नर्मदा
नदी
के
जलस्तर
में
गुरुवार
की
बारिश
के
बाद
अप्रत्याशित
रूप
से
बढ़ोतरी
देखी
गई।
क्षेत्र
में
स्थित
छोटी-बड़ी
नदियों
और
नालों
का
पानी
जब
नर्मदा
में
आकर
मिला,
तो
मां
नर्मदा
का
प्रवाह
पहले
से
कहीं
अधिक
तेज़
और
विस्तृत
दिखाई
दिया।
ओंकारेश्वर
बांध
से
निरंतर
बिजली
उत्पादन
किए
जाने
के
बावजूद
जलस्तर
को
नियंत्रण
किया
जा
रहा
है।
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2025
में
यह
पहली
बार
है
जब
नर्मदा
नदी
का
जलस्तर
इतना
अधिक
बढ़ा
है।
मौसम
विभाग
ने
आगामी
दिनों
में
पूर्वी
और
पश्चिमी
निर्माण
क्षेत्र
में
भारी
बारिश
की
चेतावनी
जारी
की
है,
जिसे
गंभीरता
से
लेते
हुए
प्रशासन
ने
संबंधित
विभागों
को
हाई
अलर्ट
पर
रखा
है।
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ये
भी
पढ़ें- नब्बे
डिग्री
का
मोड़: अमर
उजाला
संवाद
में
सीएम
ने
कहा-
खामियां
सुधारेंगे;
ऐशबाग
ब्रिज
मामले
में
अब
आगे
क्या
दो
रूपों
में
प्रकट
हुई
मां
नर्मदा
बारिश
के
बाद
नर्मदा
नदी
के
जल
में
एक
अद्भुत
दृश्य
दिखाई
दे
रहा
है।
ओंकारेश्वर
से
निकलने
वाले
पश्चिमी
हिस्से
मोरटक्का,
बड़वाह,
खेड़ी
घाट
और
नावघाटखेड़ी
में
नर्मदा
नदी
दो
भिन्न
स्वरूपों
में
बहती
नज़र
आई।
नदी
के
एक
छोर
का
जल
मठ-मेला
और
कीचड़
युक्त
दिखाई
दिया,
जो
ऊपरी
नालों,
नदियों
और
बहाव
से
आया
हुआ
गंदा
पानी
था।
वहीं
दूसरी
ओर
का
जल
अपेक्षाकृत
स्वच्छ
और
पारदर्शी
दिखाई
दिया,
जो
बांध
से
नियंत्रित
प्रवाह
के
कारण
संभव
हुआ।
यह
दृश्य
श्रद्धालुओं
और
स्थानीय
निवासियों
के
लिए
एक
अद्वितीय
प्राकृतिक
अनुभव
रहा।
प्रशासन
सतर्क
बढ़ते
जलस्तर
को
देखते
हुए
ओंकारेश्वर
और
आसपास
के
घाटों
पर
सुरक्षा
व्यवस्था
को
पुख्ता
किया
गया
है।
नदी
किनारे
चेतावनी
बोर्ड
लगाए
गए
हैं
और
नाव
संचालन
पर
भी
नियंत्रण
रखा
जा
रहा
है।
प्रशासनिक
अधिकारियों
ने
स्थानीय
निवासियों
से
अपील
की
है
कि
वे
नदी
के
अधिक
प्रवाह
वाले
क्षेत्रों
से
दूर
रहें
और
किसी
भी
आपात
स्थिति
में
प्रशासन
से
संपर्क
करें।