MP News: POK को लेने पर अविमुक्तेश्वरानंद बोले- पहले एक के बदले दस सिर लाने का वादा, 10 साल में ऐसा कहां हुआ?

Mp News Swami Avimukteshwaranand Raised Question On POK Plans News in Hindi

स्वामी
अविमुक्तेश्वरानंद


फोटो
:
अमर
उजाला

विस्तार

शंकराचार्य
स्वामी
अविमुक्तेश्वरानंद
जी
का
बयान
सामने
आया
है।
उन्होंने
कहा
है
कि
इस
चुनाव
में
उसी
को
मत
दें
जो
गाय
को
राष्ट्रमाता
घोषित
करने
का
वादा
करेगी।
साथ
ही
उत्तर
प्रदेश
के
सीएम
योगी
के
बयान
पर
कहा
कि
राम
का
आचरण
अपनाने
वाले
पर
राम
की
कृपा
होगी
और
राम
नाम
को
व्यापार
या
लाभ
का
जरिया
बनाने
वाले
पर
कृपा
नहीं
होती
है।
गौ
हत्याएं
हो
रही
है,
इससे
माना
जा
सकता
है
कि
राम
का
आचरण
सत्ता
धारियों
में
नहीं
है।

वहीं
राम
मंदिर
को
लेकर
उन्होंने
कहा
कि
कहा
जब
मंदिर
बना
ही
नहीं
तो
प्रतिष्ठा
कैसी,
अभी
मंदिर
नहीं
बना
है,
जब
मंदिर
बन
जाएगा
तब
प्राण
प्रतिष्ठा
होगी।
सरकार
से
कोई
पूछता
नहीं
कि
मंदिर
बना
नहीं
तो
प्राण
प्रतिष्ठा
कैसे
होगी।
इसके
अलावा
उन्होंने
भाजपा
द्वारा
POK
को
लेने
पर
कहा
कि
पहले
एक
के
बदले
दस
सिर
लाने
का
वादा
किया,
लेकिन
10
साल
में
ऐसा
कहां
हुआ
है।
वैसे
तो
पाकिस्तान
ही
हमारा
है,
पहले
बंटवारा
गलत
कर
दिया,
वहां
हमारे
मंदिर,
हिन्दू
सब
हैं
तो
क्यों
बांट
दिया।
पीओके
हमारा
है।
वहीं
उत्तराखंड
की
यात्रा
पर
उन्होंने
कहा
कि
श्रद्धलुओं
की
संख्या
बढ़
रही
है,
लेकिन
उत्तराखंड
सरकार
व्यवस्था
बना
नहीं
पा
रही
है।
अंतरराष्ट्रीय
स्तर
पर
युद्ध
हमने
सुना
है
कि
हमारे
पीएम
ने
दो
तीन
देशों
को
कहकर
युद्ध
बंद
करवा
दिए
हैं।

वहीं
बीजेपी
के
400
पार
वाले
नारे
पर
उन्होंने
कहा
कि
जिस
का
डंका
बज
रहा
है,
तो
543
का
नारा
देना
चाहिए
था,
उनको
पता
है
कि
143
हमको
नहीं
मिलेगा,
लक्ष्य
543
रखना
था।
वहीं
संविधान
खत्म
करने
की
बात
पर
उन्होंने
कहा
कि
संविधान
खत्म
नहीं
होगा,
संशोधन
होते
हैं।
चुनाव
कभी

हो
ऐसा
संशोधन
कैसे
हो
सकता
है।
ये
सब
डराने
के
हथकंडे
है।
वन
नेशन
वन
इलेक्शन,
सुनने
में
अच्छा
लगता
है।


विज्ञापन


विज्ञापन

इसके
साथ
उन्होंने
कहा
कि
मथुरा
की
बात
की
जाना
चाहिए,
राम

गए
हैं
तो
गौ
हत्या
बंद
होना
चाहिए,
लेकिन
हुआ
नहीं।
एक
सवाल
पर
जवाब
में
स्वामी
अविमुक्तेश्वरानंद
ने
कहा
कि
अभी
तक
देश
में
ऐसा
कोई
भी
राजनीतिक
दल
सामने
नहीं
आया
है,
जिसने
दृढ़ता
के
साथ
गो
हत्या
पर
प्रतिबंध
लगाने
की
बात
घोषणा
पत्र
में
की
हो।
सभी
दल
राजनीतिक
हथकंडे
अपनाने
के
लिए
गोमाता
को
इस्तेमाल
करते
हैं,
लेकिन
उसके
मांस
के
निर्यात
पर
रोक
नहीं
लगाते।
उन्होंने
आरोप
लगाया
कि
सरकारें
गो
मांस
निर्यात
करने
वालों
से
चंदा
लेती
है।