MP News: महेश्वरी साड़ी बुनकर मीनाक्षी ठाकले बनीं आत्मनिर्भर, पीएम मोदी से मिलकर कर रहीं गौरवान्वित महसूस


लोकमाता
देवी
अहिल्याबाई
होल्कर
की
300वीं
जयंती
पर
आयोजित
महिला
सशक्तिकरण
महासम्मेलन
में
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
का
महेश्वरी
साड़ी
निर्माण
के
क्षेत्र
में
सक्रिय
नागेश्वरी
स्वयं
सहायता
समूह
महेश्वर
की
मीनाक्षी
ठाकले
ने
अभिनंदन
किया।
इस
अवसर
पर
उनसे
पीएम
ने
बातचीत
की।
मीनाक्षी
ने
बताया
कि
प्रधानमंत्री
से
मिलकर
मुझे
विश्वास
ही
नहीं
हुआ
कि
यह
मोदी
जी
हैं।
मेरी
मम्मी
ने
फोन
पर
कहा
कि
‘बेटा,
तूने
बहुत
नाम
कमाया
है,
मुझे
तेरी
मां
होने
पर
गर्व
हो
रहा
है। प्रधानमंत्री
मोदी
ने
मंच
पर
मीनाक्षी
से
नाम,
निवास
और
व्यवसाय
पूछा।
मीनाक्षी
ने
उत्तर
दिया,
‘मैं
महेश्वर,
खरगोन
की
हूं
और
हैंडलूम
से
साड़ी
बनाती
हूं।’
जब
मोदी
जी
ने
कमाई
के
बारे
में
पूछा,
तो
उत्साह
से
उन्होंने
कहा,
‘पूरा
समूह
मिलाकर
हमें
लगभग
60,000
रुपये
महीने
मिलते
हैं। 


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समूह
में
18
महिलाएं
 

महेश्वर
निवासी
मीनाक्षी
पिछले
12
वर्षों
से
महेश्वरी
साड़ी
बुनाई
से
जुड़ी
हैं।
वे
स्वयं
सहायता
समूह
में
18
महिलाओं
को
जोड़कर
काम
कर
रही
हैं,
जिससे
सभी
आत्मनिर्भर
बन
रही
हैं।
मीनाक्षी
ने
बताया
कि
सरकार
की
समर्थ
योजना
का
लाभ
मिला
है,
जिससे
अब
हमारे
पास
पांच
हैंडलूम
हो
गए।
इनसे
मैं
प्रतिमाह
लगभग
8,000
रुपये
कमाती
हूं,
लेकिन
पूरे
समूह
के
साथ
मिलकर
जितना
उपार्जन
होता
है,
वह
 60,000
रुपये
से
ज्यादा
हो
जाता
है।
मीनाक्षी
ने
बताया
कि
उनके
पति,
सास-ससुर
और
अन्य
परिवार
के
सदस्य
भी
बुनाई
का
काम
करते
हैं।
इस
सामूहिक
प्रयास
ने
परिवार
का
आर्थिक
स्वरूप
बदल
दिया
है।


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देवी
अहिल्या
ने
गुजरात
से
बुलाए
थे
कारीगर

प्रधानमंत्री
मोदी
ने
अपने
संबोधन
में
बताया
कि
लगभग
250
साल
पहले
देवी
अहिल्याबाई
ने
गुजरात
के
जूनागढ़
से
कुछ
कारीगर
परिवारों
को
महेश्वर
बुलाया
था।
उन्हीं
परिवारों
के
सहयोग
से
महेश्वरी
साड़ियों
का
उद्योग
शुरू
हुआ।
इसकी
कलाकारी
आज
भी
देश-विदेश
में
सराही
जाती
है।
उन्होंने
कहा
कि
अहिल्याबाई
ने
विकास
और
सांस्कृतिक
विरासत
दोनों
को
साथ
लेकर
चलने
का
मार्गदर्शन
दिया
था
और
वर्तमान
सरकार
भी
उनसे
प्रेरणा
लेकर
इसी
दिशा
में
काम
कर
रही
है।