
धार
भोजशाला
सर्वे
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
धार
की
ऐतिहासिक
भोजशाला
में
तीसरे
दिन
भी
सर्वे
का
कार्य
जारी
रहा।
जहां
सुबह
करीब
8
बजे
सर्वे
टीम
सुरक्षा
इंतजाम
के
साथ
भोजशाला
में
पहुंची।
इस
बीच
आज
हिंदू
पक्ष
की
ओर
से
पत्रकारों
से
चर्चा
करते
हुए
विगत
दिनों
मुस्लिम
पक्ष
के
अब्दुल
समद
खान
द्वारा
मीडिया
से
बातचीत
में
कहा
गया
था
कि
भोजशाला
में
सर्वे
में
खुदाई
के
दौरान
गौतम
बुद्ध
की
मूर्ति
निकली
है,
जिसको
लेकर
उक्त
बयान
चर्चा
का
विषय
भी
बन
गया
था।
उक्त
बयान
के
बाद
अब
हिंदू
पक्षकार
और
याचिकाकर्ता
आशीष
गोयल
ने
बताया
कि
प्रतिवादी
क्रमांक
8
द्वारा
कुछ
दिनों
से
लगातार
एक
मूर्ति
निकालने
की
बात
कही
जा
रही
है।
इस
तरह
की
कंटेंप्ट
ऑफ
कोर्ट
की
बातें
हैं।
भोजशाला
सर्वे
की
गोपनीयता
भंग
करने
का
विषय
है,
आप
एएसआई
के
ऊपर
कंटेंप्ट
ऑफ
कोर्ट
का
आरोप
लगा
रहे
हैं।
न्यायालय
के
निर्देशों
की
आप
स्वयं
अवमानना
कर
रहे
हो।
भोजशाला
में
जो
वैज्ञानिक
सर्वे
चल
रहा
है,
उसकी
सारी
रिपोर्ट
एएसआई
द्वारा
कोर्ट
में
प्रस्तुत
की
जा
रही
है,
लेकिन
लगातार
मूर्ति
विषय
को
लेकर
मुस्लिम
पक्ष
द्वारा
जानकारी
सार्वजनिक
करना
न्यायालय
की
अवमानना
है।
ये
गोपनीयता
भंग
करने
का
विषय
है।
यदि
आप
सत्य
जानकारी
दे
रहे
हैं
तो
आप
कोर्ट
के
दोषी
हैं
और
असत्य
जानकारी
दे
रहे
हैं
तो
यह
समाज
प्रशासन
मीडिया
और
जनता
को
गुमराह
करना
हैं।
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विज्ञापन
भ्रामक
जानकारी
फैलाने
को
लेकर
जिला
प्रशासन
इस
मामले
को
संज्ञान
लेना
चाहिये
कि
सत्य
क्या
है।
वहीं
हिंदू
पक्ष
के
गोपाल
शर्मा
ने
भी
कहा
कि
तीसवें
दिन
का
सर्वे
का
कार्य
जारी
है,
अब
तक
जो
साक्ष्य
सामने
आए
निश्चित
ही
भोजशाला
की
गाथा
को
बताते
हैं
साथ
ही
आक्रमणकारियों
के
कर्मों
का
परिणाम
भी
साक्ष्य
के
रूप
में
भोजशाला
में
दिखाई
दे
रहा
है।
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भोजशाला
प्रथम
दृष्टिया
में
मंदिर
है,
यह
सब
ने
देखा
है
परंतु
इसे
मस्जिद
में
परिवर्तित
करने
का
कार्य
मध्यकाल
से
चल
रहा
है।
उन्हीं
से
प्रभावित
होकर
हिंदू
समाज
ने
भोजशाला
की
मुक्ति
ओर
गौरव
की
पुनर्स्थापना
को
लेकर
सतत
संघर्ष
किया
है
और
हमारे
पूर्वजों
ने
1952
में
महाराजा
भोज
उत्सव
समिति
का
पुनर्गठन
कर
राजा
भोज
मां
वाग्देवी
और
भोजशाला
को
जन
जन
तक
पहुंचने
को
लेकर
प्रयत्न
किया
था।
निश्चित
ही
हम
सफल
हुए
हैं
और
हिंदू
समाज
भोजशाला
के
विषय
में
जानने
को
लेकर
आतुर
है।
प्रतिमा
निकली
तो
सर्वे
बंद
करने
की
बात
हाईकोर्ट
में
जो
पिटीशन
दायर
हुई
थी
उसका
परिणाम
है
कि
भोजशाला
का
सत्य
सामने
आए
व
30
दिनों
में
जो
साक्ष्य
सामने
आए
हैं
निश्चित
ही
भोजशाला
अपने
मूल
स्वरूप
में
प्राप्त
होगी।
मुस्लिम
पक्षकार
अब्दुल
समद
खान
ने
कहा
कि
भोजशाला
में
गौतम
बुद्ध
की
प्रतिमा
निकली
और
कई
ऐसे
साक्ष्य
निकल
रहे
हैं
कि
उनको
लगता
है
कि
वह
यह
सर्वे
बंद
होना
चाहिए।
अभी
तक
तो
वे
सर्वे
में
साथ
दे
रहे
थे
पर
प्रतिमा
निकली
तो
सर्वे
बंद
की
बात
कर
रहे
हैं।
हम
तो
हिंदू
धर्म
से
हैं,
हम
सभी
सारे
हिंदू
धर्म
के
पंथो
को
प्रातः
स्मरण
करते
हैं।
राजा
भोज
काल
में
सारा
सनातन
धर्म
पल्लवी
था।
हम
सनातन
धर्म
की
मानते
हैं,
उन्होंने
बौद्ध
कहकर
नया
मामला
जोड़ने
की
कोशिश
की।
इसके
साथ
ही
हिंदू
धर्म
को
तोड़ने
की
कोशिश
की
है।यह
उसमें
कभी
सफल
नहीं
होंगे।
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आर्य
समाज
ने
विरोध
किया
हाईकोर्ट
के
जो
निर्देश
दिए
उस
आधार
पर
ही
सर्वे
चल
रहा
है।
जमीन
में
खुदाई
के
बगैर
कैसे
पता
चलेगा
की
भोजशाला
बिल्डिंग
की
उम्र
क्या
है।
सारे
साक्ष्य
सामने
आ
रहे
हैं,
जिससे
उन्हें
डर
लग
रहा
है।
उन्हें
उनके
खुदा
पर
ही
भरोसा
नहीं,
खुदाई
पर
ज्यादा
भरोसा
हो
गया
है
की
कही
असली
साक्ष्य
सामने
ना
आ
जाए।
वे
भोजशाला
को
मिस्ट्री
बताते
हैं
तो
जांच
में
सहयोग
करें।
साथ
ही
गोपाल
शर्मा
ने
13वीं
सदी
से
मुस्लिम
समाज
के
नमाज
पढ़ने
की
बात
पर
सवाल
उठाते
कहा
कि
1935
में
पहली
बार
राजा
की
बीमारी
के
नाम
दुआ
करने
की
परमिशन
मांगी
थी
जो
मौखिक
थी।
जिसकी
कोई
स्वीकृति
नहीं
और
दुआ
को
परंपरा
बनाने
का
प्रयत्न
किया
गया
तो
हिंदू
महासभा
ओर
आर्य
समाज
ने
विरोध
किया,
तब
तत्कालीन
राज
शासन
ने
इनकी
नमाज
दुआ
को
प्रतिबंधित
किया
और
नमाज
का
जो
भी
सामान
था
उसे
जब्त
किया
गया।
जिसके
बाद
कई
माफीनामों
के
बाद
वह
सामान
मुक्त
किए
गए।
वह
रिकॉर्ड
भी
शहर
काजी
साहब
के
पास
होगा।
पहले
ये
नमाज
तालाब
किनारे
फूटी
मस्जिद
में
पढ़ते
थे,
भोजशाला
में
नमाज
नहीं
पढ़ी
गई।
तुष्टिकरण
और
वोटों
की
राजनीति
के
चलते
80
के
दशक
में
नमाज
भोजशाला
में
प्रारंभ
हुई।
पहले
भी
कोर्ट
में
पिटीशन
में
भोजशाला
को
मां
का
मंदिर
बताया
गया
था।