
नगरी
उज्जैन
में
रविवार
शाम
5:08
मिनट
पर
ध्वजा
से
ग्रहों
की
ऊर्जा
संतुलन
की
आध्यात्मिक
पहल
की
गई।
इस
दौरान
इंदौर
रोड
स्थित
शनि
मंदिर
पर
विशेष
अनुष्ठान
के
बाद
नवग्रह
के
मंदिरों
की
ध्वजारोहण
कर
ग्रहों
के
रंगों
के
अनुसार
इन्हें
लगाया
गया।
आध्यात्मिक
गुरु
कृष्णा
गुरु
ने
बताया
कि
रविवार
की
शाम
त्रिवेणी
स्थित
शनि
नवग्रह
मंदिर
में
एक
अनूठा
आध्यात्मिक
आयोजन
सम्पन्न
हुआ।
इसमें
शिखर
ध्वजों
का
पूजन
एवं
ध्वजारोहण
वैदिक
मंत्रों
के
साथ
किया
गया।
इसके
तहत
ध्वजारोहण
कार्यक्रम
की
शुरुआत
भस्म
आरती
के
हरिओम
जल
से
ध्वज
स्नान
विधि
के
साथ
हुई।
इसके
बाद
ग्रह
मंत्रों
द्वारा
नवग्रहों
का
आव्हान
अभिषेक
हुआ।
इस
अनुष्ठान
में
सर्वप्रथम
सूर्य
देव
की
सिंह
राशि
का
ध्वज
परिवर्तित
किया
गया।
इसके
पश्चात
क्रमशः
शनि,
राहू
और
अन्य
ग्रहों
के
शिखर
ध्वज
बदले
गए।
इस
आध्यात्मिक
एवं
सामाजिक
संदेश
से
परिपूर्ण
कार्यक्रम
में
पं
शैलेन्द्र
त्रिवेदी
ने
पूजा
संपन्न
करवाई।
इस
अवसर
पर
कृष्णा
गुरु
सोशल
वेलफेयर
सोसाइटी
के
सदस्य
अनिल
कुमार,
राजेंद्र
शर्मा,
अर्जुन
परमार,
उज्जैन
के
महाकाल
भक्त
सुनील
जैन,
और
अन्य
श्रद्धालु
उपस्थित
रहे।
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किया
वर्चुअल
लोकार्पण
देश
की
बागडोर
युवा
महिला
नेता
के
हाथों
में
जाने
की
संभावना
कृष्णा
गुरुजी
ने
कहा
कि
2007
में
जब
केतु
सिंह
में
था,
तब
भारत
को
प्रथम
महिला
राष्ट्रपति
प्रतिभा
पाटिल
मिली
थीं।
अब
2025
में
वही
योग
पुनः
बना
है।
आने
वाले
कुछ
माह
में
देश
की
बागडोर
किसी
युवा
महिला
नेता
के
हाथों
में
जाने
की
संभावना
है।
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ने
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ने
संजोए
90
हजार
गाने
ग्रहों
के
रंगो
के
अनुसार
बदली
गई
ध्वजा
त्रिवेणी
शनि
मंदिर
पर
आज
ग्रहों
के
पसंदीदा
रंगों
के
अनुसार
ध्वज
बदली
गई।
इसके
तहत
सूर्य,
मंगल
के
मंदिर
के
शिखर
पर
लाल
ध्वजा,
चंद्रमा
और
शुक्र
पर
सफेद
ध्वजा,
बुध
पर
हरि
ध्वजा,
गुरु
की
पीली
ध्वजा
और
शनि,
राहू,
केतु
के
मंदिर
के
शिखर
पर
काली
ध्वजा
चढ़ाई
गई।
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इसीलिए
हुआ
यह
आयोजन
आध्यात्मिक
कृष्णा
गुरु
ने
बताया
कि
राहू
ने
18
वर्षों
बाद
कुंभ
राशि
में
और
केतु
ने
सिंह
राशि
में
प्रवेश
किया
है।
इस
महत्वपूर्ण
अवसर
पर
ही
शनि
नवग्रह
मंदिर
त्रिवेणी
पर
यह
विशेष
अनुष्ठान
किया
गया।
जिसके
माध्यम
से
विश्व
शांति
और
सामूहिक
ऊर्जा
संतुलन
की
कामना
भी
की
गई।
आपने
यह
भी
बताया
कि
किसी
भी
मंदिर
के
शिखर
पर
लहराती
ध्वजा
से
ही
ऊर्जा
का
संचार
और
नई
दिशा
मिलती
है
इसीलिए
यह
ध्वजारोहण
किया
गया।
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