Damoh News: संघर्षों से मिली दमोह-भोपाल राज्यरानी एक्सप्रेस को वाराणसी से चलाने की तैयारी, बढ़ जाएगी परेशानी

Damoh News: संघर्षों से मिली दमोह-भोपाल राज्यरानी एक्सप्रेस को वाराणसी से चलाने की तैयारी, बढ़ जाएगी परेशानी
Preparations to run Damoh Bhopal Rajyarani Express from Varanasi met with struggles

दमोह
भोपाल
राज्यरानी
एक्सप्रेस

विस्तार

दमोह
से
भोपाल
तक
चलने
वाली
राज्यरानी
एक्सप्रेस
को
जनता
की
लाइफलाइन
कहा
जाता
है।
अब
ऐसा
लगता
है
कि
रेलवे
अधिकारी
इस
ट्रेन
से
लाइफलाइन
का
दर्जा
छीनने
का
प्रयास
कर
रहे
हैं।
इसे
वाराणसी
से
चलाने
की
तैयारी
की
जा
रही
है।
यह
ट्रेन
काफी
संघर्षों
के
बाद
दमोहवासियों
को
मिली
थी।
कुछ
सांसदों
ने
रेल
मंत्रालय
को
यह
प्रस्ताव
भेजा
था,
जिसके
बाद
यह
प्रक्रिया
आगे
बढ़ी
है।

पश्चिम
मध्य
रेलवे ने
दमोह-भोपाल
राज्यरानी
ट्रेन
को
गाड़ी
संख्या
13346/13345
सिंगरौली-
वाराणसी
एक्सप्रेस
में
जोड़कर
नई
ट्रेन
बनाकर
चलाने
का
प्रस्ताव
तैयार
कर
रेल
मंत्रालय
को
भेजा
है।
इसमें
इस
ट्रेन
को
दमोह
की
जगह
वाराणसी
से
चलाने
की
बात
कही
गई
है।
अब
केवल
इस
ट्रेन
को
शुरू
कराने
के
आदेश
बाकी
है।
लोकसभा
चुनाव
की
आचार
संहिता
के
समाप्त
होते
ही
इस
संबंध
में
आदेश
जारी
होने
की
संभावना
है। इस
ट्रेन
के
दमोह

सागर
जिले
से
छिनने
से
इन
दोनों
जिलों
की
आम
जनता
को
भोपाल
तक
की
रेल
यात्रा,
ट्रेन
की
लेटलतीफी
से
जूझना
पड़ेगा।
जब
यह
ट्रेन
बनारस
और
सिंगरौली
से
आएगी
तो
दमोह
की
जनता
को
बैठने
के
लिए
भी
जगह
नहीं
मिलेगी।
रिजर्वेशन
भी
मुश्किल से
मिलेगा।
दूसरी
ओर
सिंगरौली
रूट
से
सबसे
अधिक
मालगाड़ियों
से
कोयले
की
ढुलाई
होती
है।
इस
रूट
की
अधिकांश
ट्रेन
देरी
से
निकलती
हैं।


प्रदेश
की
राजधानी
को
जोड़ती
है
ट्रेन

प्रदेश
की
राजधानी
भोपाल
को
सीधे
जोड़ने
वाली
राज्यरानी
एक्सप्रेस
दमोह
से
चलकर
पथरिया,
गणेशगंज,
मकरोनिया,
सागर,
खुरई,
बीना,
मंडीबामोरा,
गंजबासोदा,
विदिशा
से
होकर
भोपाल
पहुंचती
है।
यह
ट्रेन
सुबह
5.30
बजे
दमोह
से
चलकर
सुबह
10.30
बजे
भोपाल
पहुंच
जाती
है।
उसी
दिन
शाम
5.30
बजे
भोपाल
से
रवाना
होती
है
जो
रात
10.30
बजे
दमोह

जाती
है।
इस
ट्रेन
से
ज्यादातर
लोग
इलाज
के
लिए
भोपाल
जाते
हैं।
व्यापारी,
शासकीय
कर्मचारी
एवं
आम
आदमी
के
लिए
भी
यह
ट्रेन
सबसे
अधिक
सुविधाजनक
है।
दमोह
से
बनने
की
वजह
से
इस
ट्रेन
में
सीट
को
लेकर
मारामारी
नहीं
होती।
यदि
यह
ट्रेन
दमोह
से
छिन
जाएगी
तो
हजारों
लोगों
को
भोपाल
की
यात्रा
करने
में
परेशानी
होगी।


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संघर्ष

आंदोलन
के
बाद
मिली
थी
ट्रेन

दमोह
एवं
सागर
जिले
के
लोगों
ने
वर्ष
2011
में
किए
संघर्ष

आंदोलन
के
बाद
राज्यरानी
की
सौगात
मिली
थी।
इस
ट्रेन
के
लिए
दमोह
जिले
के
समाजसेवियों,
अधिवक्ताओं,
राजनेताओं, 
व्यापारियों
ने
संयुक्त
रूप
से
आंदोलन
किया
था।
20
अगस्त
2011
को
तत्कालीन
दमोह
लोकसभा
सांसद
शिवराज
सिंह
लोधी
के
नेतृत्व
में
रेल
रोको
आंदोलन
हुआ
था।
दमोह-कटनी
रेल
रूट
की
ट्रेनों
को
आठ
घंटे
रोका
गया
था।
उसके
परिणामस्वरूप
12
साल
पहले
15
सितंबर
2011
को
इस
ट्रेन
की
शुरूआत
हुई
थी। 


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केवल
दो
ट्रेन
का
था
सहारा

वर्ष
2010-11
में
बीना-
सागर-
दमोह-
कटनी
रेल
खंड
से
होकर
रेवांचल
एक्सप्रेस
और
बिलासपुर
पैसेंजर
केवल
दो
ही
ट्रेनें
चलती
थीं।
रेवांचल
एक्सप्रेस
रीवा,
सतना
से
इतनी
भरी
आती
थी
कि
उसमें
खड़े
होने
की
भी
जगह
नहीं
मिल
पाती
थी।
इस
ट्रेन
को
लेकर
लोगों
ने
आंदोलन
किया
था।
बिलासपुर
पैसेंजर
लेट
चलती
है।
इससे
राज्यरानी
एक्सप्रेस
सबसे
अच्छी
ट्रेन
साबित
हुई।


ऐसी
रहेगी
प्रस्तावित
नई
ट्रेन

रेलवे
के
आदेश
के
अनुसार
नई
वाराणसी-भोपाल
एक्सप्रेस
ट्रेन
में
कुल
16
डिब्बे
होंगे।
इसमें
12
डिब्बे
जनरल

4
मेमू
ट्रेन
की
बोगी
रहेंगी।
यह
ट्रेन
भोपाल
से
कटनी
रूट
पर
75
किमी
की
रफ्तार
से
दौड़ेगी,
जबकि
कटनी
से
चापन,
सिंगरौली
होकर
60
किमी
की
रफ्तार
से
दौड़ेगी।
महत्वपूर्ण
बात
तो
यह
है
कि
दमोह
से
वाराणसी
के
बीच
पहले
से
ही
पांच
ट्रेनें
चल
रहीं
हैं।
इनमें
से
किसी
एक
ट्रेन
को
वाराणसी
से
भाेपाल
के
लिए
चलाया
जा
सकता
है।
दमोह
से
सिंगरौली
के
बीच
भी
छह
ट्रेनें
चल
रहीं
हैं।
इसके
बावजूद
भी
राज्यरानी
को
दमोह
से
छीनने
का
प्रयास
किया
जा
रहा
है।


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एक
बार
फिर
करेंगे
आंदोलन

रेल
संघर्ष
समिति
सदस्य
सुरेंद्र
दवे
का
कहना
है
कि
दमोह-भोपाल
राज्यरानी
ट्रेन
दमोहवासियों
की
लाइफलाइन
है।
पता
चला
है
कि
रेलवे
इस
ट्रेन
को
छीनकर
दमोह
की
जगह
वाराणसी
से
चला
रहा
है।
ऐसे
में
दमोह

सागर
जिले
की
आमजनता
को
खासी
मुसीबत
झेलनी
पड़ेगी।
साथ
ही
दमोह
का
नाम
रेलवे
की
राष्ट्रीय
टाइम
टेबिल
से
गायब
हो
जाएगा।
हम
रेलवे
से
इस
ट्रेन
के
आदेश
को
वापस
लेने
की
मांग
उठाएंगे।  


अभी
फाइनल
नहीं
है

पश्चिम
मध्य
रेल
जबलपुर
जोन
के
पीआरओ
हर्षित
श्रीवास्तव
ने
कहा
कि
आम
जनता
की
सुविधा
के
लिए
रेलवे
ने
प्रस्ताव
बनाकर
मंत्रालय
भेजा
है।
अभी
कुछ
फाइनल
नहीं
है
कि
इस
ट्रेन
को
दमोह
की
जगह
वाराणसी
से
चलाया
जा
रहा
है।
आमजन
के
हित
को
देखकर
ही
रेलवे
इस
तरह
के
निर्णय
लेता
है।