MP News: आरक्षण नियमों में उलझी 8,500 पुलिस पदों पर भर्ती, पीएचक्यू ने राज्य सरकार से मांगा मार्गदर्शन


मध्य
प्रदेश
में
8,500
पदों
पर
पुलिस
भर्ती
प्रक्रिया
पिछले
कई
महीनों
से
आरक्षण
नीति
को
लेकर
अस्पष्टता
और
पीएचक्यू
और
कर्मचारी
चयन
बोर्ड
 के
बीच
समन्वय
की
कमी
के
कारण
अटकी
हुई
है।
इन
पदों
में
7,500
आरक्षक
(सिपाही)
और
1,000
उपनिरीक्षक

लिपिकीय
पद
(स्टेनोग्राफर,
सहायक
आदि)
शामिल
हैं।
यह
भर्ती
राज्य
की
कानून-व्यवस्था
को
सशक्त
बनाने
और
युवाओं
को
रोजगार
देने
की
दृष्टि
से
अत्यंत
महत्वपूर्ण
मानी
जा
रही
थी। 


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बता
दें,
मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
ने
जुलाई
2024
में
एक
पुलिस
बैंड
कार्यक्रम
के
दौरान
इस
भर्ती
की
घोषणा
की
थी।
इसके
बाद
दिसंबर
में
पुलिस
मुख्यालय
(पीएचक्यू)
ने
भर्ती
प्रक्रिया
का
दायरा
बढ़ाते
हुए
500
उपनिरीक्षक
और
500
लिपिकीय
पद
भी
जोड़े।
इसके
बाद
से
युवाओं
में
बड़ी
उम्मीद
जगी
थी,
लेकिन
अब
यह
प्रक्रिया
लगभग
पांच
महीने
से
ठप
पड़ी
है,
जिससे
हजारों
बेरोजगार
युवा
असमंजस
में
हैं।
 
  


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साजिश
के
लिए
मिल
रही
फंडिंग


नीति
स्पष्ट
नहीं
होने
से
निर्णय
लंबित

जानकारी
के
अनुसार
पुलिस
मुख्यालय
को
भर्ती
में
आरक्षण
की
स्थिति
को
लेकर
कुछ
बिंदुओं
पर
स्पष्टीकरण
की
आवश्यकता
है।
साथ
ही,
उम्मीदवारों
को
राज्य
सरकार
के
रोजगार
पोर्टल
पर
पंजीकृत
होना
अनिवार्य
किया
गया
है,
लेकिन
इस
नियम
को
लेकर
भी
विभागों
के
बीच
मतभेद
सामने
आए
हैं।
यही
कारण
है
कि
प्रक्रिया
को
आगे
बढ़ाने
से
पहले
मामला
राज्य
सरकार
को
भेजा
गया
है,
ताकि
वह
इस
पर
अंतिम
निर्णय
ले
सके। 
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भर्ती
की
तैयारी
कर
रहे
युवा
परेशान 

राज्य
भर
से
लाखों
युवाओं
ने
इस
भर्ती
प्रक्रिया
का
बेसब्री
से
इंतजार
किया
था।
कई
युवाओं
ने
परीक्षा
की
तैयारी
के
लिए
कोचिंग
संस्थानों
में
दाखिला
लिया
और
पढ़ाई
में
समय
और
धन
निवेश
किया।
अब
भर्ती
प्रक्रिया
के
ठप
हो
जाने
से
उनमें
निराशा
और
नाराजगी
बढ़
रही
है।