UPSC Success Story: सबइंस्पेक्टर की बेटी बनी IPS अफसर, टीना डाबी से प्रेरित होकर पाई पहले ही प्रयास में सफलता

UPSC Success Story: सबइंस्पेक्टर की बेटी बनी IPS अफसर, टीना डाबी से प्रेरित होकर पाई पहले ही प्रयास में सफलता
UPSC: Sub Inspector's daughter became IPS officer, inspired by Tina Dabi, got success in the first attempt

कोलगवां
थाने
में
पदस्थ
सब
इंस्पेक्टर
विजय
सिंह
की
बेटी
काजल


फोटो
:
सोशल
मीडिया

विस्तार

सतना
कोलगवां
थाने
में
पदस्थ
सब
इंस्पेक्टर
की
बेटी
ने
पहले
ही
प्रयास
में
यूपीएससी
क्रैक
की
है।
485वीं
रैंक
हासिल
कर
आईपीएस
में
चयन
हुआ
है।
टीना
डाबी
से
प्रेरणा
लेकर
उन्होंने
ये
मुकाम
हासिल
किया
है। 

बता
दें
कि
कोलगवां
थाने
में
पदस्थ
सब
इंस्पेक्टर
विजय
सिंह
की
बेटी
काजल
ने
टीना
डाबी
से
इंस्पायर
होकर
महज
22
साल
में
यूपीएससी
क्रैश
किया
है।
शहर
के
उतैली
स्थित
ने
स्थित
मकान
में
काजल
का
पूरा
परिवार
रहता
है।
यह
मूलतः
उत्तर
प्रदेश
चित्रकूट
जिला
अंतर्गत
मानिकपुर
के
नजदीक
रानीपुर
की
रहने
वाली
है।
यूपीएससी
क्रैश
करने
वाली
काजल
दिल्ली
में
है।
पिता
विजय
सिंह
मैहर
स्थित
शारदा
मंदिर
चैत्र
नवरात्रि
में
लेकर
ड्यूटी
करने
गए
हैं।
सबसे
बड़ी
बेटी
इंदौर
में
रहकर
एमपीपीएससी
की
तैयारी
कर
रही
है।
घर
में
सिर्फ
मां
मीरा
सिंह

छोटा
भाई
है।


ऐसे
संजोया
सपना

काजल
कहती
हैं
कि
खुश
हूं
कि
पहले
ही
अटेम्प्ट
में
सफलता
मिली
है।
2015
की
यूपीएससी
टॉपर
टीना
डाबी
से
इंस्पायर
हुई
हूं।
उस
समय
कक्षा
9वीं
की
पढ़ाई
कर
रही
थी।
इस
सपने
को
वहीं
से
बुनने
 शुरू
कर
दिए
थे।
यूपीएससी
की
तैयारी
के
लिए
प्लेन
बीए
किया।
सोशल
मीडिया
से
पूरी
तरह
दूर
रही।
हर
दिन
8
से
10
घंटे
सेल्फ
स्टडी
की।
जुलाई
2022
में
दिल्ली
के
करोल
बाग
में
कोचिंग
ज्वाइन
की।
10
माह
बाद
में
2023
में
प्री
का
पेपर
हुआ।
काजल
ने
कहा
एक
से
लेकर
12वीं
की
पढ़ाई
सेंट
माइकल
स्कूल
से
की
है।
2017
में
दसवीं
कक्षा
में
95%
अंक
अर्जित
किया।
12वीं
का
गणित
समूह
में
91
प्रतिशत
लाकर
माता-पिता
का
मनोबल
जीता।


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(काजल
के
पिता
अभी
मैहर
में
तैनात
हैं) 


जब
तक
सफलता

मिले
तब
तक
हर
ना
मानें

काजल
ने
डिग्री
कॉलेज
में
दाखिला
लिया।
बीए
में
इतिहास
राजनीति
विज्ञान

अर्थशास्त्र
विषय
पर
फोकस
किया।
उसने
आर्ट
समूह
में
81%
के
साथ
ग्रेजुएशन
कंप्लीट
किया।
इसके
बाद
दिल्ली
कोचिंग
करने
चली
गईं
साथ
ही
इग्नू
से
एमए
कर
रही
हैं।
काजल
ने
कहा
कि
दिल्ली
में
कोचिंग
में
किसी
दिन
एक
या
दो
क्लास
लगे।
पर
रूम
में
खुद
को
8
से
10
घंटे
कैद
कर
लिया।
तैयारी
करने
वाले
लक्ष्य
बनाएं
जब
तक
सफलता

मिले
तब
तक
हर
ना
मानें।


मां
ने
किया
संघर्ष

काजल
की
मां
मीरा
सिंह
ने
बताया
कि
दो
बेटी

एक
बेटा
को
अच्छी
शिक्षा
देने
के
लिए
कोई
सोने
चांदी
के
जेवर
नहीं
खरीदे।
सिर्फ
शादी
का
एक
मंगलसूत्र
है।
पति
विजय
सिंह
कहते
हैं
कि
बेटी
तो
गहना
ही
है।
यह
सफलता
की
सीढ़ी
चढ़
गई
है
तो
फिर
गहने
ही
गहने
हैं।
बातचीत
में
कहा
कि
हमारी
विजय
सिंह
से
शादी
1995
में
हुई
थी।
वे
पहले
छत्तीसगढ़
में
थे।
बंटवारे
के
बाद
सतना

गए।
मायका
रामपुर
बघेलान
के
पंडखुड़ी
में
है।
बेटियों
को
कक्षा
1
से
लेकर
पांचवीं
तक
खुद
पढ़ाया
है।