
स्कूल
शिक्षा
विभाग
ने
विद्यालयों
में
5
जून
से
व्यापक
स्तर
पर
पौधरोपण
अभियान
चलाने
का
निर्णय
लिया
है।
स्कूल
शिक्षा
विभाग
आगामी
सीजन
में
प्रदेश
में
50
लाख
पौधों
का
रोपण
करेगा।
सीहोर
जिले
में
विद्यार्थियों
की
भागीदारी
से
30
सितम्बर
तक
एक
लाख
पौधे
रोपे
जाएंगे।
यह
अभियान
प्रदेश
में
एक
पेड़
मां के
नाम
2.0
के
नाम
से
चलाया
जाएगा।
पौधरोपण
के
बाद
उनकी
सुरक्षा
की
जिम्मेदारी
भी
तय
किए
जाने
के
लिए
कहा
गया
है।
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संबंध
में
लोक
शिक्षण
संचालनालय
ने
समस्त
जिला
शिक्षा
अधिकारी
और
जिला
परियोजना
समन्वयक
को
पत्र
लिखकर
निर्देश
जारी
किए
हैं।
व्यापक
स्तर
पर
पौधारोपण
का
उद्देश्य
बच्चों
और
युवा
पीढ़ी
को
सतत्
विकास
के
प्रति
संवेदनशील
बनाने
और
प्रकृति
को
हरा-भरा
बनाने
में
सक्रिय
भागीदार
बनाना
है।
यह
अभियान
मातृत्व
की
भावना
का
सम्मान
करने
और
पर्यावरण
संरक्षण
के
प्रति
हमारी
राष्ट्रीय
प्रतिबद्धता
को
सुदृढ़
करना
भी
है।
पौधारोपण
में
स्थानीय
और
क्षेत्रीय
प्रजातियों
के
पौधे
लगाने
को
प्राथमिकता
दी
जाएगी।
अभियान
के
दौरान
बच्चों
को
पौधों
की
किस्मों
और
उनके
फायदे
की
जानकारी
भी
साझा
की
जाएगी।
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पर
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ने
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हमला,
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भागकर
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पौधारोपण
के
बाद
उनकी
सुरक्षा
की
जिम्मेदारी
भी
होगी
तय
जिला
स्तर
पर
जिला
शिक्षा
अधिकारी
को
विद्यालयों,
ग्राम
में
उपलब्ध
भूमि
एवं
विद्यालय
की
छात्र
संख्या
के
अनुसार
कार्ययोजना
बनाने
के
लिए
कहा
गया
है।
जिला
स्तर
पर
कलेक्टर
की
अध्यक्षता
में
समिति
गठन
करने
को
कहा
गया
है।
समिति
में
वनमंडल
अधिकारी,
जिला
शिक्षा
अधिकारी,
जिला
परियोजना
समन्वयक,
स्कूल
प्राचार्य,
समाज
के
प्रमुख
नागरिकों
को
शामिल
करने
के
लिए
कहा
गया
है।
समिति
के
नोडल
अधिकारी
जिला
शिक्षा
अधिकारी
और
जिला
परियोजना
समन्वयक
जिला
शिक्षा
केन्द्र
सहायक
नोडल
अधिकारी
होंगे।
पौधारोपण
की
तैयारी
4
जून
तक
करने
के
लिए
कहा
गया
है।
पौधारोपण
मुख्य
रूप
से
स्कूल
परिसर,
स्कूल
तक
जाने
वाली
सड़क,
सार्वजनिक
स्थल
और
अमृत
सरोवर
के
आस-पास
किया
जाएगा।
पौधारोपण
के
बाद
उनकी
सुरक्षा
की
जिम्मेदारी
भी
तय
किए
जाने
के
लिए
कहा
गया
है।
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मिश्रा
बोले-अच्छे
कर्म
का
फल
हमेशा
मिलता
है,
जो
तुम
दूसरों
को
दोगे,
वही
लौटकर
तुम्हारे
पास
आएगा
बच्चों
को
बताएंगे
पौधों
का महत्व
ग्रीष्म
अवकाश
के
बाद
15
जून
से
बच्चों
को
प्रात:
सभा
के
समय
पौधों
के
महत्व
के
बारे
में
बताने
के
लिए
कहा
गया
है।
लगाए
गए
पौधों
के
साथ
एक
पट्टिका
होगी,
जिसमें
विद्यार्थी
और
उसकी
माता
का
नाम
भी
अंकित
किया
जाएगा।
प्रत्येक
वृक्ष
प्रजाति
के
लिए
एक
क्यू-आर
कोड
भी
बनाया
जा
सकता
है,
जिससे
बॉटनिकल
जानकारी
का
डिजिटली
प्रसार
हो
सकेगा।
जिला
स्तर
पर
कक्षा
9
से
12
के
विद्यालयों
में
संपूर्ण
कार्यक्रम
के
क्रियान्वयन
का
सुपरविजन
का
दायित्व
जिला
शिक्षा
अधिकारी
को
और
कक्षा
6
से
8
तक
के
विद्यालयों
में
कार्यक्रम
की
निगरानी
का
कार्य
जिला
परियोजना
समन्वय
जिला
शिक्षा
केन्द्र
को
सौंपा
गया
है।