
आर्थिक
अपराध
विंग
(ईओडब्ल्यू)
ने
सतपुड़ा
रिसॉर्ट
के
मालिक
प्रमोद
पुरी
के
साथ
मिलकर
बिशप
पी.सी.
सिंह
और
एम.के.
सिंह
ने
नागपुर
डायोसिस
ट्रस्ट
एसोसिएशन
(एनडीटीए)
की
पचमढ़ी
स्थित
भूमि
और
भवन
को
अत्यधिक
सस्ते
दरों
पर
लीज
पर
दिया।
यह
लीज
बिना
एनडीटीए
और
चैरिटी
कमिश्नर
की
अनुमति
के
दी
गई।
बिशप
पीसी
सिंह
को
एनडीटीए
द्वारा
पचमढ़ी
की
संपत्ति
की
देखरेख
का
अधिकार
दिया
गया
था,
लेकिन
उन्होंने
इसका
दुरुपयोग
करते
हुए
यह
संपत्ति
एमके
सिंह
के
नाम
दर्ज
कराई।
इसके
बाद,
इसे
केवल
12,500
रुपये
प्रति
माह
के
किराए
पर
सतपुड़ा
रिसॉर्ट
प्रा.लि.
के
मालिक
प्रमोद
पुरी
को
लीज
पर
दे
दिया
गया,
जबकि
यह
संपत्ति
पचमढ़ी
के
प्रमुख
व्यावसायिक
क्षेत्र
में
स्थित
थी।
ईओडब्ल्यू
ने
इन
आरोपों
की
जांच
के
बाद
बिशप
पीसी
सिंह,
एमके
सिंह
(जो
अब
मृत
हैं),
प्रमोद
पुरी
और
अन्य
के
खिलाफ
धोखाधड़ी
और
आपराधिक
षड्यंत्र
के
तहत
मामला
दर्ज
किया
है।
आरोपों
के
अनुसार,
इस
लीज
से
प्राप्त
राशि
का
गबन
भी
किया
गया
है।
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नितिन
लॉरेंस
की
शिकायत
पर
कार्रवाई
ईओडब्ल्यू
भोपाल
को
शिकायतकर्ता
नितिन
लॉरेंस
एवं
एनडीटीए
के
पूर्व
प्रॉपर्टी
सचिव
प्रशांत
सत्रालकर
द्वारा
बिशप
पीसी
सिंह
एवं
अन्य
के
विरूद्ध
एनडीटीए
के
स्वामित्व
की
पचमढ़ी
स्थित
भूमि
एवं
भवन
को
बिना
अधिकारिता
एवं
बिना
एनडीटीए
व
चैरिटी
कमिश्नर
नागपुर
की
अनुमति
के
व्यावसायिक
उद्देश्य
हेतु
अत्याधिक
सस्ते
दरों
पर
लीज
देने
संबंधी
शिकायत
की
गई।
जांच
में
पाया
गया
की
चर्च
ऑफ
नॉर्थ
इंडिया
(सीएनआई)
के
अंतर्गत
(एनडीटीए)
नागपुर
से
पृथक
होकर
डायोसिस
ऑफ
जबलपुर
एवं
डायोसिस
ऑफ
भोपाल
अलग-अलग
गठित
हुये
थे,
परंतु
दोनों
डायोसिस
के
क्षेत्रों
में
स्थित
एनडीटीए
की
संपत्तियों
पर
एनडीटीए
का
ही
अधिकार
था,
जिसकी
देख-रेख
के
लिये
एनडीटीए
द्वारा
जबलपुर
एवं
भोपाल
डायोसिस
को
पॉवर
ऑफ
अटॉर्नी
दी
जाती
थी।
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बिसप
ने
किया
पॉवर
ऑफ
अटॉर्नी
का
दुरूपयोग
19
फरवरी
2007
को
एनडीटीए
के
बिशप
पॉल
बी
प्रभुदास
दुपारे
द्वारा
जबलपुर
डायोसिस
के
तत्कालीन
बिशप
पीसी
सिंह
को
उनके
डायोसिस
के
क्षेत्रांतर्गत
संपत्तियों
की
देख
रेख
के
लिए
पॉवर
ऑफ
अटॉर्नी
दी
गई।
सिंह
द्वारा
उक्त
पॉवर
ऑफ
अटॉर्नी
का
दुरूपयोग
कर
जबलपुर
डायोसिस
के
सचिव
एमके
सिंह
को
अनाधिकृत
अधिकार
पत्र
देकर,
पचमढ़ी
स्थित
एनडीटीए
की
भूमि
एवं
भवन
जो
कि
पचमढ़ी
के
मुख्य
व्यावसायिक
क्षेत्र
में
स्थित
है,
राजस्व
रिकॉर्ड
में
एमके
सिंह
के
नाम
पर
दर्ज
करा
दिया
गया।
जबकि
उक्त
भूमि
डायोसिस
ऑफ
भोपाल
के
क्षेत्राधिकार
में
थी
एवं
उस
पर
एनडीटीए
नागपुर
का
स्वामित्व
था
एवं
बिशप
पीसी
सिंह
को
दी
गई
पॉवर
ऑफ
अटॉर्नी
के
अधिकार
क्षेत्र
से
बाहर
था।
12,500
रुपए
प्रति
माह
किराए
पर
दी
जमीन
आरोपी
बिशप
पीसी
सिंह
द्वारा
नागपुर
डायोसिएशन
ट्रस्ट
एसोसिएशन
की
1,05,837
वर्ग
फीट
भूमि
एवं
उस
पर
निर्मित
भवन
को
एमके
सिंह
(मृत)
तत्कालीन
सचिव
प्रॉपर्टी
कमेटी
जबलपुर
डायोसिस
के
साथ
मिलकर,
नागपुर
डायोसिएशन
की
पचमढ़ी
स्थित
भूमि
को
बिना
एनटीडीए
चैरिटी
कमिश्नर
नागपुर
की
अनुमति
के
सतपुडा
रिसॉर्ट
प्रा.लि.
के
मालिक
प्रमोद
पुरी
को
14
वर्ष
की
लीज
पर
केवल
12,500/-
रुपये
के
मासिक
किराये
पर
दिया
गया।
बता
दें
कि
यह
संपत्ति
पचमढ़ी
के
मुख्य
व्यावसायिक
क्षेत्र
में
स्थित
होने
के
बावजूद
अत्यधिक
सस्ते
दरों
पर
लीज
पर
दी
गई।
मेसर्स
सतपुड़ा
रिसॉर्ट
प्रा.लि.
से
प्राप्त
राशि
का
गबन
किये
जाने
के
आरोप
प्रमाणित
पाये
जाने
से
जबलपुर
डायोसिस
के
तत्कालिन
बिशप
पीसी
सिंह,
तत्कालिन
प्रॉपर्टी
सचिव
एम
के
सिंह
(मृत)
एवं
सतपुड़ा
रिसॉर्ट
प्रा.लि.
के
मालिक
प्रमोद
पुरी
एवं
अन्य
के
विरुद्ध
धारा
120बी,
सहपठित
धारा
406,
420,
भादंवि
का
अपराध
पंजीबद्ध
कर
जांच
की
जा
रही
है।