Shivpuri News: शिवपुरी जिला अस्पताल में डॉक्टर ने प्रसूता के अटेंडर को मारे चांटे, गार्ड से जूतों से पिटवाया

शिवपुरी
के
जिला
अस्पताल
में
एक
डॉक्टर
ने
वार्ड
में
भर्ती
प्रसूता
की
हालत
पूछने
पर
अटेंडर
की
मारपीट
कर
दी।
गार्ड
को
बुलवाकर
उसे
जूतों
से
पिटवाया।
पूरा
मामला
सीसीटीवी
कैमरे
में
कैद
हो
गया
है।
पिछोर
के
ग्राम
अगरा
निवासी
पूजा
पत्नी
सुरेंद्र
रजक
को
20
मई
की
दोपहर
तीन
बजे
प्रसव
के
लिए
भर्ती
कराया
गया
था।
प्रसूता
को
डॉ. अनुराग
दंडौतिया
ने
देखा।
जिला
अस्पताल
में
जब
डॉ. अनुराग
राउंड
पर
आए
तो
पूजा
के
जेठ
बृजेश
ने
कहा
कि
बहू
कल
से
भर्ती
है,
हम
कल
से
उसकी
स्थिति
के
बारे
में
जानना
चाह
रहे
हैं,
परंतु
आप
कुछ
नहीं
बता
रहे
हो।
अगर
कोई
परेशानी
हो
तो
आप
बता
दें।
अगर
यहां
प्रसव
नहीं
हो
सकता
हो
तो
ग्वालियर
रैफर
कर
दें।
पीड़ित
के
अनुसार
इस
बात
पर
डाक्टर
नाराज
हो
गए।


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गार्ड
ने
अटेंडर
का
मोबाइल
छीन
लिया
प्रबंधक
ने
वापस
दिलवाया

पीड़ित
ने
अपनी
शिकायत
में
बताया
कि
इस
बात
पर
डॉक्टर
ने
गिरेबां
पकड़कर
मारपीट
कर
दी।
प्रत्यक्षदर्शी
युवती
के
अनुसार
डाक्टर
ने
पहले
अंकल
का
पर्चा
फेंका
और
फिर
उनके
साथ
मारपीट
कर
दी।
गार्ड
ने
इस
छीनाझपटी
में
अटेंडर
का
मोबाइल
छीन
लिया,
जिसे
बाद
में
अस्पताल
प्रबंधक
ने
वापस
दिलवाया।


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मंत्री
शिवराज
25
मई
से
फिर
निकलेंगे
पदयात्रा
पर,
हर
दिन
चलेंगे
25
किलोमीटर;
यह
है
वजह


चिंतित
थे
स्वजन
इसलिए
पूछो
तो
हो
गई
पिटाई

पीड़ित
परिवार
का
कहना
है
कि
उनकी
बहू
भर्ती
थी,
परंतु
डाक्टरों
ने
उसे
पलंग
पर
डालने
के
अलावा
कुछ
नहीं
किया
था।
यही
कारण
रहा
कि
उन्हें
डाक्टर
से
पूछना
पड़ा
कि
बहू
की
स्थिति
कैसी
है?
हालाकि
मारपीट
और
हंगामे
के
बाद
अस्पताल
प्रबंधन
ने
प्रसूता
का
अल्ट्रासाउंड
करवा
दिया
गया,
उसे
ड्रिप
भी
लगवा
दी
गई
और
उसकी
देखरेख
भी
बढ़ा
दी।
पूजा
के
स्वजनों
के
अनुसार
वह
पूजा
को
लेकर
इसलिए
भी
ज्यादा
चिंतित
थे,
क्योंकि
पिछले
साल
भी
पूजा
का
पिछोर
में
सामान्य
प्रसव
हुआ
था,
परंतु
प्रसव
के
बाद
उसकी
बेटी
की
मौत
हो
गई
थी।
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कोर्ट
का
अनोखा
फैसला-
पति
से
अलग
रहने
का
वाजिब
कारण
नहीं,
पत्नी
को
भरण
पोषण
राशि
नहीं
मिल
सकती


सिविल
सर्जन
बोले-
जांच
करवा
रहे
हैं

दूसरी
ओर
जिला
अस्पताल
के
सिविल
सर्जन
डॉ.
बीएल
यादव
ने
पत्रकारों
को
बताया
कि
इस
मामले
की
जांच
करवाने
के
लिए
दो
सदस्यीय
दल
गठित
किया
है।
सीसीटीवी
फुटेज
भी
चेक
करवा
रहे
हैं।
फिजिकल
वायलेंस
उचित
नहीं
है।
अगर
डॉक्टर
की
गलती
है
तो
एनएचएम
को
पत्र
लिख
कर
उसके
खिलाफ
कार्रवाई
के
लिए
लिखेंगे।
अगर
अटेंडर
की
गलती
होगी
तो
उस
पर
भी
कार्रवाई
करवाएंगे।
वहीं
दूसरी
ओर
इस
आरोपों
के
बाद
जिला
अस्पताल
के
डॉ. अनुराग
दण्डौतिया
ने
बताया
कि
मरीज
हाई
रिस्क
पेसेंट
था
और
डॉ. नीरजा
शर्मा
के
हैंडओवर
था,
मैंने
मरीज
को
देखा
था,
परंतु
वह
गाली
गलौच
करने
लगा,
जो
मुझे
उचित
प्रतीत
नहीं
हुआ।
इसी
के
चलते
पूरा
घटनाक्रम
घटित
हुआ।