
राज्य
आजीविका
मिशन
में
भर्ती
के
लिए
बिना
अनुमोदित
मानव
संसाधन
मार्गदर्शिका
के
आधार
पर
संविदा
आधार
पर
पद
भरे
गए।
इन
नियुक्तियों
में
निर्धारित
योग्यता,
अनुभव
और
चयन
प्रक्रिया
के
लिए
मापदंड
मिशन
कार्यालय
स्तर
पर
भी
बनाए
गए।
जबकि
मापदंडों
को
बनाने
के
बाद
शासन
से
अनुमोदित
करना
आवश्यक
होता
है।
इसमें
कई
अयोग्य
और
अर्हता
पूरी
नहीं
करने
वाले
अभ्यर्थियों
को
भी
नियुक्ति
दी
गई।
जांच
में
सामने
आया
कि
तत्कालीन
मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
ललित
मोहन
बेलवाल
ने
नियमों
को
दरकिनार
करते
हुए
एक
गैर-अनुमोदित
“HR
Manual”
का
उपयोग
किया।
आजीविका
मिशन
में
भर्ती
के
लिए
बिना
अनुमोदित
मानव
संसाधन
मार्गदर्शिका
के
आधार
पर
संविदा
आधार
पर
पद
भरे
गए।
इन
नियुक्तियों
में
निर्धारित
योग्यता,
अनुभव
और
चयन
प्रक्रिया
के
लिए
मापदंड
मिशन
कार्यालय
स्तर
पर
भी
बनाए
गए।
जबकि
मापदंडों
को
बनाने
के
बाद
शासन
से
अनुमोदित
करना
आवश्यक
होता
है।
इसमें
कई
अयोग्य
और
अर्हता
पूरी
नहीं
करने
वाले
अभ्यर्थियों
को
भी
नियुक्ति
दी
गई।
जांच
में
सामने
आया
कि
तत्कालीन
मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
ललित
मोहन
बेलवाल
ने
नियमों
को
दरकिनार
करते
हुए
एक
गैर-अनुमोदित
“HR
Manual”
का
उपयोग
किया।
पूर्व
सीईओ
बेलवाल
ने
सुषमा
रानी
शुक्ला
को
नियमों
का
उल्लंघन
कर
राज्य
परियोजना
प्रबंधक
(सामुदायिक
संस्थागत
विकास)
के
पद
पर
नियुक्त
किया,
जबकि
उनके
पास
इस
पद
के
लिए
आवश्यक
15
वर्षों
का
प्रबंधकीय
अनुभव
नहीं
था।
मात्र
चार
महीने
के
भीतर
उनका
मानदेय
अवैध
रूप
से
70,000
प्रति
माह
कर
दिया
गया,
जबकि
अन्य
कर्मचारियों
को
यह
लाभ
नहीं
मिला।
जांच
में
यह
भी
सामने
आया
कि
बेलवाल
ने
मिशन
की
मानव
संसाधन
नीति
को
एचआर
मैन्युअल
के
रूप
में
प्रस्तुत
किया,
जबकि
मैन्युअल
राज्य
आजीविका
फोरम
द्वारा
अनुमोदन
प्राप्त
नहीं
था।
मार्च
2015
में
राज्य
आजीविका
फोरम
की
कार्यकारिणी
समिति
की
बैठक
में
केवल
मानव
संसाधन
नीति
को
मंजूरी
दी
गई
थी,
एचआर
मैन्यूअल
का
कोई
उल्लेख
नहीं
था।
इसके
बावजूद
नस्ती
में
नोटशीट
की
पृष्ठ
क्रमांक
5
में
कुटरचित
रूप
से
एचआर
मैन्यूअल
जोड़ा
गया।
गलत
नियुक्तियों
के
साथ
ही
संविधा
कर्मचारियों
के
मानदेय
में
अवैध
तरीके
से
40%
की
वृद्धि
की
गई।
सीईओ
बेलवाल
ने
सुषमा
रानी
शुक्ला
को
नियमों
का
उल्लंघन
कर
राज्य
परियोजना
प्रबंधक
(सामुदायिक
संस्थागत
विकास)
के
पद
पर
नियुक्त
किया,
जबकि
उनके
पास
इस
पद
के
लिए
आवश्यक
15
वर्षों
का
प्रबंधकीय
अनुभव
नहीं
था।
मात्र
चार
महीने
के
भीतर
उनका
मानदेय
अवैध
रूप
से
70,000
प्रति
माह
कर
दिया
गया,
जबकि
अन्य
कर्मचारियों
को
यह
लाभ
नहीं
मिला।
जांच
में
यह
भी
सामने
आया
कि
बेलवाल
ने
मिशन
की
मानव
संसाधन
नीति
को
एचआर
मैन्युअल
के
रूप
में
प्रस्तुत
किया,
जबकि
मैन्युअल
राज्य
आजीविका
फोरम
द्वारा
अनुमोदन
प्राप्त
नहीं
था।
मार्च
2015
में
राज्य
आजीविका
फोरम
की
कार्यकारिणी
समिति
की
बैठक
में
केवल
मानव
संसाधन
नीति
को
मंजूरी
दी
गई
थी,
एचआर
मैन्यूअल
का
कोई
उल्लेख
नहीं
था।
इसके
बावजूद
नस्ती
में
नोटशीट
की
पृष्ठ
क्रमांक
5
में
कुटरचित
रूप
से
एचआर
मैन्यूअल
जोड़ा
गया।
गलत
नियुक्तियों
के
साथ
ही
संविधा
कर्मचारियों
के
मानदेय
में
अवैध
तरीके
से
40%
की
वृद्धि
की
गई।
अनुभव
प्रमाण
पत्र
जाली,
डिग्री
फर्जी
जांच
में
यह
भी
खुलासा
हुआ
कि
सुषमा
रानी
शुक्ला
ने
अपने
चयन
के
लिए
जाली
प्रमाण
पत्र
प्रस्तुत
किए।
उन्होंने
राष्ट्रीय
ग्रामीण
विकास
एवं
पंचायती
राज
संस्थान
(NIRD),
हैदराबाद
का
एक
फर्जी
अनुभव
प्रमाण
पत्र
संलग्न
किया
था,
जिसमें
उनकी
उत्कृष्टता
का
वर्णन
था।
जांच
में
यह
प्रमाण
पत्र
कूटरचित
पाया
गया।
इसके
अलावा,
उनकी
एमबीए
की
डिग्री
भी
फर्जी
पाई
गई।
सिक्किम
मणिपाल
यूनिवर्सिटी
से
प्राप्त
उनकी
डिग्री
में
कई
विसंगतियां
मिली।
विश्वविद्यालय
के
रिकॉर्ड
के
अनुसार,
तृतीय
और
चतुर्थ
सेमेस्टर
दोनों
की
मार्कशीट
पर
एक
ही
तारीख
25
अक्टूबर
2010
अंकित
थी।
जबकि
यूनिवर्सिटी
ने
जानकारी
दी
कि
तृतीय
सेमेस्टर
की
परीक्षा
जनवरी/
फरवरी
और
चतुर्थ
सेमेस्टर
की
परीक्षा
जुलाई
2010
में
आयोजित
हुई
थी।
सुषमा
रानी
के
चयन
के
लिए
हर
स्तर
पर
मनमानी
EOW
की
जांच
में
यह
भी
सामने
आया
कि
शुक्ला
के
चयन
के
लिए
सायकोमेट्रिक
परीक्षा
में
भी
कई
अनियमिताएं
मिली
है।
मूल्यांकन
पत्र
पर
मूल्यांकनकर्ता
के
हस्ताक्षर
नहीं
थी।
अभ्यर्थियों
को
जो
अंक
दिए
गए,
उसमें
शुक्ला
को
मनमाने
तरीके
से
सर्वोच्च
अंक
दिए
गए।
इसके
अलावा,
साक्षात्कार
पैनल
का
गठन
भी
पक्षपातपूर्ण
ढंग
से
बेलवाल
ने
सवयं
किया,
जिसमें
बाहरी
विशेषज्ञों
का
चयन
मनमाने
तरीके
से
किया
गया।
अन्य
अवैध
नियुक्तियों
की
भी
हो
रही
जांच
आर्थिक
अपराध
प्रकोष्ठ
ने
ललित
मोहन
बेलवाल,
विकास
अवस्थी
और
सुषमा
रानी
शुक्ला
के
विरुद्ध
धोखाधड़ी,
कूटरचना
और
भ्रष्टाचार
के
तहत
भारतीय
दंड
संहिता
की
धारा
420,
468,
471,
120-बी
और
भ्रष्टाचार
निवारण
अधिनियम
की
धारा
7
(सी)
के
तहत
एफआईआर
दर्ज
की
है।
EOW
ने
अपनी
जांच
जारी
रखते
हुए
संकेत
दिया
है
कि
आगे
और
भी
वित्तीय
अनियमितताओं
का
खुलासा
हो
सकता
है।
इस
घोटाले
में
शामिल
अन्य
व्यक्तियों
की
भूमिका
की
भी
जांच
की
जा
रही
है।