
दमोह
शहर
के
एक्सीलेंस
स्कूल
में
गुरुवार
को
कक्षा
दसवीं
की
परीक्षा
के
दौरान
चंद
मिनट
की
देरी
से
पहुंचे
कुछ
छात्रों
को
परीक्षा
केंद्र
में
प्रवेश
नहीं
दिया
गया।
ये
छात्र
स्कूल
प्रबंधन
से
जुड़े
अधिकारियों
से
मिन्नतें
करते
रहे,
लेकिन
अधिकारियों
ने
नियमों
का
हवाला
देकर
उन्हें
प्रवेश
देने
से
इंकार
कर
दिया।
छात्रों
की
मांग
है
कि
उन्हें
एक
अवसर
दिया
जाए
ताकि
उनका
साल
खराब
न
हो।
इसके
बाद
सभी
छात्र
दमोह
कलेक्टर
से
मुलाकात
कर
पेपर
देने
की
गुहार
लगाने
पहुंचे।
दरअसल,
गुरुवार
को
जिले
के
84
परीक्षा
केंद्रों
पर
कक्षा
दसवीं
का
हिंदी
का
पेपर
संपन्न
हुआ।
शहर
के
एक्सीलेंस
स्कूल
में
भी
परीक्षा
केंद्र
बनाया
गया
था।
दमोह
से
40
किमी
दूर
परस्वाहा
में
रहने
वाले
छात्र
धर्मेंद्र
यादव
ने
बताया
कि
परीक्षा
केंद्र
पहुंचने
में
मात्र
तीन
से
चार
मिनट
की
देरी
हुई,
लेकिन
उसे
प्रवेश
नहीं
दिया
गया।
शहर
के
बजरिया
वार्ड
में
रहने
वाले
एक
अन्य
छात्र
के
साथ
भी
यही
स्थिति
बनी।
बांदकपुर
से
आए
भूपेंद्र
ने
बताया
कि
वह
सुबह
9:07
बजे
परीक्षा
केंद्र
पहुंचा
था,
लेकिन
उसे
भी
प्रवेश
नहीं
मिला।
दलपतपुरा
गांव
से
आई
छात्रा
आभा
ठाकुर
ने
कहा
कि
वह
समय
पर
केंद्र
पहुंच
गई
थी,
लेकिन
फिर
भी
उसे
प्रवेश
नहीं
दिया
गया।
वहीं,
सगरोन
निवासी
सोमवती
विश्वकर्मा
ने
बताया
कि
वह
9:40
बजे
परीक्षा
केंद्र
पहुंची
थी,
इसलिए
उसे
प्रवेश
नहीं
दिया
गया।
पेपर
से
वंचित
छात्र
चाहते
हैं
एक
अवसर
कुछ
देर
भटकने
के
बाद
यह
छात्र
कलेक्टर
सुधीर
कोचर
के
पास
मदद
की
गुहार
लेकर
पहुंचे।
कलेक्टर
ने
उनकी
बात
सुनी,
लेकिन
उन्होंने
बताया
कि
नियमों
के
अनुसार
प्रत्येक
परीक्षार्थी
को
सुबह
8:30
बजे
परीक्षा
केंद्र
पर
पहुंचना
आवश्यक
है।
यदि
किसी
कारण
देरी
होती
है,
तो
केवल
8:40
तक
ही
केंद्र
में
प्रवेश
की
अनुमति
दी
जाएगी।
ये
छात्र
9
बजे
के
बाद
पहुंचे
थे,
इसलिए
इन्हें
प्रवेश
नहीं
दिया
गया।
कलेक्टर
ने
छात्रों
को
आश्वासन
दिया
कि
वह
मध्य
प्रदेश
माध्यमिक
शिक्षा
मंडल
से
पत्राचार
करेंगे,
वहां
से
जो
भी
निर्देश
मिलेंगे,
उसके
अनुसार
आगे
की
कार्रवाई
सुनिश्चित
की
जाएगी।
उन्होंने
छात्रों
से
यह
भी
कहा
कि
अगली
बार
समय
पर
परीक्षा
केंद्र
पहुंचें।