अब
दो
महीने
मांगलिक
कार्य
नहीं
हो
सकेंगे
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
30
अप्रैल
तक
होने
वाले
शादी
समारोह
के
बाद
अब
कोई
मुहूर्त
नहीं
है।
30
जून
तक
शुक्र
ग्रह
अस्त
रहेगा।
ज्योतिष
शास्त्र
में
शुक्र
ग्रह
अस्त
होना
यह
अच्छा
नहीं
माना
जाता
है।
शुक्र
अस्त
होने
के
बाद
मांगलिक
काम
जैसे
विवाह
और
गृह
प्रवेश
आदि
पर
रोक
लग
जाती
है।
आगामी
दो
महीने
तक
मांगलिक
मुहूर्त
नहीं
होने
से
वैवाहिक
कार्यक्रम
नहीं
हो
सकेंगे।
अन्नपूर्णा
ज्योतिष
केंद्र
के
पंडित सतीश
नागर
के
अनुसार,
30
अप्रैल
तक
होने
वाले
शादी
समारोह
के
बाद
अब
30
जून
तक
शुक्र
ग्रह
अस्त
रहेगा।
विवाह
के
लिए शुभ
दिनों
के
साथ
ही
शुभ
मुहूर्त
देखा
जाता
है,
ताकि
विवाह
सूत्र
में
बंधने
वालों
का
दांपत्य
जीवन
सुखमय
बना
रहे।
ज्योतिष
शास्त्र
में
शुक्र
ग्रह
अस्त
होना
अच्छा
नहीं
माना
जाता
है।
इसलिए
वैवाहिक
काम
नहीं
होना
चाहिए
और
यह
शास्त्र
के
विपरीत
भी
है।
वैदिक
ज्योतिष
शास्त्र
के
अनुसार,
शुक्र
का अस्त
होना
एक
ऐसी
स्थिति
है,
जब
शुक्र
सूर्य
के
करीब
आ
जाता
है।
शुभ
मुहूर्त
निकालने
वाले
पंडित
नागर
ने
बताया
कि
ज्योतिष
में
शुक्र
को
भौतिक
सुख,
वैवाहिक
सुख,
कला,
प्रतिभा,
सौंदर्य,
आदि
का
कारक
माना
जाता
है।
शुक्र
के
प्रभाव
से
ही
इंसान
को
भौतिक,
शारीरिक
और
वैवाहिक
सुख
मिलते
हैं।
इसलिए
कुंडली
में
शुक्र
के
मजबूत
होने
से
व्यक्ति
की
समृद्धता
बढ़ती
है।
कोई
भी
ग्रह
जब
सूरज
के
पास
आता
है
तो
वो
अस्त
हो
जाता
है।
सूरज
का
तेज
अपने
करीब
के
सभी
ग्रहों
के
प्रभाव
को
समाप्त
कर
देता
है।
शुक्र
और
सूर्य
के
बीच
11
डिग्री
का
अंतर
रहने
पर
शुक्र
ग्रह
को
अस्त
माना
जाता
है।
अस्त
होने
पर
ग्रह
के
शुभ
फल
में
कमी
आ
जाती
है,
अगले
दो
महीने
तक
शुक्र
अस्त
रहेगा।
शुक्र
अस्त
होने
के
बाद
विवाह
जैसे
मांगलिक
काम
जैसे
विवाह,
गृह
प्रवेश
आदि
पर
रोक
लग
जाती
है।
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शास्त्रों
में
शुक्र
ग्रह
को
ब्राह्मण,
विद्वान
और
शुक्राचार्य
के
रूप
में
जाने
जाते
हैं।
पौराणिक
कथा
अनुसार,
शुक्राचार्य
ऋषि
भृगु
और
पुलोमा
के
पुत्र
थे।
शुक्र
को
भगवान
शिव
से
संजीवनी
विद्या
का
ज्ञान
दिया
था,
जिससे
वह
मृत
लोगों
को
आसानी
से
जीवित
कर
सकते
हैं।
शुक्राचार्य
से
खुश
कर
भगवान
शिव
ने
उन्हें
ग्रहों
में
सबसे
श्रेष्ठ
होने
का
आशीर्वाद
दे
दिया।
इसके
साथ
यह
भी
कहा
कि
शुक्र
के
आकाश
में
उदय
होने
पर
ही
शुभ
और
मांगलिक
कार्य
करना
शुभ
होगा।