
जायद
फसल
मूंग
की
खरीदी
न्यूनतम
समर्थन
मूल्य
पर
किए
जाने
के
निर्णय
के
बाद
बीते
19
जून
से
पंजीयन
की
प्रक्रिया
चल
रही
है।
7
जुलाई
से
मूंग
खरीदी
का
दौर
शुरू
हो
जाएगा।
इस
वर्ष
संपूर्ण
प्रदेश
में
3
लाख
51
हजार
मैट्रिक
टन
मूंग
केंद्र
सरकार
द्वारा
खरीदा
जाना
प्रस्तावित
किया
गया
है।
हालांकि,
अब
तक
शासन
द्वारा
उपार्जन
नीति
को
स्पष्ट
नहीं
किया
गया,
जिससे
किसान
असमंजस
में
हैं
कि
सरकार
प्रति
एकड़
कितने
क्विंटल
मूंग
की
खरीदी
उनसे
करेगी।
बावजूद
इसके
अब
किसानों
को
मूंग
उपार्जन
का
इंतजार
बना
हुआ
है।
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उप
संचालक
कृषि
विभाग
से
प्राप्त
आंकड़ों
के
अनुसार
संपूर्ण
जिलेभर
में
28
हजार
से
अधिक
किसानों
ने
अब
तक
समर्थन
मूल्य
पर
मूंग
का
विक्रय
करने
के
लिए
पंजीयन
करा
लिया
है।
बता
दें
कि
बीते
वर्ष
2024-25
में
जिलेभर
के
26,022
किसानों
से
शासन
ने
71,734
मैट्रिक
टन
मूंग
का
उपार्जन
किया
था,
जिसमें
किसानों
को
613
करोड़
रुपए
का
भुगतान
किया
गया
था।
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दरअसल,
कम
समय
में
अधिक
मुनाफा
देने
वाली
ज़ायद
फसल
मूंग
की
कटाई
के
बाद
से
ही
इसे
समर्थन
मूल्य
पर
विक्रय
करने
के
लिए
किसान
इंतजार
कर
रहे
थे,
लेकिन
इसी
बीच
सरकार
द्वारा
खरीदी
से
यह
कहकर
इनकार
कर
दिया
गया
था
कि
मूंग
फसल
मानव
स्वास्थ्य
पर
विपरीत
प्रभाव
डाल
रही
है,
क्योंकि
इसमें
जहर
की
मात्रा
अधिक
है।
सरकार
के
इस
फैसले
के
बाद
से
ही
किसान
संगठनों
द्वारा
सरकार
के
इस
निर्णय
का
कड़ा
विरोध
किया
गया
और
एमएसपी
पर
खरीदी
जल्द
शुरू
करने
की
मांग
की
जा
रही
थी।
किसानों
के
बढ़ते
विरोध
के
बाद
सरकार
झुकी
और
खरीदी
के
लिए
तैयार
हुई।
ये
भी
पढ़ें: ज्योतिरादित्य
सिंधिया
ने
अपने
इलाके
के
लिए
कर
दिया
ये
बड़ा
काम,
लोगों
को
मिलेंगी
ये
सुविधाएं
एक
नजर
रकबे
और
पंजीयन
पर
संपूर्ण
जिले
के
28,708
किसानों
ने
71,012
हेक्टेयर
रकबे
में
मूंग
का
पंजीयन
कराया
है।
जिसमें
सीहोर
के
271
कृषकों
ने
432
हेक्टेयर,
श्यामपुर
के
226
किसानों
ने
354
हेक्टेयर,
आष्टा
के
10
किसानों
ने
17
हेक्टेयर,
इछावर
के
130
किसानों
ने
359
हेक्टेयर,
भैरूंदा
के
13,484
किसानों
ने
34,039
हेक्टेयर,
बुधनी
के
6,116
किसानों
ने
15,359
हेक्टेयर
एवं
रेहटी
के
8,471
किसानों
ने
20,451
हेक्टेयर
रकबे
में
मूंग
का
पंजीयन
कराया
है।
पिछले
वर्ष
12
क्विंटल
प्रति
हेक्टेयर
हुई
थी
खरीदी
वर्ष
2024
में
केंद्र
सरकार
द्वारा
प्रति
एकड़
मूंग
का
उपार्जन
4
क्विंटल
80
किलो
अर्थात
12
क्विंटल
प्रति
हेक्टेयर
के
मान
से
किया
गया
था।
लेकिन,
इस
वर्ष
शासन
द्वारा
किसानों
से
कितने
क्विंटल
मूंग
का
उपार्जन
किया
जाएगा,
इसकी
नीति
अब
तक
स्पष्ट
नहीं
हो
सकी
है,
जिससे
किसान
असमंजस
में
हैं।
जबकि
आगामी
7
जुलाई
से
खरीदी
शुरू
की
जानी
है।
अभी
तक
खरीदी
केंद्रों
का
निर्धारण
सहित
उपार्जन
नीति
स्पष्ट
नहीं
हो
सकी
है।
बता
दें
कि
इस
वर्ष
मौसम
की
अनुकूलता
के
चलते
क्षेत्र
में
विपुल
मात्रा
में
मूंग
का
उत्पादन
हुआ
है।
किसान
अपनी
मूंग
की
संपूर्ण
फसल
को
एमएसपी
पर
तुलवाने
के
लिए
प्रयासरत
हैं।
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मीडिया
पर
हुई
दोस्ती, युवती
को
डराया
धमकाया,हिंदूवादी
संगठनों
ने
होटल
में
गलत
होने
से
रोका
विचौलियों
पर
रहेगी
पैनी
नजर
मूंग
पंजीयन
की
प्रक्रिया
चल
रही
है।
तय
समय
में
मूंग
की
खरीदी
शुरू
किए
जाने
के
लिए
मंगलवार
को
उपार्जन
समिति
की
बैठक
आयोजित
की
गई
थी।
इस
वर्ष
मूंग
खरीदी
में
कड़े
नियमों
का
पालन
अनिवार्य
है।
सरकार
द्वारा
जो
उपार्जन
नीति
घोषित
की
जाएगी,
उसके
तहत
ही
उपज
की
खरीदी
होगी।
किसी
भी
कीमत
पर
नॉन-एफएक्यू
उपज
नहीं
खरीदी
जाएगी।
खरीदी
के
दौरान
विचौलियों
पर
पूरी
निगाह
रहेगी।
इस
दौरान
यदि
सांठगांठ
के
कोई
मामले
सामने
आते
हैं
तो
तत्काल
कार्रवाई
की
जाएगी।