
माध्यमिक
शिक्षा
मंडल
भोपाल
की
ओर
से
आयोजित
12वीं
बोर्ड
की
पूरक
परीक्षा
में
शामिल
होने
आई
17
वर्षीय
छात्रा
अंशिका
द्विवेदी
को
मामूली
सी
गलती
पर
परीक्षा
हॉल
से
निकाल
दिया
गया।
इतना
ही
नहीं
जब
वह
अपनी
व्यथा
सुनाने
जिले
के
मुखिया
के
दरवाजे
पर
दस्तक
देने
पहुंची
तो
उन्होंने
भी
कोई
मदद
या
सांत्वना
देने
के
बजाय
बुरी
तरह
से
डांट
फटकार
कर
अपने
कार्यालय
से
बाहर
भगा
दिया।
पीड़िता
को
न्याय
अथवा
परीक्षा
में
शामिल
होने
का
अवसर
देने
के
बजाय
अपमान
का
घूंट
पीने
के
लिए
विवश
कर
दिया
गया।
जिले
के
बोडरी
ग्राम
निवासी
अनिल
कुमार
द्विवेदी
की
पुत्री
अंशिका
द्विवेदी
12वीं
बोर्ड
की
परीक्षा
में
तीन
विषयों
में
अनुत्तीर्ण
हो
गई।
‘रुक
जाना
नहीं’
योजना
के
तहत
उसे
पूरक
परीक्षा
में
सम्मिलित
होकर
साल
भर
की
मेहनत
बढ़ाने
का
अवसर
शासन
द्वारा
लागू
योजना
के
तहत
मिला,
लेकिन
परीक्षा
केंद्र
में
मौजूद
परीक्षक
की
कथित
तानाशाही
ने
पीड़ित
छात्रा
का
एक
साल
तो
बर्बाद
किया
ही
उसे
अपमानित
कर
परीक्षा
केंद्र
के
बाहर
कर
दिया
गया।
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में
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सेंटर
शुरू
शहडोल
कलेक्ट्रेट
परिसर
में
अपने
पिता
के
साथ
रोती
बिलखती
पीड़ित
छात्रा
ने
बताया
की
4
जून
को
आयोजित
परीक्षा
के
दौरान
जब
उसने
उत्तर
पुस्तिका
में
अपना
रोल
नंबर
एवं
अन्य
जानकारी
भर
लिया
तभी
परीक्षक
महोदय
आए
और
पूछा
कि
कौन
से
विषय
की
परीक्षा
है।
हड़बड़ाहट
में
गलती
से
पीड़िता
ने
राजनीति
शास्त्र
कह
दिया,
जबकि
वास्तव
में
परीक्षा
अर्थशास्त्र
की
थी।
मात्र
इतनी
सी
गलती
पर
परीक्षक
महोदय
आग
बबूला
हो
उठे
और
यह
कहते
हुए
परीक्षा
हॉल
से
बाहर
निकाल
दिया।
कहा
कि
क्या
शिक्षक
तुम्हें
बताएंगे
कि
किस
विषय
की
परीक्षा
है?
पीड़िता
ने
बताया
कि
वह
उस
समय
रोती
बिलखती
अनुनय
विनय
करती
रही,
लेकिन
परीक्षक
का
दिल
नहीं
पसीना
और
अंतत
उसे
परीक्षा
से
वंचित
कर
घर
लौटने
को
मजबूर
कर
दिया
गया।
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ने
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के
साथ
किया
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का
दिया
संदेश
परीक्षा
केंद्र
में
परीक्षक
द्वारा
की
गई
कथित
ज्यादती
से
पीड़ित
छात्रा
को
उसके
पिता
साथ
लेकर
कलेक्ट्रेट
पहुंचे
और
कलेक्टर
से
शिकायत
करते
हुए
अपनी
व्यथा
सुनाने
का
प्रयास
किया,
लेकिन
आरोप
है
कि
कलेक्टर
शहडोल
ने
उनकी
बात
नहीं
सुनी।
कलेक्टर
शहडोल
से
मुलाकात
और
अपनी
व्यथा
सुना
कर
न्याय
प्राप्त
करने
में
कथित
तौर
पर
असफल
पीड़ित
छात्रा
और
उसके
पिता
परिसर
में
ही
काफी
देर
तक
जोर-जोर
से
रोते
बिलखते
रहे।
लोगों
से
मदद
की
गुहार
भी
लगाई।
कुल
मिलाकर
पीड़िता
अपने
पिता
के
साथ
आंसू
बहाते
अपने
घर
को
लौट
गई।
इस
घटना
को
देखकर
कलेक्ट्रेट
परिसर
में
मौजूद
लोगों
के
बीच
यह
चर्चा
जरूर
रही
की
परीक्षा
केंद्र
में
भले
ही
कुछ
भी
हुआ
हो
जिले
के
मुखिया
के
द्वार
पर
उसे
न्याय
नहीं
तो
कम
से
कम
सांत्वना
तो
मिलनी
ही
चाहिए
थी।
इस
मामले
में
शहडोल कलेक्टर डॉ.
केदार
सिंह
ने
बताया
कि
छात्रा
अपने
परिजन
के
साथ
आई
थी।
परीक्षा
के
दिन
आना
चाहिए
था,
लेकिन
वह
बाद
में
आई।
संबंधित
शिक्षकों
से
पूछताछ
की
गई
है।
परिजन
को
बुलाया
गया
तो
नहीं
आए।