
उज्जैन
यातायात
पुलिस
इन
दिनों
बिना
अनुमति
के
वाहनों
में
हूटर
लगाकर
रौब
झाड़ने
वालों
के
खिलाफ
सख्त
कार्रवाई
करती
नजर
आ
रही
है।
इस
तरह
के
अभियान
वैसे
तो
पहले
भी
कई
बार
चलाए
गए,
लेकिन
इस
बार
यातायात
पुलिस
कुछ
सख्त
नजर
आ
रही
है।
यही
कारण
है
कि
चेकिंग
के
दौरान
27
वाहनों
की
जांच
की
गई,
जिसमें
से
5
कारों
में
अवैध
रूप
से
लगे
हूटर
पाए
गए
और
कड़ी
कार्रवाई
की
गई
है।
कार्रवाई
की
जानकारी
देते
हुए
डीएसपी
विक्रम
सिंह
ने
बताया
कि
वाहनों
पर
कई
लोग
बिना
आवश्यक
पात्रता
के
हूटर
लगाकर
निकलते
हैं,
जिनकी
शिकायत
काफी
समय
से
मिल
रही
थी।
हमने
अवैध
रूप
से
हूटर
लगाने
वालों
के
खिलाफ
एक
सर्चिंग
अभियान
चलाया
और
इसमें
प्रभावी
कार्रवाई
की
है।
उन्होंने
बताया
कि
अवैध
हूटर
वाले
वाहनों
से
3,000
रुपये
प्रति
वाहन
के
हिसाब
से
कुल
15,000
रुपये
का
जुर्माना
वसूला
गया।
सतत
चलेगा
अभियान
डीएसपी
ने
स्पष्ट
किया
कि
इस
तरह
की
कार्रवाई
आगे
भी
जारी
रहेगी,
ताकि
सड़क
पर
अनुशासन
और
सुरक्षा
बनी
रहे।
अभी
हूटर
लगे
वाहनों
पर
कार्रवाई
हो
रही
है,
लेकिन
जल्द
ही
फ्लैश
लाइट
और
गलत
नंबर
प्लेट
लगाकर
घूमने
वाले
वाहनों
पर
भी
अभियान
चलाया
जाएगा।
इनको
है
अधिकार
कानून
की
बात
करें
तो
जनप्रतिनिधियों
को
भी
अपने
वाहन
में
हूटर,
सायरन
लगाने
का
अधिकार
नहीं
है।
हूटर
का
इस्तेमाल
सिर्फ
फायर
ब्रिगेड
के
वाहन,
एंबुलेंस
एवं
पुलिस
के
वाहन
में
ही
हो
सकता
है।
इसके
बावजूद
जिला
मुख्यालय
व
जिले
में
दिनभर
हूटर
लगे
वाहन
धड़ल्ले
से
घूमते
देखे
जा
सकते
हैं।
इनमें
विधायक,
उनके
रिश्तेदार
और
कई
पार्टी
नेता
भी
अपना
दबदबा
बनाने
के
लिए
हूटर
बजाते
घूमते
नजर
आते
हैं।
इन
नियमों
का
करना
है
पालन
मोटरयान
अधिनियम,
1988
की
धारा
212
के
तहत
1994
में
और
फिर
9
जुलाई
2013
को
संशोधन
कर
उपनियम
स्थापित
किए
गए
हैं।
इसके
तहत
किसी
भी
अग्निशमन
यान
(फायर
ब्रिगेड
के
वाहन)
के
चालक
को
आग
बुझाने
के
लिए
जाते
समय
हूटर
बजाने
का
अधिकार
है।
एंबुलेंस
चालक
को
गंभीर
मरीज
को
उपचार
के
लिए
ले
जाते
समय
ही
हूटर
बजाने
की
अनुमति
है।
राज्यपाल,
मुख्यमंत्री,
उच्च
न्यायालय
के
मुख्य
न्यायाधीश
या
राज्य
विधानसभा
के
एस्कॉर्टिंग
में
लगे
सुरक्षा
वाहन
हूटर
का
उपयोग
कर
सकते
हैं।
सेना,
पुलिस,
कार्यपालिक
दंडाधिकारी
के
वाहन
चालक
कानून-व्यवस्था
की
स्थिति
बनने
पर
हूटर,
सायरन
का
उपयोग
कर
सकते
हैं।
इनके
अतिरिक्त
किसी
भी
वाहन
में
लगा
हूटर,
सायरन
अवैध
है।