MP News: ‘वाहिद लाला के लिए मृत्युदंड है जरूरी’, फांसी की सजा सुनाकर कोर्ट ने की टिप्पणी, क्या है पूरा मामला


प्रधान
जिला
एवं
सत्र
न्यायाधीश
राजेश
कुमार
गुप्ता
की
अदालत
ने
एक
ऐसा
फैसला
सुनाया
है,
जिसमें
दोषी
को
फांसी
की
सजा
दिए
जाने
के
साथ
ही
फैसले
में
यह
भी
लिखा
गया
है
कि
आरोपी
बार-बार
ऐसी
घटना
को
अंजाम
दे
रहा
है,
जिससे
जनहानि
हो
रही
है।
अब
ऐसी
घटना
फिर
से

हो
इसीलिए
दोषी
को
मृत्युदंड
देना
जरूरी
है।


विज्ञापन

Trending
Videos


विज्ञापन


विज्ञापन

एडीपीओ
कुलदीप
सिंह
भदोरिया
ने
इस
पूरे
मामले
की
जानकारी
देते
हुए
बताया
कि
25
मार्च
2024
को
एटलस
चौराहा
क्षेत्र
में
संजीदा
बी
उर्फ
रानी
को
उसका
पति
वाहिद
लाला
उम्र
32
वर्ष
निवासी
देवास
रोड
आदर्श
नगर
एटलस
चौराहे
पर
शरीफ
लाला
उर्फ
गुड्डू
के
मकान
पर
ले
गया
था।
वहां
उसने
लाला
को
आवाज़
लगाई
और
जैसे
ही
घर
के
लोग
बाहर
निकले
तो
उसने
संजीदा
पर
तीन
फायर
कर
दिए।
संजदी
की
घटनास्थल
पर
ही
मौत
हो
गई
थी।
इस
मामले
में
नागझिरी
थाना
पुलिस
ने
बेटे
फरहान
की
रिपोर्ट
पर
पिता
वाहिद
के
खिलाफ
हत्या
का
प्रकरण
दर्ज
कर
उसे
सीहोर
से
गिरफ्तार
कर
लिया
था।
वाहिद
खूंखार
अपराधी
था
जिसने
संजीदा
के
पहले
भी
वर्ष
1994
में
तराना
और
वर्ष
2008
में
खाराकुआं
थाना
क्षेत्र
में
दो
लोगों
की
हत्या
कर
दी
थी।
इसीलिए
पूरे
मामले
को
पुलिस
ने
गंभीरता
से
लिया
और
नागझिरी
थाना
प्रभारी
कमल
निगवाल
ने
जल्द
से
जल्द
चालान
और
सबूत
न्यायालय
में
पेश
कर
दिए।
जिसके
बाद
न्यायालय
में
पेश
किए
गए
साक्ष्य
एवं
तर्कों
से
सहमत
होकर
वाहिद
लाला
को
फांसी
की
सजा
सुनाई
गई
है।


पत्नी
पर
करता
था
चरित्र
शंका

बताया
जाता
है
कि
वाहिद
लाला
पत्नी
संजीदा
बी
के
चरित्र
पर
शंका
करता
था।
अपनी
इसी
शंका
के
चलते
वह
एटलस
चौराहे
पर
रहने
वाले
शरीफ
लाला
के
घर
पहुंचा
था,
जहां
उसने
प्रेम
प्रसंग
के
चलते
शरीफ
के
घर
के
सामने
संजीदा
को
गोली
मार
दी
थी।

ऐसे
सबूत
जुटाए
की
जल्द

गया
फैसला

नागझिरी
थाना
प्रभारी
कमल
निगवाल
ने
80
दिन
में
चालान
पेश
कर
कोर्ट
के
सामने
केस
डायरी
और
सबूत
पेश
किए
थे।
इस
मामले
में
लोक
अभियोजक
मिश्रीलाल
चौधरी
द्वारा
पैरवी
की
गई
और
प्रभारी
उपनिदेशक
अभियोजन
राजेंद्र
कुमार
खांडेकर
एवं
एडीपीओ
उमेश
सिंह
तोमर
ने
कैस
की
मजबूती
के
लिए
विधिक
अनुसंधान
और
सबूत
संकलन
में
पुलिस
को
बारीकी
से
मार्गदर्शित
किया
था।


फास्टट्रैक
कोर्ट
में
प्रकरण
रखकर
सजा
दिलवाने
का
कर
रहे
प्रयास
:
एसपी

एसपी
प्रदीप
शर्मा
का
कहना
है
कि
हमारा
प्रयास
है
कि
फास्ट
ट्रैक
कोर्ट
के
माध्यम
से
हम
जल्द
से
जल्द
अपराधियों
को
सजा
दिलाई
इस
वर्ष
हमने
लगभग
80
प्रतिशत
चिन्हित
मामलों
में
आरोपियों
को
सजा
दिलवाई
है
आगे
भी
हमारा
यही
प्रयास
है।


80
दिन
में
चालान
पेश

पुलिस
ने
मामले
में
80
दिन
के
अंदर
चालान
पेश
किया।
न्यायालय
ने
इस
मामले
में
जब
देखा
तो
पाया
आरोपी
खूंखार
अपराधी
है।
जिसने
1994
में
अपने
एक
परिचित
की
तराना
तहसील
क्षेत्र
में
हत्या
कर
दी
थी।
दूसरी
हत्या
शहर
के
खारकुंआ
क्षेत्र
में
की।
इस
मामले
में
दोनों
के
बीच
समझौता
कर
बरी
हो
गया।
अब
तीसरी
बार
हत्या
पत्नी
की
कर
दी।


कोर्ट
की
टिप्पणी-
ऐसे
खूंखार
अपराधी
को
मृत्युदंड
जरूरी

उज्जैन
जिला
अदालत
ने
सुप्रीम
कोर्ट
के
एक
फैसले
को
कोट
करते
हुए
लिखा
है
कि
जो
व्यक्ति
जिस
पर
प्रभाव
रखता
हो
अथवा
जो
उस
पर
विश्वास
करता
है,
उसे
मारने
की
धमकी
देता
है

मारता
है
तो
ऐसा
व्यक्ति
इस
तरह
की
घटना
को
दोबारा
भी
अंजाम
दे
सकता
है।
इस
तरह
का
अपराध
करने
वालों
के
लिए
मृत्युदंड
जरूरी
है।