
नौरादेही
अभयारण्य
इलाके
में
1
अप्रैल
से
बड़ा
बदलाव
होने
जा
रहा
है।
–
फोटो
:
सोशल
मीडिया
विस्तार
रानी
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
के
नौरादेही
अभयारण्य
की
सीमा
में
कल
यानी
1
अप्रैल
से
रात
के
समय
बड़े
वाहन
और
चार
पहिया
वाहनों
के
प्रवेश
पर
रोक
लगा
दी
जाएगी।
सोमवार
से
यह
प्रक्रिया
शुरू
हो
जाएगी।
इस
नियम
का
ग्रामीण
विरोध
भी
कर
रहे
हैं।
उनका
कहना
है
कि
यदि
कोई
जरूरी
काम
आ
जाएगा
तो
वे
इस
मार्ग
से
निकल
ही
नहीं
पाएंगे।
बता
दें
कि
लगातार
नौरादेही
में
बाघों
का
कुनबा
बढ़
रहा
है
और
दो
दिन
पहले
ही
नद
और
मादा
बाघ
का
एक
जोड़ा
नौरादेही
में
लाया
गया
है।
इससे
यहां
बाघों
की
संख्या
21
पहुंच
गई
है।
इसके
अलावा
नौरादेही
में
शाकाहारी
जानवरों
की
संख्या
भी
लगातार
बढ़
रही
है।
जंगली
जानवरों
की
सुरक्षा
को
लेकर
बनाया
नियम
नौरादेही
अभयारण्य
की
सीमा
तेंदूखेड़ा
ब्लॉक
के
मार्गो
से
शुरू
होती
है।
एक
मार्ग
तेंदूखेड़ा-झलोन
के
आगे
झापन
से
लग
जाता
है।
जबकि
दूसरा
मार्ग
तारादेही
गांव
से
एक
किलोमीटर
आगे
से
लग
जाता
है।
झलोन
वाला
मार्ग
झापन,
मुहली
होकर
सागर
जाता
है
जबकि
जो
तारादेही
वाला
मार्ग
है
वह
तारादेही
से
महराजपुर,
देवरी
और
तारादेही
से
सर्रा
जाता
है।
इसके
बीच
में
दर्जनों
गांव
बसे
हुए
हैं।
जहां
रहने
वाले
लोगों
को
अब
नोरादेही
के
अधिकारियों
द्वारा
जारी
आदेश
के
बाद
चिंता
और
आक्रोश
दोनों
साफ
रूप
से
दिख
रहा
है।
उनका
कहना
है
यदि
इस
नियम
के
दायरे
में
हम
लोग
भी
आएंगे
तो
हमारे
तो
अनेक
कार्य
बाधित
हो
जायेंगे
और
घरों
से
आना,
जाना
भी
मुश्किल
हो
जाएगा।
इसलिए
बनाया
नियम
नौरादेही
अभयारण्य
में
सागर
मार्ग
पर
जंगली
क्षेत्र
में
शाकाहारी
जानवरों
के
साथ
बाघों
को
मुख्य
मार्ग
पर
रात्रि
के
समय
गुजरते
देखा
गया
है
और
इसकी
पुष्टि
राहगीरों
द्वारा
वीडियो
बनाकर
की
गई
है।
ऐसी
स्थिति
में
प्रबंधन
ने
यह
नियम
बनाया
है
कि
कहीं
कोई
बड़े
वाहन
इन
जानवरों
को
नुकसान
न
पहुंचा
दे
या
फिर
चार
पहिया
वाहनों
के
साथ
दो
पहिया
वाहन
वाले
भी
रात
के
समय
इन
मार्गो
से
गुजरते
हैं
उनको
ये
जानवर
नुकसान
न
पहुंचा
सकें।
इसलिये
रात्रि
के
समय
जंगली
क्षेत्र
के
मार्गो
पर
बड़े
वाहनों
के
साथ
चार
पहिया
वाहनों
का
आवगमन
बंद
करने
के
निर्देश
जारी
किए
गए
हैं।
इसका
प्रचार,
प्रसार
भी
नौरादेही
के
अधिकारियों
द्वारा
पिछले
15
दिनों
से
कराया
जा
रहा
था
और
एक
अप्रैल
सोमवार
से
यह
नियम
लागू
हो
जाएगा।
इसकी
जानकारी
के
बाद
तारादेही
और
सर्रा
मार्ग
पर
लगे
गांव
के
लोगों
को
जारी
नियम
को
लेकर
चिंता
के
साथ
आक्रोश
भी
बढ़ने
लगा
है।
ये
बोले
ग्रामीण
नौरादेही
अभयारण्य
में
तेंदूखेड़ा
ब्लॉक
का
आधे
से
अधिक
भाग
है।
इसके
एक
ओर
सागर
मार्ग
जाता
है
तो
दूसरी
ओर
देवरी,
महराजपुर
मार्ग
जाता
है।
सागर
मार्ग
की
सीमा
पर
तक
एक-दो
गांव
ही
आते
हैं,
लेकिन
महराजपुर
मार्ग
पर
अनेक
गांव
बसे
हैं,
जिनमें
शिवलाल
खमरिया,
बासी,
मुलरा,
सर्रा,
कूदपूरा,
बोरिया,
सनाई,
भैसा,
मझगवां,
पिंडराई,
कोपादेवरी,
सारसबगली,
खमतरा,
झमरा,
रमपुरा,
कोटखेड़ा
के
अलावा
अन्य
गांव
हैं।
यहां
के
लोगों
को
भी
एक
अप्रैल
से
लागू
होने
वाले
नियमों
की
जानकारी
नौरादेही
प्रबंधन
के
अधिकारियों
द्वारा
दी
गई
है।
ग्रामीणों
का
कहना
है
कि
हम
लोगों
का
निवास
अभयारण्य
में
बना
हुआ
है।
रात
को
यदि
अचानक
कोई
कार्य
आ
जाता
है
तो
हम
लोगों
को
एक
स्थान
दूसरे
स्थान
जाने
के
लिए
वाहनों
की
जरूरत
पड़ेगी।
यदि
उस
पर
भी
प्रतिबंध
लगाया
जाएगा
तो
हम
लोगों
को
तो
काफी
समस्या
का
सामना
करना
पड़ेगा।
कई
रिश्तेदार
भी
हम
लोगों
के
घर
आते
हैं
जिनको
वापस
जाना
पड़ता
है।
विवाह
के
समय
भी
वाहनों
का
आवागमन
लगा
रहता
है।
यदि
ऐसी
स्थिति
में
हम
लोगों
पर
यह
नियम
तो
हम
इसका
विरोध
करेंगे।
स्थानीय
लोगों
को
मिलेगी
राहत
जारी
आदेश
को
लेकर
मुहली
रेंजर
नीरज
बिसेन
ने
बताया
कि
बड़े
वाहनों
का
सूर्यास्त
के
बाद
प्रवेश
प्रतिबंधित
होने
के
आदेश
एक
अप्रैल
से
लागू
हो
जाएंगे,
लेकिन
स्थानीय
रहवासी
क्षेत्रों
के
लोगों
को
छूट
मिलेगी।
सर्रा
रेंजर
बलविंदर
सिंह
ने
बताया
कि
नियम
लागू
होंगे
पर
सर्रा
रेंज
में
अभी
इनको
लागु
नहीं
किया
जाएगा।
क्योंकि
यहां
रहवासी
एरिया
ज्यादा
है
और
बाघों
का
मूवमेंट
नहीं
है।
जबकि
मुहली
में
मुख्य
मार्ग
पर
बाघ
का
मूवमेंट
होता
है
इसलिये
वहां
नियम
लागू
होगा।
विज्ञापन
बता
दें
कि
नौरादेही
में
रहने
वाले
बाघों
ने
अपना
ठिकाना
अलग-अलग
जगह
बना
लिया
है
और
कुछ
बाघों
के
ठिकाने
मुख्य
मार्ग
से
लगे
एरिया
में
भी
पड़ते
हैं।
इस
कारण
बाघ
एक
स्थान
से
दूसरे
स्थान
जाने
के
लिए
मुख्य
मार्ग
पार
करते
हैं।
इसलिए
उनकी
सुरक्षा
जरूरी
है
और
लोगों
की
सुरक्षा
का
भी
ध्यान
रखा
जा
रहा
है।