
सीहोर
न्यायालय
परिसर
में
शनिवार
को
आयोजित
नेशनल
लोक
अदालत
में
दो
परिवारों
को
नई
शुरुआत
का
मौका
मिला।
तलाक
की
दहलीज
पर
खड़े
दो
जोड़े
न्यायाधीश
और
वकीलों
की
समझाइश
के
बाद
एक-दूसरे
के
साथ
रहने
को
तैयार
हो
गए।
नेशनल
लोक
अदालत
में
आवेदिका
पूजा
ने
अपने
पति
धर्मराज
के
खिलाफ
कुटुंब
न्यायालय
सीहोर
में
भरण-पोषण
के
लिए
मामला
प्रस्तुत
किया
था
और
धर्मराज
ने
पत्नी
पूजा
के
विरुद्ध
तलाक
का
दावा
प्रस्तुत
किया
था।
दोनों
करीब
डेढ़
वर्ष
से
अलग-अलग
रह
रहे
थे।
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इसी
प्रकार,
दूसरे
प्रकरण
में
आवेदक
जितेंद्र
अपनी
पत्नी
उषा
से
तीन
वर्ष
से
अलग
रह
रहे
थे।
दोनों
के
तीन
बच्चे
हैं।
विवाद
बहुत
बढ़
गया
था।
इन
दोनों
ही
प्रकरणों
में
पति-पत्नी
के
मध्य
छोटी-मोटी
पारिवारिक
बातों
को
लेकर
वे
अलग-अलग
रहने
लगे
थे,
जो
बाद
में
विवाद
में
परिवर्तित
होकर
अलगाव
की
स्थिति
तक
पहुंच
गया।
इन
प्रकरणों
में
पारिवारिक
मामला
एवं
भविष्य
को
दृष्टिगत
रखते
हुए
न्यायालय
वैभव
मंडलोई
एवं
प्रधान
न्यायाधीश
द्वारा
लोक
अदालत
में
समझाइश
के
पश्चात
दोनों
पक्षों
ने
राजीनामा
कर
साथ
रहने
पर
सहमति
व्यक्त
की।
राजीनामा
करने
वाले
सभी
पक्षकारों
को
फूल-माला
पहनाकर
खुशी-खुशी
घर
के
लिए
विदा
किया
गया।
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और
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14
मई
से
कमजोर
होगा
सिस्टम
किसी
भी
स्थिति
में
राजीनामे
के
लिए
तैयार
नहीं
थे,
कोर्ट
में
माने
इसी
प्रकार,
नेशनल
लोक
अदालत
में
दीपेन्द्र
मालू
के
लंबित
आपराधिक
प्रकरणों
में
आरोपी
एवं
फरियादी
दोनों
ने
एक-दूसरे
के
विरुद्ध
आपराधिक
प्रकरण
दर्ज
कर
रखे
थे।
दोनों
पक्षों
को
समझाइश
दी
गई,
पर
वे
किसी
भी
स्थिति
में
राजीनामे
के
लिए
तैयार
नहीं
थे।
जब
यह
जानकारी
प्रधान
जिला
न्यायाधीश
को
मिली,
तो
उन्होंने
पक्षकारों
को
बुलाकर
व्यक्तिगत
रूप
से
समझाइश
दी।
इसके
बाद
एक
पक्षकार
जो
कि
छोटा
भाई
एवं
भतीजा
था,
उसका
बड़े
भाई
एवं
काका
के
मध्य
समझौता
कराया
गया।
लोक
अदालत
में
2162
प्रकरणों
का
निराकरण
नेशनल
लोक
अदालत
में
कुल
2162
प्रकरणों
का
निराकरण
किया
गया
और
06
करोड़
65
लाख
52
हजार
808
रुपये
की
समझौता
राशि
जमा
की
गई।
आपसी
समझौते
के
आधार
पर
निराकरण
हेतु
न्यायालय
एवं
उपभोक्ता
फोरम
में
लंबित
818
प्रकरण
रखे
गए
थे,
जिनमें
से
598
प्रकरणों
का
निराकरण
आपसी
राजीनामा
के
आधार
पर
हुआ
और
05
करोड़
11
लाख
64
हजार
334
रुपये
की
समझौता
राशि
जमा
कराई
गई।
इसी
प्रकार,
नेशनल
लोक
अदालत
की
खंडपीठों
के
समक्ष
कुल
14,340
प्री-लिटिगेशन
प्रकरण
रखे
गए
थे,
जिनमें
से
1564
प्रकरणों
का
निराकरण
हुआ
और
01
करोड़
53
लाख
88
हजार
474
रुपये
की
समझौता
राशि
जमा
कराई
गई।
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नेता
लक्ष्मण
सिंह
पर
अनुशासनात्मक
कार्रवाई,
पार्टी
ने
भेजा
कारण
बताओ
नोटिस
मिलती
है
शांति
की
अनुभूति
नेशनल
लोक
अदालत
का
शुभारंभ
प्रधान
जिला
न्यायाधीश
एवं
जिला
विधिक
सेवा
प्राधिकरण
के
अध्यक्ष
प्रकाश
चंद्र
आर्य
ने
किया।
उन्होंने
जिला
विधिक
सेवा
प्राधिकरण
के
सुसज्जित
फ्रंट
ऑफिस
का
लोकार्पण
भी
किया।
इस
फ्रंट
ऑफिस
में
आने
वाले
पक्षकारों
को
विधिक
सहायता,
योजनाओं
की
जानकारी
एवं
सकारात्मक
वातावरण
निशुल्क
उपलब्ध
कराया
जाएगा।
इस
अवसर
पर
प्रधान
जिला
न्यायाधीश
आर्य
ने
कहा
कि
लोक
अदालत
से
न
केवल
पक्षकारों
को,
बल्कि
अधिवक्ताओं
एवं
न्यायिक
अधिकारियों
को
भी
परम
शांति
की
अनुभूति
होती
है
क्योंकि
इससे
एक
प्रकरण
नहीं,
बल्कि
एक
पूरा
विवाद
हमेशा
के
लिए
समाप्त
हो
जाता
है
और
पक्षकारों
के
बीच
आपसी
स्नेहपूर्ण
संबंध
स्थापित
होते
हैं।
यही
लोक
अदालत
की
सबसे
सुंदर
बात
है।
उन्होंने
कहा
कि
हमें
हर
योजना
को
उसके
मूर्त
रूप
में
लागू
कर
आमजन
को
लाभान्वित
करना
चाहिए।
आमजन
को
सस्ता,
सरल
और
सुलभ
न्याय
दिलाने
के
लिए
लोक
अदालत
एक
प्रभावी
मंच
है,
जो
वर्तमान
समय
में
समाज
के
लिए
अत्यंत
आवश्यक
है।
लोक
अदालत
के
माध्यम
से
प्रकरणों
के
त्वरित
निराकरण
से
पक्षकारों
का
न्यायिक
प्रक्रिया
पर
विश्वास
बढ़ता
है,
जिससे
और
अधिक
न्याय
प्राप्ति
के
लिए
इच्छुक
पक्षकार
अपने
विवाद
लेकर
न्यायालय
के
समक्ष
आने
के
लिए
प्रेरित
होते
हैं।
उन्होंने
उत्कृष्ट
कार्य
करने
वाले
विद्यार्थियों
को
प्रशस्ति
पत्र
प्रदान
कर
सम्मानित
भी
किया।
इसके
साथ
ही
उन्होंने
न्यायालय
परिसर
में
लगाए
गए
बैंक,
नगर
पालिका,
विद्युत
मंडल
आदि
के
स्टॉलों
का
निरीक्षण
किया
और
लोक
अदालत
में
आए
नागरिकों
की
समस्याएं
सुनकर
संबंधितों
को
निराकरण
के
निर्देश
भी
दिए।

