
परिवहन
विभाग
के
पूर्व
आरक्षक
सौरभ
शर्मा
करोड़ों
रुपये की
अवैध
कमाई
के
मामले
में
भ्रष्टाचार
की
छापेमारी
की
जद
में
आए
थे। लेकिन
लोकायुक्त
पुलिस
तीन
महीने
में
उसके
खिलाफ
कोर्ट
में
चालान
प्रस्तुत
नहीं
कर
पाई।
तीन
महीने
में
चालान प्रस्तुत
नहीं
कर
पाने
पर
अदालत
ने
हैरानी
जताई
और
मुख्य
आरोपी
सौरभ
शर्मा,
उसके
राजदार
और
बिजनेस
पार्टनर
चेतन
सिंह
गौर
और
शरद
जायसवाल
को
जमानत
दे
दी
है।
विज्ञापन
Trending
Videos
दरअसल,
किसी
भी
जांच
एजेंसी
को
कार्रवाई
के
तीन
महीने
के
अंदर
अदालत
में
चालान
प्रस्तुत
करना
होता
है।
ऐसा
नहीं
करने
पर
अदालत
को
बताना
होता
है
कि
जांच
में
किन-किन
बिंदुओं
पर
जानकारी
जुटाई
जा
रही
है
या
तकनीकी
साक्ष्य
या
किसी
लैब
की
रिपोर्ट
आने
में
समय
लग
रहा
है।
लेकिन
लोकायुक्त
पुलिस
ने
परिवहन
विभाग
के
चेक
पोस्टों
से
करोड़ों
की
अवैध
कमाई
के
सरगना
के
रूप
में
सामने
आए
सौरभ
शर्मा
और
उसके
राजदारों
के
संबंध
में
ऐसी
कोई
दलील
अदालत
के
समक्ष
प्रस्तुत
नहीं
कि जिससे
अदालत
जमानत
की
याचिका
खारिज
कर
सके।
विज्ञापन
यह
भी
पढ़ें: मध्यप्रदेश
के
10
लोगों
की
मौत,
बुधवार
को
शव
पहुंचेगा
देवास
क्या
है
पूरा
मामला
जानकारी
के
अनुसार,
18
दिसंबर
2024
को
लोकायुक्त
पुलिस
ने
परिवहन
विभाग
के
पूर्व
आरक्षक
सौरभ
शर्मा और
उसके
राजदारों
व
बिजनेस
पार्टनर
चेतन
सिंह
गौर
और
शरद
जायसवाल
के
भोपाल
व
अन्य
ठिकानों
पर
छापेमारी
कर
करोड़ों
की
संपत्ति
बरामद
की
थी।
इसके
बाद
19-20
दिसंबर
की
दरमियानी
रात
ही
आयकर
विभाग
की
टीम
ने
रातीबड़
क्षेत्र
में
स्थित
मेंडोरा
के
जंगल
में
बने
एक
फार्म
हाउस
में
लावारिस
हालत
में
खड़ी
इनोवा
से
करीब
54
किलोग्राम
सोना
और
दस
करोड़
से
अधिक
की
नकदी
बरामद
की
थी।
इसके
बाद
आयकर
विभाग
भी
सौरभ
शर्मा
और
उसके
साथियों
के
खिलाफ
जांच
शुरू
की
और
रिमांड
पर
लेकर
पूछताछ
भी
की
है।
इस
बीच
27
दिसंबर
को
प्रवर्तन
निदेशालय
(ईडी)
ने
भी
सौरभ
शर्मा
और
उसके
करीबियों
के
भोपाल,
ग्वालियर
और
जबलपुर
स्थित
ठिकानों
पर
छापा
मारा
था
और
फिर
कोर्ट
से
रिमांड
पर
लेकर
पूछताछ
भी
की
है।
यह
भी
पढ़ें: प्रदेश
का
बदला
मौसम,
तापमान
में
7.8
डिग्री
की
गिरावट,दिन
में
छाए
रहे
बादल,ओले-बारिश
का
अलर्ट
फिलहाल
तीनों
जेल
में
ही
रहेंगे
लोकायुक्त
द्वारा
भ्रष्टाचार
निवारण
अधिनियम
के
तहत
दर्ज
किए
गए
प्रकरण
में
भले
जी
चालान
प्रस्तुत
नहीं
कर
पाने
के
कारण
लोकायुक्त
के
विशेष
न्यायाधीश
राम
प्रताप
मिश्र
की
अदालत
ने
सौरभ
शर्मा,
चेतन
सिंह
गौर
और
शरद
जायसवाल
को
हमानत
दे
दी
हो। लेकिन
प्रवर्तन
निदेशालय
द्वारा
दर्ज
किए
गए
प्रकरण
में
तीनों
आरोपी
हैं
और
तीनों
को
जेल
में
ही
रहना
होगा।
जब
तक
ईडी
द्वारा
दर्ज
प्रकरण
में
भी
जमानत
नहीं
मिलती। सौरभ
शर्मा,
चेतन
सिंह
गौर
और
शरद
जायसवाल
भोपाल
केंद्रीय
जेल
में
ही
बंद
रहेंगे।
54
किलो
सोना
और
दस
करोड़
से
अधिक
नकदी
किसकी,
स्पष्ट
नहीं
मध्यप्रदेश
लोकायुक्त
पुलिस,
प्रवर्तन
निदेशालय
और
आयकर
विभाग
द्वारा
अलग-अलग
पूछताछ
में
भी
तीनों
में
से
किसी
ने
यह
स्वीकार
नहीं
किया
कि
इनोवा
में
मिला
54
किलोग्राम
सोना
और
दस
करोड़
से
अधिक
की
नकदी
मेरी
है।
हालांकि,
जांच
एजेंसियों
का
दावा
है
कि
यह
संपत्ति
भी
सौरभ
शर्मा
की
है, जिस
दिन
सौरभ
शर्मा
के
यहां
लोकायुक्त
पुलिस
ने
छापा
मारा,
उसी
दिन
यह
इनोवा
अरेरा
कॉलोनी
से
निकलकर
मेंडोरा
पहुंची
थी।
इनोवा
भी
सौरभ
के
बिजनेस
पार्टनर
चेतन
सिंह
गौर
की
है।
उसने
स्वीकार
भी
किया
है
कि
इनोवा
का
उपयोग
सौरभ
शर्मा
के
कार्यालय
में
होता
था
और
उसकी
किश्तें
भी
सौरभ
के
कार्यालय
से
जाम
किया
जाता
था।
यह
भी
पढ़ें: रूस
के
युवक
ने
ओरछा
में
कराई
सत्यनारायण
की
कथा,
मनाया
जन्मदिन
हालांकि,
आयकर
विभाग
अब
उक्त
सोना
और
नकदी
की
अप्रेजल
रिपोर्ट
बनाकर
सरकारी
खजाने
में
जमा
कराने
की
तैयारी
में
है। क्योंकि
यह
कोई
भी
जांच
एजेंसी
यह
स्टेबलिस
नहीं
कर
पा
रहे
कि
इनोवा
से
बरामद
सोना
और
नकदी
सौरभ
शर्मा
की
है
या
उसके
किसी
राजदार
की
है।