Maihar: मप्र के 55वें जिले मैहर की दिलचस्प है कहानी, ऐसे पड़ा था इसका नाम…2023 में सतना से हुआ था अलग

मैहर
मध्यप्रदेश
का
55वां
जिला
है।
5
सितंबर
2023
को
सतना
से
अलग
होकर
यह
नए
जिले
के
रूप
में
अस्तित्व
में
आया
था।
मैहर
मां
शारदा
की
नगरी
के
साथ-साथ
सीमेंट
की
औद्योगिक
नगरी
के
रूप
में
जाना
जाता
है।
यह
नेशनल
हाईवे
30
के
माध्यम
से
रीवा
संभाग
से
65
किमी
और
कटनी
जिले
से
लगभग
55
किलोमीटर
की
दूरी
पर
है।


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ज्यादातर
लोग
यह
जानने
के
इच्छुक
होते
हैं
कि
मैहर
का
नाम
मैहर
कैसे
पड़ा
है।
बता
दें
कि
मैहर
में
माता
सती
का
हार
त्रिकूट
पर्वत
पर
गिरने
से
इस
स्थान
का
नाम
मैहर
(माई
का
हार)
पड़ा।
बाद
में
वह
स्थान
मां
शारदा
के
मंदिर
के
रूप
में
स्थापित
हो
गया।
इस
मंदिर
को
शक्तिपीठ
कहा
जाता
है।
52
शक्तिपीठ
में
से
1
यह
मां
शारदा
का
मंदिर
है,
त्रिकूट
पर्वत
का
पूरा
क्षेत्र
मैहर
के
नाम
से
प्रसिद्ध
हो
गया।
मैहर
शहर
का
धीरे-धीरे
विस्तार
हुआ,
अब
यह
जिले
के
रूप
में
जाना
जाता
हैं। 
 


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इस
दिव्य
मंदिर
में
है
हजारों
सीढ़ियां

त्रिकुट
पर्वत
पर
विराजी
मां
शारदा
के
दर्शन
के
लिए
श्रद्धालुओं
को
1063
सीढ़ियां
चढ़
कर
पहुंचना
होता
हैं।
उसके
बाद
ही
मां
शारदा
के
दिव्य
दर्शन
होते
हैं।
मैहर
जिले
में
स्थित
मां
शारदा
का
यह
मंदिर
भारत
देश
का
एकलौता
मंदिर
है।
यह
कभी
महिष्मति
साम्राज्य
का
हिस्सा
था।
बाद
में
यहां
प्रतिहार,
पाल,
गोंड,
चंदेल,
कुशवाहा,बघेल
आदि
राजाओं
ने
भी
मां
के
आशीर्वाद
से
शासन
किया।


900
साल
से
जिंदा
है
आल्हा
ऊदल 

चंदेल
राजाओं
के
महान
सेनापति
आल्हा
ऊदल
माताजी
के
परम
भक्त
थे।
माताजी
आल्हा
से
साक्षात
बात
करती
थी।
आल्हा
के
पूजा
से
प्रसन्न
होकर
मां
ने
अमरता
का
वरदान
दिया
था,
तब
से
आज
तक
मान्यता
है
कि
शाम
की
आरती
होने
के
बाद
जब
मंदिर
के
कपाट
बंद
करके
सभी
पुजारी
नीचे

जाते
हैं।
तब
यहां
मंदिर
के
अंदर
से
घंटी
और
पूजा
करने
की
आवाज
आती
है।
लोगों
का
मानना
है
कि
मां
के
भक्त
आल्हा
900
सालों
से
अभी
भी
पूजा
करने
आते
हैं।
अक्सर
सुबह
की
आरती
वे
ही
करते
हैं।
मान्यता
है
कि
आल्हा
ऊदल
वर्तमान
में
भी
यहां
मौजूद
हैं।

क्या
है
नवगठित
जिले
का
इतिहास

मैहर
ब्रिटिश
राज
के
दौरान
भारत
में
एक
रियासत
थी,
जो
प्रेजेंट
में
मध्य
भारत
में
स्थित
है।
राज्य
का
क्षेत्रफल
1050
वर्ग
किलोमीटर
(407
वर्ग
मील)
था।
1901
में
इसकी
जनसंख्या
63,702
थी।
तमसा
नदी
द्वारा
सिंचित,
राज्य
में
मुख्य
रूप
से
बलुआ
पत्थर
को
कवर
करने
वाली
जलोढ़
मिट्टी
है।
जमीन
दक्षिण
के
पहाड़ी
जिलों
को
छोड़कर
उपजाऊ
है।
एक
बड़ा
क्षेत्र
जंगल
के
नीचे
था।
जिसकी
उपज
से
एक
छोटा
निर्यात
व्यापार
होता
था।


संभाग
का
6वां
जिला
बना
मैहर

मैहर
जिला
रीवा
संभाग
के
अंतर्गत
आता
है।
यह
रीवा
संभाग
का
छठा
जिला
है।
इसकी
सीमाएं
रीवा,
कटनी,
शहडोल,
सीधी,
सतना,
उमरिया
और
पन्ना
जिलों
से
लगती
हैं।
इसका
कुल
भौगोलिक
क्षेत्रफल
2722.79
वर्ग
किमी
है।
साथ
ही
तमसा
नदी
(टोंस)
जिले
की
एक
प्रमुख
नदी
है।


मैहर
जिले
में
पर्यटक
स्थल

मैहर
जिले
में
कई
पर्यटक
स्थल
है।
ये
घूमने
के
आनंद
के
साथ
साथ
प्राकृतिक
वातावरण
और
धार्मिक
भक्ति
का
अनुभव
कराते
हैं।
इनमें
शारदा
देवी
मंदिर,आल्हा
का
अखाड़ा,
आल्हा
देव
मंदिर,
आर्ट
इचोल,
केजेएस
मंदिर,
गोल
मठ
मंदिर
मैहर,
पन्नी
खोह
झरना,
नीलकंठ
मंदिर,मुकुंदपुर
व्हाइट
टाइगर
सफारी-चिड़ियाघर
और
आश्रम
मैहर
आदि
शामिल
हैं।