
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
–
फोटो
:
सोशल
मीडिया
विस्तार
मध्य
प्रदेश
में
लोकसभा
चुनाव
के
दौरान
छिंदवाड़ा
भाजपा
के
लिए
साख
का
सवाल
बन
गया
है।
पिछले
चार
दशक
में
एक
चुनाव
को
छोड़
भाजपा
कभी
छिंदवाड़ा
में
नहीं
जीत
पाई।
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
लोकसभा
चुनाव
में
मध्य
प्रदेश
के
अलग-अलग
जगहों
पर
रैली
कर
रहे
हैं,
लेकिन
छिंदवाड़ा
में
उनका
अभी
तक
कोई
कार्यक्रम
नहीं
आया
है।
इससे
पहले
2014
और
2019
के
चुनाव
में
भी
प्रधानमंत्री
की
छिंदवाड़ा
में
कोई
रैली
नहीं
हुई
है। पीएम
मोदी
के
छिंदवाड़ा
से
दूर
रहने
की
वजह
सियासी
जानकार
कमलनाथ
का
मजबूत
गढ़
मानते
हैं।
हालांकि
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
छिंदवाड़ा
के
आसपास
रैली
कर
वहां
के
वोटरों
तक
अपनी
बात
पहुंचाने
की
कोशिश
जरूर
करते
हैं।
अभी
हाल
ही
में
छिंदवाड़ा
के
करीब
जबलपुर
में
उन्होंने
रोड
शो
किया
था।
रविवार
को
प्रधानमंत्री
छिंदवाड़ा
जिले
से
लगे
होशंगाबाद
के
पिपरिया
में
जनसभा
को
संबोधित
करने
आ
रहे
हैं।
बता
दें
छिंदवाड़ा
में
पहले
चरण
में
19
अप्रैल
को
मतदान
है।
मोदी
लहर
में
भी
अभेद
रहा
नाथ
का
किला
मध्य
प्रदेश
में
2014
के
लोकसभा
चुनाव
में
मोदी
लहर
में
भाजपा
दो
सीट
नहीं
जाती
पाई
थी।
इसमें
गुना-शिवपुरी
और
छिंदवाड़ा
सीट
शामिल
थी।
2019
के
चुनाव
में
भाजपा
ने
29
में
से
28
सीटें
जीतीं,
लेकिन
छिंदवाड़ा
से
कांग्रेस
के
नकुलनाथ
चुनाव
जीते।
इस
बार
भाजपा
ने
प्रदेश
की
सभी
29
की
29
सीटें
जीतने
का
लक्ष्य
तय
किया
है।
वहीं,
पिछले
दो
विधानसभा
चुनाव
में
जिले
की
सातों
विधानसभा
सीटों
पर
कांग्रेस
का
कब्जा
रहा।
चार
दशक
में
सिर्फ
एक
चुनाव
हारे
नाथ
छिंदवाड़ा
सीट
पर
कमलनाथ
1980
में
पहली
बार
सांसद
बने।
इसके
बाद
वे
लगातार
9
बार
सांसद
रहे।
1997
में
उप
चुनाव
में
कमलनाथ
पूर्व
मुख्यमंत्री
सुंदरलाल
पटवा
से
चुनाव
हार
गए।
हालांकि
एक
साल
बाद
आम
चुनाव
में
फिर
कमलनाथ
ने
चुनाव
जीत
लिया।
अभी
कमलनाथ
छिंदवाड़ा
सीट
से
विधायक
हैं।
वहीं,
इस
सीट
पर
एक
बार
उनकी
पत्नी
अलका
नाथ
1996
और
बेटे
नकुलनाथ
2019
में
सांसद
बने।
इसलिए
है
कमलनाथ
का
मजबूत
गढ़
कमलनाथ
का
छिंदवाड़ा
की
जनता
से
चार
दशक
पुराना
रिश्ता
है।
उनका
जनता
से
भावनात्मक
जुड़ाव
है।
उन्होंने
छिंदवाड़ा
में
विकास
के
काम
के
साथ
ही
दिल्ली
में
उनके
लिए
अपना
दरबार
खुला
रखा।
उन्होंने
छिंदवाड़ा
के
विकास
को
देश
में
प्रसिद्ध
किया।
राजनीति
का
कमलनाथ
का
45
साल
का
अनुभव
है,
जो
उनको
दूसरे
नेताओं
से
मजबूत
बनाता
है।
भाजपा
ने
अपनाई
यह
रणनीति
भाजपा
ने
छिंदवाड़ा
में
कमलनाथ
के
करीबियों
को
तोड़ने
की
रणनीति
अपनाई
है।
अमरवाड़ा
से
विधायक
कमलेश
शाह,
छिंदवाड़ा
महापौर
विक्रम
अहाके,
पूर्व
मंत्री
दीपक
सक्सेना
समेत
कई
नेताओं
को
भाजपा
में
शामिल
कर
लिया
है।
प्रदेश
में
छिंदवाड़ा
में
ही
भाजपा
ने
सबसे
ज्यादा
कांग्रेस
के
नेताओं
और
कार्यकर्ताओं
को
शामिल
करने
वाली
तोड़फोड़
की।
इस
सीट
को
जीतने
के
लिए
भाजपा
लंबे
समय
से
तैयारी
कर
रही
थी।
आदिवासी
वोटरों
के
साथ
ही
भाजपा
ग्रामीण
इलाकों
पर
ज्यादा
फोकस
कर
रही
है।
छिंदवाड़ा
में
कुल
वोट
का
करीब
36
प्रतिशत
यानी
साढ़े
छह
लाख
वोटर
आदिवासी
समाज
से
ही
है।
इस
बार
पार्टी
ने
पूरा
जोर
लगा
दिया
है।
दो
बार
नाथ
से
हारे
प्रत्याशी
पर
दांव
भाजपा
ने
छिंदवाड़ा
में
कमलनाथ
से
दो
बार
चुनाव
हारे
विवेक
बंटी
साहू
को
लोकसभा
प्रत्याशी
बनाया
है।
बंटी
साहू
कमलनाथ
से
दो
बार
विधानसभा
का
चुनाव
हारे
चुके
हैं।
हालांकि
भाजपा
की
छिंदवाड़ा
की
सीट
जीतने
की
उम्मीद
इसलिए
बढ़ी
है,
क्योंकि
जीत
का
मार्जिन
बहुत
कम
हो
गया
है।
2019
के
लोकसभा
चुनाव
में
नकुलनाथ
करीब
37
हजार
वोटों
से
जीते।
वहीं,
कमलनाथ
विधानसभा
चुनाव
भी
करीब
25
हजार
वोट
से
जीते।
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अब
पक्ष
में
माहौल
दिख
रहा,
इसलिए
आ
रहे शाह
वरिष्ठ
पत्रकार
प्रभू
पटैरिया
कहते
हैं
कि
हो
सकता
है
2014
और
2019
की
परिस्थिति
या
सर्वे
में
उनके
पक्ष
में
माहौल
नहीं
दिख
रहा
हो।
इसलिए
प्रधानमंत्री
ने
उन
सीटों
पर
ज्यादा
फोकस
किया
होगा,
जहां
पर
उनके
जाने
से
जीतने
की
संभावना
बढ़
जाती
है।
अमित
शाह
भी
पिछले
दो
चुनाव
में
छिंदवाड़ा
नहीं
गए
थे।
अब
आ
रहे
हैं।
ऐसा
माना
जा
रहा
है
कि
उन्हें
वहां
पर
अपने
पक्ष
में
माहौल
दिख
रहा
है।