Guru Purnima: उज्जैन के केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में हुआ ऐसा आयोजन कि कैदी बोले- अब नहीं करेंगे अपराध

Guru Purnima: उज्जैन के केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में हुआ ऐसा आयोजन कि कैदी बोले- अब नहीं करेंगे अपराध

गुरु
पूर्णिमा
पर
केंद्रीय
भैरवगढ़
जेल
में
एक
ऐसा
आयोजन
हुआ,
जिसमें
कैदियों
ने
पहले
गुरुजनों
का
सम्मान
किया
और
उसके
बाद
अपराध
बोध
करते
हुए
यह
संकल्प
लिया
कि
अब
हम
इस
तरह
का
अपराध
कभी
नहीं
करेंगे।

केंद्रीय
भैरवगढ़
जेल
में
हुए
आयोजन
की
जानकारी
देते
हुए
इंदौर
के
कृष्णा
गुरु
जी
ने
बताया
कि
जेल
में
बंद
कैदियों
को
अपने
द्वारा
किए
गए
अपराध
का
बोध
हो
और
यह
लोग
अपराध
से
घृणा
कर
अच्छे
से
जीवन
जिएं
इसी
कामना
को
लेकर
प्रतिवर्ष
गुरु
पूर्णिमा
महोत्सव
भैरवगढ़
जेल
में
मनाया
जाता
है।
उन्होंने
बताया
कि
आयोजन
का
यह
चौथा
वर्ष
है।
गुरु
पूर्णिमा
पर
कृष्णा
गुरुजी
सोशल
वेलफेयर
सोसाइटी
के
तत्वावधान
में
सुबह
11
बजे
से
इस
कार्यक्रम
की
शुरुआत
हुई।
इसमें
सर्वप्रथम
कैदी
बंदियों
ने
गौशाला
में
सेवा
कार्य
किया।
उसके
बाद
गुरु
पूजन,
भजन
कीर्तन,
प्रवचन
के
साथ
ही
सभी
बंदियों
को
फिर
ऐसा
अपराध

करने
का
संकल्प
दिलाया
गया।
अंत
में
कृष्णा
गुरु
ने
सभी
बंदी
भाइयों
के
गले
में
महाकाल
से
अभिमंत्रित
रुद्राक्ष
की
माला
अपने
हाथों
से
उनके
गले
में
डाली।
जेल
परिसर
में
गौशाला
में बंदी
भाइयों
के
हाथ
से
गो
ग्रास
खिलवाया
एवं
अच्छे
नागरिक
बन
अपराध
जीवन
से
मुक्ति
का
संकल्प
लिया।
कार्यक्रम
में जेल
अधीक्षक
मनोज
साहू
जेलर
गोयल
डाबर
उपस्थित
थे।

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मेजबानी


सामूहिक
पूजा
का
हुआ
आयोजन

गुरुपूर्णिमा
पर
आयोजीत
कार्यक्रम
में
इंदौर
के
कृष्णा
गुरुजी
जी
उज्जैन
जेल
में
गुरुपूर्णिमा
पर
मार्गदर्शन
दिवस
मनाया।
सर्वप्रथम
सामूहिक
गुरु
पूजा
की
गई।
इसमें
बंदियों
ने
हिस्सा
लिया।
कृष्णा
गुरुजी
सोशल
वेलफेयर
के
अनिल
कुमार
सुनील
जैन, गुड्डी
जैन,
राकेश
बजाज,
तृप्ति
बजाज,
पिंकू
यादव
एवं
अशोक
गोलाने
अन्य
गणमान्य
अतिथि
मौजूद
थे।

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कृष्णा
गुरु
के
भजन
पर
छलक
आए
कैदियों
के
आंसू

कार्यक्रम
के
दौरान
कृष्णा
गुरु
ने
कहा
गुरु
पूर्णिमा
जीवन
की
पूर्णता
को
दर्शाता
है।
अपने
आप
से
बात
कर
के
देखें
आपका
गुरु
कौन
था।
कलयुग
कर्म
प्रधान
है।
गुरु
ज्ञान
का
प्रतीक
है।
जहां
अज्ञानता
होती
है
वहां
गुरु
का
होना
आवश्यक
है।
गुरुपूर्णिमा
का
कलयुग
में
क्या
महत्व
है।
गुरुपूर्णिमा
का
महत्व,
गुरुपूर्णिमा
से
जीवन
को
पूर्ण
कैसे
करें
इसका
संदेश
गुरुपूर्णिमा
पर
मार्गदर्शक
दिवस
के
रूप
में
दिया।
तेरी
करम
कहानी
तेरी
आत्मा
ही
जाने
परमात्मा
ही
जाने
भजन
पर
सभी
की
आंखें
नम
हो
गईं।
बंदी
भाइयों
की
आंखों
से
पश्चाताप
के
आंसू
छलक
पड़े।

कृष्णा
गुरुजी
ने
कहा आपके
कारावास
में
आने
का
कारण
भी
आप
स्वयं
हैं।
क्योंकि
जीवन
में
सही
मार्गदर्शन
नहीं
मिला।
कैसे
काम
क्रोध
और
बदले
के
भाव
को
अपने
विवेक
से नियंत्रित
करना नहीं
सीख
पाए।
आइए
गुरुपूर्णिमा
के
पावन
पर्व
पर
गुरु
मंत्र
की
चंटिंग
से
जीवन
को
एक
दिशा
दें।
मैं
हर
वर्ष
आपके
बीच
गुरु
पूर्णिमा
पर
आपके
बीच
आता
हूं
और
आपसे
बात
कर
गान,
ज्ञान,
ध्यान
से
आपके
विवेक
को
जगाता
हूं,
ताकि
आगे
का
जीवन
जब
तक
कारावास
में
है
अनुशासन
में
जीवन
जिएं
और
बाहर
मैं
आपका
इंतजार
करूंगा। 

कृष्णा गुरु जी

जेल
में
कैदियों
को
आशीर्वाद
देते
कृष्णा
गुरुजी

कृष्णा गुरु जी

कैदियों
ने
कृष्णा
गुरुजी
की
बातों
को
शांति
पूर्वक
सुना
और
जीवन
में
उतारने
का
प्रण
भी
लिया। 

कृष्णा गुरु जी

गायों
को
भोजन
कराते
कृष्णा
गुरुजी