
दमोह
जिले
के
हटा
ब्लॉक
में
आने
वाली
दमोतिपुरा
पंचायत
के
सूरजपुरा
गांव
में
एक
आदिवासी
परिवार
द्वारा
धर्म
परिवर्तन
किए
जाने
का
मामला
सामने
आया
है।
बताया
जा
रहा
है
कि
समीपवर्ती
छतरपुर
जिले
के
कुछ
लोगों
द्वारा
उन्हें
ईसाई
धर्म
अपनाने
के
लिए
प्रेरित
किया
गया।
इसकी
पुष्टि
खुद
परिवार
के
मुखिया
ने
की
है,
जिन्होंने
बताया
कि
उन्होंने
अपने
बच्चों
के
नाम
मसीही
समाज
की
परंपरा
के
अनुसार
रखे
हैं।
गौरतलब
है
कि
जिले
में
धर्मांतरण
के
विरुद्ध
प्रशासनिक
कार्रवाई
जारी
है,
इसके
बावजूद
यह
प्रक्रिया
रुकने
का
नाम
नहीं
ले
रही
है।
शहरी
क्षेत्रों
से
लेकर
वनांचलों
तक
धर्म
परिवर्तन
के
मामले
सामने
आ
रहे
हैं।
Trending
Videos
ऐसे
सामने
आया
मामला
जानकारी
के
अनुसार
सूरजपुरा
गांव
निवासी
धूलिया
भील
ने
लगभग
10
वर्ष
पहले
ईसाई
धर्म
स्वीकार
किया
था।
इसके
बाद
उनके
बेटे
प्रकाश
ने
भी
धर्म
परिवर्तन
कर
लिया।
हाल
ही
में
प्रकाश
द्वारा
अपने
दो
बेटों
के
नाम
थॉमस
और
जोसफ
रखे
गए,
जिनकी
उम्र
क्रमशः
एक
और
दो
वर्ष
है।
जब
ग्रामीणों
ने
इन
नामों
को
सुना
तो
उन्हें
यह
असामान्य
लगे
और
गांव
में
कई
तरह
की
चर्चाएं
शुरू
हो
गईं।
इसी
गांव
के
एक
अन्य
व्यक्ति
ने
भी
तीन
साल
पहले
ईसाई
धर्म
अपना
लिया
था।
गांव
में
दो
परिवारों
के
धर्म
परिवर्तन
का
विरोध
समाज
के
मुखिया
सहित
अन्य
लोगों
ने
किया,
लेकिन
दोनों
परिवार
अपने
फैसले
पर
अड़े
हैं।
विज्ञापन
ये
भी
पढ़ें: बाइक
फिसलने
से
दंपति
हाईवे
पर
गिरे,
पीछे
से
आ
रहे
ट्रक
ने
पति
को
कुचल;
पत्नी
बाल-बाल
बची
छतरपुर
के
भारतीपुरा
से
हो
रहा
धर्मांतरण
का
प्रयास
बताया
जा
रहा
है
कि
छतरपुर
जिले
का
भारतीपुरा
गांव,
जो
दमोह
जिले
की
सीमा
से
लगे
जंगल
क्षेत्र
में
स्थित
है,
वहां
से
भील
समाज
के
जरूरतमंद
लोगों
को
धर्म
परिवर्तन
के
लिए
प्रेरित
किया
जा
रहा
है।
धूलिया
भील
के
अनुसार,
उनकी
पत्नी
कई
वर्षों
से
बीमार
थीं
और
जब
उन्होंने
ईसाई
धर्म
के
अनुसार
काम
किए
तो
उनकी
स्थिति
में
सुधार
हुआ,
जिसके
बाद
उन्होंने
धर्म
परिवर्तन
कर
लिया।
8
परिवारों
ने
ईसाई
धर्म
अपनाया
है
धूलिया
भील
के
अनुसार,
भारतीपुरा
गांव
में
8
परिवारों
ने
ईसाई
धर्म
अपनाया
है
और
उन्हीं
के
संपर्क
में
आने
के
बाद
उन्होंने
भी
धर्म
परिवर्तन
किया।
यह
सभी
परिवार
लगभग
20
से
30
साल
पहले
झाबुआ,
धार,
राजस्थान
और
गुना
से
आए
थे।
इन्हें
आदिवासी
वर्ग
में
शामिल
कर
भूमि
पट्टा
और
अन्य
सरकारी
लाभ
प्राप्त
हुए
हैं।
ये
भी
पढ़ें: बोरी
में
मिली
युवक
की
सिर
कटी
लाश,
हाथ-पैर
भी
काटे,
‘मंजू’
टैटू
से
पहचान
का
प्रयास,
जांच
जारी
वे
लोग
नहीं
माने
भील
समाज
के
मुखिया
जमना
भील
ने
बताया
कि
यह
सत्य
है
कि
गांव
में
दो
लोगों
ने
ईसाई
धर्म
अपनाया
है,
जिनमें
से
एक
ने
लगभग
10
साल
पहले
और
दूसरे
ने
तीन
साल
पहले
धर्म
परिवर्तन
किया
था।
इसे
रोकने
के
लिए
समाज
की
ओर
से
प्रयास
किए
गए,
लेकिन
वे
लोग
नहीं
माने।