
सीहोर
में
दुष्कर्म
के
मामले
में
सातवीं
कक्षा
की
मासूम
भतीजी
के
साथ
रिश्तों
को
तार-तार
कर
करने
वाले
फूफा
ने
परिजनों
से
राजीनामा
कर
लिया
था,
लेकिन
कोर्ट
ने
इस
घटना
को
गंभीर
मानते
हुए
फूफा
को
कोई
रियायत
नहीं
बरतते
हुए
आजीवन
कारावास
की
सजा
सुनाई।
पॉक्सो
न्यायालय
की
विशेष
न्यायाधीश
सुनीता
सिंह
ठाकुर
ने
इस
मामले
के
दौरान
यह
फैसला
सुनाया
कि
ऐसे
अपराधों
के
प्रति
कोई
दया
नहीं
बरती
जानी
चाहिए।
खासकर
जब
निर्दोष
बच्चियों
की
जिंदगी
पर
इसका
बुरा
असर
पड़ता
है।
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न्यायाधीश
ने
कहा
कि
मासूम
बच्चियों
के
साथ
दुष्कर्म
जैसी
घटनाएं
समाज
में
भय
और
असुरक्षा
का
माहौल
बनाती
हैं
और
ऐसे
अपराधियों
को
कठोर
सजा
मिलनी
चाहिए,
ताकि
भविष्य
में
इस
प्रकार
के
अपराधों
को
रोकने
में
मदद
मिले।
यह
फैसला
न
केवल
पीडि़ता
के
लिए
न्याय
है,
बल्कि
यह
सभी
उन
परिवारों
के
लिए
भी
एक
संदेश
है
जो
इस
तरह
की
घटनाओं
से
गुजरते
हैं।
न्यायालय
ने
यह
स्पष्ट
किया
कि
बच्चों
के
प्रति
इस
प्रकार
की
करतूत
करने
वालों
को
कड़ी
सजा
मिलनी
चाहिए,
ताकि
समाज
में
इस
प्रकार
की
घटनाओं
को
रोकने
के
लिए
एक
उदाहरण
पेश
किया
जा
सके।
विज्ञापन
पढ़ें: मछली
पकड़ने
गए
थे…लौटे
नहीं,
घरचिरचिटा
डैम
में
डूबे
दो
युवक,
गहराई
में
समा
गई
जिंदगी
ये
था
पूरा
घटनाक्रम
विशेष
लोक
अभियोजक
केदार
सिंह
कौरव
ने
मामले
की
पैरवी
करते
हुए
बताया
कि
मामला
17
अक्तूबर
2023
का
है।
पीड़िता
ने
थाना
बुधनी
में
उपस्थित
होकर
रिपोर्ट
की
कि
उसकी
माता
गुजरात
रहती
हैं।
17
अक्तूबर
को
उसके
फूफा
घर
आये
और
उसे
बहला
फुसलाकर
ले
गए।
इसके
बाद
रास्ते
में
जंगल
में
रात
करीब
9
बजे
मोटर
साइकिल
रोक
दी
और
शराब
पीने
लगे
और
पीड़िता
को
भी
जबरन
शराब
पिलाई।
फिर
पीड़िता
की
मर्जी
के
खिलाफ
उसके
साथ
जबरदस्ती
दुष्कर्म
किया
और
पीड़िता
को
उसके
घर
छोड़
दिया।
पीड़िता
ने
दादी
को
उक्त
घटना
की
जानकारी
दी
और
थाने
पर
रिपोर्ट
दर्ज
कराई।
पुलिस
अनुसंधान
पश्चात
अभियोग
पत्र
न्यायालय
में
प्रस्तुत
किया।
सुनवाई
के
दौरान
दोनों
पक्षों
में
राजीनामा
हो
गया
था।
इसके
बाद
भी
न्यायालय
द्वारा
अभियोजन
पक्ष
के
तर्कों
एवं
साक्ष्य
से
सहमत
होते
हुए
आरोपी
फूफा
को
दोषी
पाते
हुए
आजीवन
कारावास
की
सजा
से
दंडित
किया।