
रीवा
कोर्ट
ने
2006
गोविंदगढ़
बस
हादसे
में
फैसला
सुनाते
हुए
बस
मालिक
और
दो
कंडक्टरों
को
सबूतों
के
अभाव
में
बरी
कर
दिया
है।
18
साल
पहले
इस
हादसे
में
60
से
अधिक
लोगों
की
मौत
हो
गई
थी,
जिनमें
बस
चालक
भी
शामिल
था।
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19
अक्तूबर
2006
को
जिगना
से
रीवा
जाते
समय
एक
निजी
यात्रियों
से
भरी
बस
गोविंदगढ़
तालाब
में
गिर
गई
थी।
इस
दर्दनाक
हादसे
में
चालक
समेत
60
से
अधिक
यात्रियों
की
जान
चली
गई
थी।
इस
मामले
में
बस
मालिक
अजय
प्रताप
सिंह
(52),
तथा
कंडक्टर
रमेश
तिवारी
(42)
और
श्रीनिवास
तिवारी
(60)
को
आरोपी
बनाया
गया
था।
मामले
की
सुनवाई
करते
हुए
मुख्य
न्यायिक
मजिस्ट्रेट
(प्रथम
श्रेणी)
पन्ना
नागेश
की
अदालत
ने
फैसला
सुनाया।
विज्ञापन
ये
भी
पढ़ें- मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
की
सख्त
कार्रवाई,
दो
एसपी
और
चंबल
रेंज
के
IG-DIG
को
हटाने
के
निर्देश
तीनों
आरोपियों
को
भारतीय
दंड
संहिता
(IPC)
और
मोटर
वाहन
अधिनियम
(MV
Act)
के
तहत
दर्ज
आरोपों
से
बरी
किया
गया।
कोर्ट
ने
माना
कि
प्रासीक्यूशन
यह
साबित
नहीं
कर
सका
कि
बस
को
तेज़
या
लापरवाही
से
चलाया
गया
था।
चूंकि
चालक
की
मौके
पर
ही
मौत
हो
गई
थी,
इसलिए
यह
भी
सिद्ध
नहीं
हो
सका
कि
दुर्घटना
के
समय
बस
अनियमित
रूप
से
चलाई
जा
रही
थी
या
उसमें
कोई
तकनीकी
खामी
थी।
आरोपियों
के
वकील
राजीव
सिंह
शेरा
ने
बताया,
“प्रशासन
यह
साबित
नहीं
कर
पाया
कि
बस
के
पास
फिटनेस
सर्टिफिकेट
या
वैध
परमिट
था
या
नहीं।
ऐसे
में
कोर्ट
ने
सभी
आरोपियों
को
संदेह
का
लाभ
देते
हुए
बरी
कर
दिया।