
दुष्कर्म
के
बाद
राजीनामे
में
पीड़िता
से
आरोपी
के
विवाह
मामले
में पॉक्सो
की
विशेष
न्यायाधीश
स्मृता
सिंह
ठाकुर
ने
फैसला
सुनाया।
कोर्ट
ने
आरोपी
को पीड़िता
के
नाबालिग
होने
के
कारण
ऑसीफिकेशन
रिपोर्ट
और
डीएनए
के
आधार
पर
12
वर्ष
के
सश्रम
कारावास
और
एक
हजार
रुपये
के
अर्थदंड
से
दंडित
किया
है।
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विशेष
लोक
अभियोजक
केदार
सिंह
कौरव
ने
मामले
की
पैरवी
करते
हुए
बताया
कि
पीड़िता
के
पिताजी
ने
14
दिसंबर
2022
की
मध्यरात्रि
को
थाना
श्यामपुर
में
गुमशुदगी
की
रिपोर्ट
दर्ज
कराई
थी।
जिसमें
बताया
था
कि
उसकी
नाबालिग
पुत्री
को
कोई
अज्ञात
व्यक्ति
बहला
फुसलाकर
कहीं
ले
गया
है,
जो
अभी
तक
घर
वापस
नहीं
आई।
मामला
11
दिसंबर
2022
का
है।
पीड़िता और
उसके
माता-पिता
रात
करीब
9
बजे
खाना
खाकर
सो
गये
थे।
रात
करीब
12
से
एक
बजे
के
लगभग
पीड़िता
के
घर
पर
नहीं
मिलने
पर
पीड़िता
की
मां
ने
ये
बात
पीड़िता
के
पिता
को
बताई।
इसके
बाद
पीड़िता
की
आसपास
गांव
में
एवं
रिश्तेदारी
में
तलाश
की
गई।
पीड़िता
की
तलाश
करने
पर
भी
उसका
कोई
पता
नहीं
चला।
पीड़िता
के
गांव
का
लड़का
फारूख
भी
उसी
दिन
से
गांव
में
नहीं
होने
से
उस
पर
परिजनों
ने
शंका
व्यक्त
करते
हुए
पुलिस
को
बताया
कि
फारूख
उसकी
नाबालिग
लड़की
को
बहला-फुसलाकर
भगाकर
ले
गया
होगा।
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भी
पढ़ें- इंदौर
के
एमआर-12
पर
भी
बनने
वाला
था
90
डिग्री
का
ब्रिज,
प्राधिकरण
ने
अलाइनमेंट
में
करवाया
संशोधन
नाबालिग
को
राजस्थान
भगा
ले
गया
था
आरोपी
पुलिस
अनुसंधान
के
दौरान
अभियुक्त
फारूख
खां(20)
पिता
अमीन
खां
निवासी
मुख्त्यार
नगर
सीहोर
के
मोबाइल
नंबर
की
टॉवर
लोकेशन
के
आधार
पर
तलाश
करने
पर
पीड़िता
को
महावीर-कॉलोनी
कोटा,
राजस्थान
से
अभियुक्त
फारूख
खां
के
साथ
26
फरवरी
2023
को
पीड़िता
को
दस्तयाब
किया
गया।
उक्त
दिनांक
को
ही
पीड़िता
के
कथन
किए
जाने
पर
पीड़िता
ने
अभियुक्त
द्वारा
शादी
करने
का
कहकर
बहला-फुसलाकर
कोटा
राजस्थान
ले
जाना
और
उसकी
इच्छा
के
विरूद्ध
दुष्कर्म
करना
बताया।
पुलिस
अनुसंधान
पश्चात
अभियोग
पत्र
न्यायालय
में
प्रस्तुत
किया
गया।
अभियोजन
के
तर्कों
से
सहमत
होते
हुए
आरोपी
को
दंडित
किया
गया।
पीड़िता
ने
आरोपी
से
कर
लिया
था
निकाल,
नाबालिग
से
दुष्कर्म
पीड़िता
ने
आरोपी
से
निकाह
कर
लिया
था।
पीड़िता
को
बच्चा
भी
हुआ
था।
पीड़िता
ने
घटना
का
समर्थन
नहीं
किया।
प्रकरण
में
पीड़िता
की
आयु
के
लिए
उम्र
निर्धारण
जांच,
ऑसीफिकेशन
रिपोर्ट
एवं
डीएनए
के
आधार
पर
आरोपी
को
दोषसिद्ध
किया
गया।
अभियोजन
द्वारा
प्रस्तुत
साक्ष्य
एवं
तर्कों
से
सहमत
होते
हुए
न्यायालय
द्वारा
आरोपी
को
दोषी
पाते
हुए
धारा
3(क)/4(1)
पॉक्सो
एक्ट
में
12
वर्ष
का
सश्रम
कारावास
और
एक
हजार
रुपये
के
अर्थदंड
से
दंडित
किया
गया।