Railway News: कटनी के हटेगी तीन स्टेशन, पांच दिशाएं जोड़ने वाली डायमंड क्रॉसिंग, नई रणनीति से होगा संचालन


जबलपुर
रेल
मंडल
ने
कटनी
में
अंग्रेजों
के
जमाने
की
डायमंड
क्रॉसिंग
तकनीक
को
हटाने
का
निर्णय
लिया
है।
डायमंड
क्रॉसिंग
सिस्टम
उन
दिनों
की
उन्नत
तकनीकों
में
शुमार
था,
जहां
एक
साथ
दो
ट्रेनें
अलग-अलग
स्थानों
के
लिए
रवाना
हो
जाया
करती
थीं,
लेकिन
बदलते
वक्त
के
अनुसार
अब
इसे
हटाया
जा
रहा
है।

मध्यप्रदेश
के
कटनी
जिले
का
रेलवे
जंक्शन

केवल
इतिहास
के
पन्नों
में
दर्ज
है,
बल्कि
आज
भी
रणनीतिक
रूप
से
देश
के
सबसे
व्यस्त
रेल
मार्गों
में
शुमार
है।
कटनी
जिले
में
तीन
प्रमुख
स्टेशन
शामिल
हैं,
जहां
से
पांच
दिशाओं
में
ट्रेनें
संचालित
होती
हैं,
जिनमें
बीना,
प्रयागराज,
मुंबई,
बिलासपुर
और
जबलपुर
जैसे
बड़े
रेल
मार्ग
शामिल
हैं।
यही
वजह
है
कि
यहां
यात्री
और
मालगाड़ियों
की
अत्यधिक
आवाजाही
रहती
है।

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दौर,
आज
प्रदेश
के
36
जिलों
में
अलर्ट

कटनी
जंक्शन
पर
सन्
1970
के
दशक
में
लगी
डायमंड
क्रॉसिंग
कभी
तकनीकी
चमत्कार
मानी
जाती
थी,
जो
दो
ट्रेनों
को
एक
साथ
क्रॉस
करने
की
सुविधा
देती
थी,
जिससे
स्टेशन
के
प्लेटफार्मों
और
रेल
यातायात
पर
दबाव
कम
होता
था।
लेकिन
अब
रेलवे
के
पास
तीन
विकसित
स्टेशन
हैं,
जिससे
संचालन
पहले
से
कहीं
अधिक
सुव्यवस्थित
हो
गया
है।

रेल
अधिकारी
बताते
हैं
कि
पहले
सभी
ट्रेनें
कटनी
मुख्य
स्टेशन
से
ही
संचालित
होती
थीं,
लेकिन
ट्रैफिक
बढ़ने
और
संचालन
को
सुचारू
बनाने
के
लिए
रेलवे
ने
यहां
कटनी
साउथ
स्टेशन
और
कटनी
मुड़वारा
का
निर्माण
करवाया।
अब
तीनों
स्टेशनों
के
जरिए
कटनी
जिला
पांच
दिशाओं
में
रेल
यातायात
को
जोड़ता
है।
इसलिए
रेलवे
प्रशासन
अब
इस
पुरानी
डायमंड
क्रॉसिंग
को
हटाने
की
तैयारी
में
जुटा
है।

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से
ज्यादा
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सफर

जबलपुर
रेल
मंडल
के
एडीआरएम
आनंद
कुमार
ने
बताया
कि
जहां-जहां
पहले
दो
रेल
लाइनें
एक-दूसरे
को
काटती
थीं,
वहां
डायमंड
क्रॉसिंग
लगाई
जाती
थी।
लेकिन
अब
सिंगल
पॉइंट
इंटरचेंज
सिस्टम
ज़्यादा
कारगर
है,
जिससे
समय
और
संसाधनों
की
बचत
होती
है।
कटनी
जंक्शन
की
डायमंड
क्रॉसिंग
पुरानी
हो
चुकी
है,
और
उसे
हटाकर
संचालन
को
और
तेज़
और
सुरक्षित
बनाया
जाएगा।
इस
बदलाव
से
यात्रियों
को
समयबद्धता,
बेहतर
सुविधा
और
कम
पावर
शिफ्टिंग
का
लाभ
मिलेगा।
साथ
ही
सुरक्षा
मानकों
में
भी
इजाफा
होगा।