
सागर
जिले
के
खुरई
न्यायालय
ने
अपनी
ही
नाबालिग
भतीजी
से
दुष्कर्म
करने
के
मामले
में
ताऊ
को
सजा
सुनाई।
इस
जघन्य
अपराध
में
तृतीय
अपर
सत्र
न्यायालय
ने
दोषी
को
अंतिम
सांस
तक
जेल
में
रहने
की
चार
सजाएं
सुनाई
हैं।
खुरई
न्यायालय
में
अभी
तक
का
सबसे
बड़ा
फैसला
माना
जा
रहा
है।
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देहात
थाना
क्षेत्र
के
एक
गांव
में
अपनी
ही
13
वर्षीय
नाबालिग
भतीजी
से
दुष्कर्म
कर
उसे
गर्भवती
करने
के
मामले
में
खुरई
की
तृतीय
अपर
सत्र
न्यायाधीश
संध्या
मनोज
श्रीवास्तव
ने
फैसला
सुनाया
है।
दोषी
ताऊ
को
अंतिम
सांस
तक
जेल
में
रहने
की
चार
सजाएं
सुनाई
हैं।
ये
सजाएं
विभिन्न
धाराओं
में
दोषी
पाये
जाने
को
लेकर
सुनाई
हैं।
यहां
तक
कि
जान
से
मारने
की
धमकी
को
लेकर
भी
पांच
साल
की
सजा
सुनाई
है।
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घोषणा
17
जुलाई
को,
क्या
है
सात
साल
से
सरताज
इंदौर
की
स्थिति?
जानें
टक्कर
में
कौन
दरअसल
देहात
थाना
क्षेत्र
के
एक
गांव
में
19
नवंबर
2024
को
मानसिक
विक्षिप्त
13
साल
8
माह
की
नाबालिग
पीड़िता
की
मां
ने
मामला
दर्ज
कराया
था
कि
लगभग
ढाई
माह
पहले
उसकी
लड़की
से
उसके
जेठ
अर्थात
लड़की
के
ताऊ
ने
अपने
घर
में
दुष्कर्म
किया
था।
पीड़िता
की
मां
ने
बताया
कि
जब
बेटी
को
तकलीफ
हुई
तो
जांच
कराई,
तब
पता
चला
कि
वो
दो
माह
की
गर्भवती
है।
पूछने
पर
उसने
की
तरफ
इशारा
किया।
तब
उसके
साथ
हुए
दुष्कर्म
का
मामला
सामने
आया।
पुलिस
ने
आरोपी
के
खिलाफ
दुष्कर्म
सहित
विभिन्न
धाराओं
और
जान
से
मारने
की
धमकी
का
मामला
दर्ज
किया
था।
न्यायालय
ने
सभी
धाराओं
में
दोषी
मानते
हुए
अंतिम
सांस
तक
जेल
में
रहने
की
चार
सजाएं
सुनाई
हैं।
लोक
अभियोजन
अधिकारी
ने
बताया
कि
आरोपियों
को
ऐसी
सजाएं
मिलने
से
अपराधों
में
कमी
आएगी।