
के
79
प्रकरण,
विवाह
संबंधित
60
प्रकरण
और
विद्युत
अधिनियम
के
अंतर्गत
77
सहित
अन्य
प्रकृति
के
34
लंबित
प्रकरणों
का
निराकरण
किया
गया।

चेक
बाउंस
के
प्रकरणों
में
कुल
3
करोड़
22
लाख
53
हजार
096
रुपये
की
समझौता
राशि
तय
की
गई।
मोटर
दुर्घटना
क्षतिपूर्ति
दावा
प्रकरणों
में
1
करोड़
43
लाख
9
हजार
650
रुपये
की
अवार्ड
राशि
पारित
की
गई।
विद्युत
न्यायालयों
में
लंबित
77
प्रकरणों
में
17
लाख
61
हजार
816
रुपये
की
वसूली
हुई।
इसी
प्रकार
बैंक
रिकवरी
के
131
प्री-लिटिगेशन
प्रकरणों
में
निराकरण
पश्चात
1
करोड़
19
लाख
38
हजार
500
रुपये
की
समझौता
राशि
प्राप्त
हुई।