
नव
नामांकित
होने
वाले
अधिवक्ताओं
के
लिए राहत
भरी
खबर
है।
दरअसल
पहले
नामांकित
होने
के
उपरांत
दो
वर्ष
में
ऑल
इंडिया
एग्जाम
बार
(एआईबीई)
उत्तीर्ण
करना
आवश्यक
था,
लेकिन
एसबीसी
की
मांग
पर
बीसीआई
ने नामांकित
अधिवक्ताओं
को
जारी
प्रावधिक
नामांकन
अवधि
में
एक
साल
की
बढ़ोतरी
करते
हुए
उसे
दो
की
जगह
तीन
वर्ष
कर
दिया
है।
लेकिन
उक्त
राहत
वर्ष
2022
से
नामांकित
हुए
अधिवक्ताओं
के
लिए
है।
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लाख
की
मांग
पर
कोर्ट
सख्त,
दस्तावेज
लौटाने
के
दिए
निर्देश
विज्ञापन
मप्र
राज्य
अधिवक्ता
परिषद
के
चेयरमैन
राधेलाल
गुप्ता
व
वाइस
चेयरमैन
आरके
सिंह
सैनी
ने
बताया
कि
भारतीय
विधिज्ञ
परिषद
द्वारा
जारी
अधिसूचना
12
अप्रैल
2013
में
नवीन
अधिवक्ताओं
को
दो
वर्ष
के
लिए
प्रावधिक
नामांकन
जारी
किया
जाता
था।
जिस
पर
परिषद
द्वारा
प्रावधिक
अवधि
को
दो
वर्ष
से
बढ़ाए
जाने
का
भारतीय
विधिज्ञ
परिषद
से
अनुरोध
किया
गया
था।
परिषद
के
मुद्दे
पर
विचार
विमर्श
किया
गया
एवं
बार
कौंसिल
ऑफ
इंडिया
द्वारा
वर्ष
2022
से
नामांकित
अधिवक्ताओं
को
तीन
वर्ष
के
लिए
प्रावधिक
नामांकन
जारी
किए
जाने
का
निर्णय
लिया
गया
है।
साथ
ही
भारतीय
विधिज्ञ
परिषद
द्वारा
सख्त
आदेश
भी
जारी
किए
गए
हैं
कि
इस
विस्तारित
एक
वर्ष
की
अवधि
में
भी
एआईबीई
पास
करने
में
विफल
रहते
हैं
तो
वे
अधिवक्ता
नहीं
रह
जाएंगे
और
उनका
नाम
राज्य
अधिवक्ता
परिषद
के
स्टेट
रोल
से
हटा
दिया जाएगा।
उक्त
एग्जाम
में
असफल
रहने
वाले
अधिवक्ता
अपना
व्यवसाय
पेशा
से
जुड़े
अधिकार
खो
देंगे,
जैसे
कि
अदालत
में
पेश
होने
के
दौरान
कोट,
ड्रेस,
बैंड,
गाउन
पहनने
पर
प्रतिबंध
रहेगा।
इतना
ही
नहीं
उन्हें
संघों
के
चुनावों
में
मतदान
करने
का
अधिकार
भी
नहीं
रहेगा।
इसके
साथ
ही
वे
परिषद
की
किसी
भी
कल्याणकारी
योजनाओं
का
लाभ
प्राप्त
नहीं
कर
सकेंगे।
बीसीआई
ने
अधिवक्ताओं
को
एक
अंतिम
अवसर
प्रदान
किया
है।
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गिरफ्तार
2022
के
पहले
वालों
की
होगी
सदस्यता
समाप्त
श्री
सैनी
द्वारा
अधिवक्ता
संघों
को
अवगत
कराया
गया
कि
बार
काउंसिल
ऑफ
इंडिया
द्वारा
यह
भी
निर्देश
जारी
किए
गए
हैं
कि
वर्ष
2022
के
पूर्व
नामांकित
अधिवक्ता
जिनके
द्वारा
एग्जाम
पास
नहीं
किया
गया
है,
उन
अधिवक्ताओं
की
अधिवक्ता
संघ
की
सदस्यता
समाप्त
कर
देनी
चाहिए।