Sehore news: भैरूंदा सिविल अस्पताल में नहीं है फायर सिस्टम, क्यों की जा रही मेहरबानी, कभी भी हो सकती है अनहोनी

अमूमन
देखने
में
आता
है
कि
सरकार
के
नियम
सरकारी
विभागों
में
कम
और
निजी
तौर
पर
कड़ाई
के
साथ
लागू
होते
हैं।
सरकारी
विभागों
में
नियमों
की
धज्जियां
आसानी
के
साथ
उड़ती
रहती
हैं,
लेकिन
सरकारी
विभाग
से
हटकर
यदि
कोई
भी
व्यक्ति
या
संस्था
नियमों
का
पालन
नहीं
करता
है
तो
उसके
खिलाफ
त्वरित
कार्रवाई
करने
विभाग
के
अधिकारी
तैयार
रहते
हैं।
कुछ
ऐसा
ही
मामला
इस
समय
स्वास्थ्य
विभाग
में
देखा
जा
सकता
है।


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लोगों
को
सुविधा
मुहैया
कराने
के
साथ
ही
उनके
जान
माल
की
सुरक्षा
की
जिम्मेदारी
जितनी
सरकारी
विभाग
की
होती
है,
उतनी ही
निजी
संस्था
या
आम
लोगों
की
होती
है।
लेकिन
नगर
के
सिविल
अस्पताल
में
लोगों
की
जान
माल
की
चिंता

तो
स्वास्थ्य
विभाग
को
है
और

ही
नियमों
का
पालन
करने
वाले
नुमाइंदों
को।
यही
कारण
है
कि
नियम
की
अनदेखी
बरसों
से
की
जा
रही
है।
हम
बात
कर
रहे
हैं
सरकार
द्वारा
बनाए
गए
नियमों
के
तहत
किसी
भी
सरकारी
या
निजी
संस्थानों
में
होने
वाले
फायर
सेफ्टी
सिस्टम
की।
भैरुंदा
का
सिविल
हॉस्पिटल
इसी
गंभीर
लापरवाही
का
शिकार
है।
यहां
मरीजों
की
सुरक्षा
को
ताक
पर
रखकर
फायर
सिस्टम
तक
की
व्यवस्था
नहीं
की
गई
है।
यह
स्थिति

केवल
अस्पताल
प्रशासन
की
उदासीनता
को
दर्शाती
है,
बल्कि
यहां
इलाज
करा
रहे
मरीजों
की
जान
को
भी
सीधे
खतरे
में
डाल
रही
है।


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विकसित
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के
लिए
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के
प्रत्येक
गांव
को
विकसित
करना
होगा


निजी
अस्पतालों
पर
सख्ती,
सरकारी
अस्पतालों
पर
मेहरबानी
क्यों?

निजी
अस्पतालों
के
लिए
फायर
सेफ्टी
के
कड़े
नियम
लागू
हैं
और
उनका
सख्ती
से
पालन
कराया
जाता
है।
वहीं
दूसरी
ओर
सरकारी
अस्पताल
जैसे
कि
भैरुंदा
सिविल
अस्पताल
में
इस
बुनियादी
सुरक्षा
व्यवस्था
का
अभाव
है।
क्या
मरीजों
की
जान
की
कीमत
सरकारी
और
निजी
अस्पतालों
में
अलग-अलग
है?
यह
सवाल
आम
जनता
के
मन
में
उठना
स्वाभाविक
है।
बड़ा
सवाल
यह
है
कि
यदि
भैरुंदा
सिविल
अस्पताल
में
आगजनी
की
कोई
घटना
होती
है,
तो
इसका
जिम्मेदार
कौन
होगा?
हालांकि
स्वास्थ्य
विभाग
को
इस
बात
पर
भी
विशेष
ध्यान
रखना
होगा
कि
अस्पताल
में
आने
वाले
मरीजों
को
स्वास्थ्य
सुविधा
देने
के
साथ
ही
उनकी
सुरक्षा
सुनिश्चित
करना
भी
उनकी
जिम्मेदारी
में
शामिल
है।
आम
नागरिकों
का
मानना
है
कि
इस
गंभीर
मुद्दे
पर
ध्यान
देने
और
अस्पताल
में
फायर
सेफ्टी
की
व्यवस्था
सुनिश्चित
की
जाना
चाहिए।
लोगों
का
कहना
है
कि
मरीजों
की
जान
से
खिलवाड़
नहीं
होना
चाहिए।
हालांकि
शहर
में
अभी
तक
इस
तरह
की
कोई
घटनाएं
घटित
नहीं
हुई
हैं
लेकिन
फिर
भी
सुरक्षा
के
तमाम
इंतजाम
किया
जाना
अनिवार्य
है।

प्रतिदिन
300
से
350
मरीजों
की
ओपीडी

सिविल
अस्पताल
में
प्रतिदिन
300
से
350
मरीजों
की
ओपीडी
है।
इसके
अतिरिक्त
100
बिस्तरों
के
अस्पताल
में
मरीजों
की
भीड़
यहां
पर
आम
दिनों
में
भी
देखने
को
मिलती
है।
अस्पताल
में
10
बिस्तरों
का
आईसीयू,
मेटरनिटी,
भवन,
ऑक्सीजन
प्लांट,
सोनोग्राफी
मशीन,
पैथालॉजी
लैब,
डिजीटल
एक्स
रे
मशीन,
सीटी
स्कैन,
प्रस्तुति
कक्ष
सहित
नई
ओपीडी
भवन
का
निर्माण
किया
जा
चुका
है।
इसके
साथ
ही
स्टॉप
के
लिए
भवन
का
निर्माण
भी
प्रगतिरत
है।
अपना
इलाज
करने
आने
वाले
मरीजों
की
भीड़
यहां
पर
लगी
होने
से
सुरक्षा
व्यवस्था
के
संसाधन
होना
अति
आवश्यक
है।

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में
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चैंपियनशिप
में
देश
का
करेंगे
प्रतिनिधित्व


फायर
सेफ्टी
सिस्टम
के
लिए
बनाए
गए
हैं
यह
नियम

एनबीसी
(नेशनल
बिल्डिंग
कोड
ऑफ
इंडिया)
का
भाग
4
विशेष
रूप
से
आग
से
सुरक्षा
और
जीवन
सुरक्षा
के
पहलुओं
पर
केंद्रित
है।
इसमें
विभिन्न
प्रकार
के
भवनों
के
लिए
विस्तृत
दिशा
निर्देश
दिए
गए
हैं,
जिनमें
अस्पताल
भी
शामिल
हैं।
आग
लगने
की
स्थिति
में
सुरक्षित
निकास
के
लिए
पर्याप्त
संख्या
में
और
उचित
आकार
के
निकास
द्वार,
सीढ़ियां,
रैंप
आदि
का
प्रावधान
अनिवार्य
है।
इन
मार्गों
को
हमेशा
अवरोधों
से
मुक्त
रखना
होता
है
और
उचित
साइनेज
के
साथ
चिह्नित
किया
जाना
चाहिए।
अस्पतालों
में
बेड
पर
लेटे
हुए
मरीजों
के
निकास
के
लिए
विशेष
प्रावधान
होते
हैं,
जैसे
चौड़े
गलियारे
और
रैंप,
विभिन्न
प्रकार
की
आग
के
लिए
उपयुक्त
अग्निशामक
यंत्र
पर्याप्त
संख्या
में
और
आसानी
से
पहुंच
योग्य
स्थानों
पर
लगाए
जाने
चाहिए।
इसके
अतिरिक्त
होज
रील,
हाइड्रेंट
सिस्टम,
स्वचालित
स्प्रिंकलर
सिस्टम,अग्नि
पहचान
और
अलार्म
प्रणाली,आपातकालीन
प्रकाश
व्यवस्था,
धुआं निकासी
प्रणाली,अग्नि
प्रतिरोधी
दरवाजे,
अग्नि
लिफ्ट
सहित
अन्य
नियमों
का
पालन
करना
अनिवार्य
है।
राज्य
सरकारें
भी
अपने
स्थानीय
भवन
उप-नियमों
में
एनबीसी
के
प्रावधानों
को
शामिल
करती
हैं
और
अपनी
विशिष्ट
आवश्यकताओं
के
अनुसार
अतिरिक्त
नियम
बना
सकती
हैं।
अस्पतालों
को
संचालन
के
लिए
स्थानीय
अग्निशमन
विभाग
से
अनापत्ति
प्रमाण
पत्र
प्राप्त
करना
अनिवार्य
होता
है,
जिसे
नियमित
रूप
से
नवीनीकृत
कराना
होता
है।


फायर
सिस्टम
भी
लगेगा

इस
संबंध
में
भैरूंदा
सीबीएमओ
डॉ.
मनीष
सारस्वत
का
कहना
है
कि
अस्पताल
की
बिल्डिंग
का
कार्य
लगातार
चल
रहा
है।
टेंडर
में
फायर
सेफ्टी
सिस्टम
लगाने
का
भी
उल्लेख
है।
निर्माण
के
अंतिम
चरणों
में
यह
कार्य
भी
प्राथमिकता
के
साथ
पूरा
होगा।