
देशभर
में
चैत्र
मास
की
शारदीय
नवरात्र
आज
से
शुरू
हो
गए
हैं।
नौ
दिन
तक
देवीभक्त
शक्ति
की
उपासना
और
पूजन
करते
हैं।
विश्व
पर्यटक
स्थल
खजुराहो
में
भारतीय
पुरातत्व
विभाग
के
अधीन
पश्चिमी
मंदिर
समूह
स्थित
चंदेलकालीन
जगदंबी
देवी
मंदिर
के
कपाट
देवीभक्तों
के
लिए
निशुल्क
खुल
गए
हैं।
यहां
पर
सूर्योदय
के
साथ
ही
देवीभक्तों
कि
भारी
भीड़
उमड़
पड़ती
है,
जो
सूर्यास्त
तक
जारी
रहती
है।
इस
दौरान
भक्त
देवी
मां
को
जल
ढारने,
पूजा
अर्चना
के
साथ
आरती
भी
करते
हैं।
ऐसी
मान्यता
है
कि
इस
मंदिर
में
देवीभक्तों
की
मनोकामना
पूरी
होती
है।
इस
मंदिर
के
गर्भगृह
के
कपाट
की
खासियत
यह
है
कि
यह
साल
भर
में
आश्विन
मास
की
शारदीय
तथा
चैत्र
मास
में
पड़ने
वाले
नवरात्र
में
ही
खुलते
हैं
और
बाकी
समय
बंद
रहते
हैं।
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ये
है
मान्यता
खजुराहो
में
9वीं
से
11वीं
सदी
के
समय
चंदेल
राजाओं
ने
कई
मंदिर
बनवाये
थे,
जो
हिन्दू
देवताओं
को
समर्पित
हैं।
विशेषज्ञों
के
अनुसार
ये
मंदिर
केवल
देवों
के
थे।
मान्यताओं
के
अनुसार
जब
तक
मंदिरों
में
देवों
के
साथ
शक्ति
नहीं
होती
तब
तक
वहां
पूर्णता
का
आभास
नहीं
होता।
इसलिए
स्थान
की
पूर्णता
हेतु
इनमें
से
एक
मंदिर
जो
भगवान
विष्णु
को
समर्पित
था
कालांतर
में
इस
मंदिर
के
गर्भ
गृह
में
देवी
पार्वती
की
मूर्ति
स्थापित
की
गई
थी।
बाद
में
देवी
जगदम्बी
के
रूप
में
प्रसिद्धि
मिली
और
नवरात्रि
में
देविभक्त
यहां
पूजन
अर्चन
करने
लगे।
जो
आज
भी
अनवरत
जारी
है।
वैसे
तो
पुरातत्व
विभाग
के
अधीन
सभी
मंदिरों
के
गर्भगृह
बंद
रहते
हैं,
लेकिन
देवी
जगदंबी
मंदिर
के
गर्भगृह
को
नवरात्र
पर्व
पर
न
केवल
खोला
जाता
है।
निशुल्क
प्रवेश
भी
रखा
गया
है,
पश्चिमी
मंदिर
समूह
के
इस
मंदिर
के
कपाट
खुलते
ही
भक्तों
का
तांता
लग
जाता
है।
इस
मंदिर
की
ऐसी
मान्यता
है
कि
जगदम्बी
देवी
नवरात्र
के
दौरान
अपने
स्वरूप
बदलती
हैं,
जिससे
भक्तों
को
देवी
के
अलग-अलग
रूपों
के
दर्शन
हो
जाते
हैं।
उसकी
सभी
मनोकामनाएं
देवीमाता
पूरी
करती
हैं।
इस
मंदिर
में
देवी
पूजन
के
लिए
आस-पास
के
क्षेत्र
से
ही
नहीं
अपितु
देश
भर
से
देवी
भक्त
आते
हैं।