
भोपाल
में
मिठाई
की
दुकानों
पर
इन
दिनों
मांग
तेज
हो
गई
है।
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
अकीदत
और
इबादत
का
महीना
रमजान
अपने
अंतिम
पड़ाव
पर
पहुंच
गया
है।
पूरे
माह
के
रोजे
और
नमाज
के
बदले
अल्लाह
तआला
ने
ईद
की
खुशियां
देने
का
वादा
किया
है।
इसी
लिहाज
से
माह
ए
रमजान
पूरा
होने
पर
ईद
उल
फितर
का
त्यौहार
मनाया
जाता
है।
खुशियों
से
दमकते,
खुशबू
से
महकते
और
दिल
में
अपने
खुदा
के
लिए
शुक्रिया
का
भाव
लिए
लोग
ईदगाह
पहुंचते
हैं।
नमाज
अदा
करने
के
बाद
लौटते
हुए
लोगों
का
कब्रिस्तान
जाकर
अपने
मरहुमीन
(दिवंगतों)
के
लिए
उनकी
मगफिरत
(मोक्ष)
की
दुआएं
करने
का
रिवाज
है।
भोपाल
में
परंपरा
यह
भी
है
कि
घरों
को
लौटते
हुए
अपनों
के
लिए
तरह
तरह
की
मिठाइयां
भी
लेकर
पहुंचते
हैं।
नमाज
ए
ईद
अदा
करने
के
लिए
लोग
घरों
से
निकलते
हैं
तो
वे
सारे
रास्ते
जिक्र
ए
इलाही
(ईश
स्मरण)
करते
हुए
जाते
हैं।
नमाज
से
पहले
उलेमाओं
की
विशेष
तकरीर
और
बाद
में
ईद
का
खास
खुतबा
(धार्मिक
प्रवचन)
सुनने
के
बाद
दुआ
ए
खास
में
शिरकत
होती
है।
इसके
बाद
गले
लगकर
एक
दूसरे
को
मुबारकबाद
देने
का
सिलसिला
चलता
है।
इन
सबसे
फारिग
होकर
जब
लौटते
हैं
तो
उनका
रुख
उन
कब्रिस्तानों
की
तरफ
होता
है,
जहां
उनके
अपने
दफन
हैं।
यहां
वे
अपने
मरहूमीन
को
खिराज
ए
अकीदत
(श्रद्धांजलि)
पेश
करते
हैं।
फूल
और
फातेहा
के
साथ
वे
अपने
दिवंगतों
की
मगफिरत
की
दुआ
करते
हैं।
इस्लामी
मान्यता
के
मुताबिक
दुनिया
से
रुखसत
हो
चुके
लोग
ऐसे
खास
मौकों
पर
अपनों
के
आने,
उनकी
दुआओं
और
खिराज
की
राह
तकते
हैं।
इसी
मान्यता
के
साथ
लोग
कब्रिस्तान
तक
जाते
हैं।
हर
ओर
मिठाइयों
की
महक
राजधानी
भोपाल
में
ईदगाह
से
घर
लौटते
हुए
लोगों
का
अपने
घरों
पर
मिठाइयां
ले
जाने
का
भी
रिवाज
है।
सैवय्यां
और
शीर
खुरमा
जैसे
डिशेज
बनने
के
चलते
ईद
उल
फितर
को
मीठी
ईद
का
नाम
दे
दिया
गया
है।
शायद
इसी
धारणा
को
मिठाइयों
से
जोड़ते
हुए
नमाज
के
बाद
घरों
पर
मिठाई
साथ
ले
जाने
का
रिवाज
भी
बना
लिया
गया।
बड़ी
तादाद
में
लोगों
के
ईदगाह
और
अन्य
मस्जिदों
में
नमाज
पढ़ने
जाने
के
अवसर
को
देखते
हुए
शहरभर
में
बड़ी
संख्या
में
अस्थाई
मिठाई
दुकानें
भी
सज
जाती
हैं।
नए
जोड़े
भी
पहुंचते
हैं
मिठाई
लेकर
ईद
से
पहले
शादी
के
बंधन
में
बंधे
नए
जोड़ों
का
भी
ईद
के
वक्त
अपने
परिवार,
रिश्तेदारों,
सगे
संबंधियों
से
मिलने
जाने
और
उनको
मुबारकबाद
देने
का
रिवाज
भी
है।
ये
जोड़े
अपने
साथ
मिठाइयां
और
बच्चों
के
लिए
ईदी
भी
लेकर
पहुंचते
हैं।
घर
के
बड़े
इन
जोड़ों
को
ईदी,
तोहफे
और
दुआएं
देकर
नवाजते
हैं।
चलेगा
मुलाकात
और
दावतों
का
दौर
वैसे
तो
ईद
उल
फितर
का
त्यौहार
महज
एक
दिन
का
होता
है।
लेकिन
इसकी
खुशियां
हफ्तेभर
से
ज्यादा
फैली
दिखाई
देती
हैं।
एक
दूसरे
से
मुलाकात,
ईद
की
मुबारकबाद
का
सिलसिला
जारी
रहता
है।
इस
बीच
अपनों
से
खुशियां
बांटने
के
लिए
दावतों
का
सिलसिला
भी
चलता
रहता
है।
सोशल
मीडिया
ने
खत्म
किए
रिवाज
कई
ईद
उल
फितर
पर
एक
दूसरे
को
मुबारकबाद
देने
के
रिवाज
में
किसी
जमाने
में
चिट्ठी
पत्री
और
ग्रीटिंग
कार्ड्स
का
समावेश
हुआ
करता
था,
लेकिन
पहले
फोन
की
आमद
ने
इस
सिलसिले
को
कुछ
कम
किया।
इसके
बाद
सोशल
मीडिया
के
दौर
ने
मुबारकबाद
के
तरीके
को
पूरी
तरह
बदल
दिया
है।
सोशल
मीडिया
के
विभिन्न
प्लेटफॉर्म
पर
लोग
एक
दूसरे
को
मुबारकबाद
देकर
इस
रस्म
को
अदा
कर
लेते
हैं।
विज्ञापन
(भोपाल
से
खान
आशु
की
रिपोर्ट)